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Thursday, 19 August 2021

सोमिल आर्य की कलम से -4

 : सुपरमैन वर्सेज ध्रुव :-


एक मोस्ट वांटेड अपराधी की तलाश में सुपरमैन राजनगर में आता है और उसके आते ही राजनगर के पक्षियों से ध्रुव को सूचना मिल जाती है कि कोई पराशक्ति वाला परग्रही यहां आया है।

फिर वो सुपरमैन से मिलने निकल पड़ता है और आखिरकार उसे ढूंढ़ ही लेता है।

ध्रुव : कौन हो तुम ?

सुपरमैन : मै सुपरमैन हूं यहां एक मोस्ट वांटेड अपराधी की तलाश में आया हूं और उसे मारे बिना नहीं जाऊंगा।

वैसे तुम कौन हो ?




ध्रुव : मै सुपर कमांडो ध्रुव हूं,  यह क्षेत्र मेरे संरक्षण में है और मेरे रहते यहां कोई किसी का बाल भी बांका नहीं कर सकता चाहे वो बाल किसी अपराधी का ही क्यों ना हो।

इसी प्रकार उन दोनों में बहस बढ़ते - बढ़ते विवाद बन जाता है और ये विवाद एक महायुद्ध का रूप ले लेता है।

सर्वप्रथम सुपरमैन ने ध्रुव को अपनी हीट विजन से निशाना बनाया।

ध्रुव उछल कूद कर बच जाता है सुपरमैन के हीट विजन का कोई भी वार ध्रुव को छू तक नहीं पाता है।

तत्पश्चात ध्रुव अपनी स्टार ब्लेड से सुपरमैन के ऊपर ताबड़तोड़ हमला करता है और सुपरमैन का शरीर घायल हो जाता है मगर फिर सुपरमैन भी ध्रुव को एक मुक्का मारता है जिससे ध्रुव बहुत दूर जाकर गिरता है।

फिर सुपरमैन ध्रुव के पास उड़ता हुआ आता है और उसे मारने की कोशिश करता है मगर ध्रुव उसके वार को बचा लेता है और पकड़ के सुपरमैन को एक किक मारता है जिससे सुपरमैन जमीन के नीचे आ जाता है।

फिर उसके बाद ध्रुव सुपरमैन को स्टार लाइन से बांध कर एक मुक्का मारता है तो सुपरमैन से मुंह से खून  की बौछार निकालने लगती है।

मगर जल्दी ही सुपरमैन स्टार लाइन तोड़ के आजाद हो जाता है और ध्रुव को हीट विजन का निशाना बना देता है। हीट विजन ध्रुव के बाएं कंधे से छू के निकल जाती है।

तब ध्रुव समझ जाता है कि इसे रोकना ज़रूरी है वरना ये कोई बड़ी तबाही फैला सकता है।

ध्रुव ने तुरंत ही पास में पड़ा एक लोहे का रॉड उठाके सुपरमैन के सिर में मारता है।

लोहे की रॉड पड़ते ही सुपरमैन तड़पने लगता है

और सुपरमैन का सिर फट जाता है खून निकल आता है।

फिर भी सुपरमैन ध्रुव से लड़ता रहता है।

ना जाने कितने घंटो तक दोनों यूं ही एक दूसरे से द्वंद्व करते रहे मगर ध्रुव भी हार मानने वालों में से नहीं था और फिर आखिरकार ध्रुव की मजबूत बाहों से सुपरमैन की गर्दन जा फंसी।

सुपरमैन ने बहुत कोशिश करी छुड़ाने की मगर असफल रहा। 

फिर भी ध्रुव समझ चुका था कि सुपरमैन ऐसे नहीं हार मानने वालो में से नहीं है।

और मन ही मन में ध्रुव ये भी सोच रहा था कि " ऐसे तो ये द्वंद्व अनिश्चितकाल तक चलता ही रहेगा, कुछ तो करना ही पड़ेगा जिससे मै इस सुपरमैन को हरा सकू।

ओह एक आइडिया आ तो रहा है शायद काम कर जाए "

तब उसने कमांडो फोर्स से सुपरमैन के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि सुपरमैन को सिर्फ क्रिप्टो नाइट से ही मारा जा सकता है जो सिर्फ सुपरमैन के दुश्मन बैटमैन के पास है।

तब ध्रुव बैटमैन से मानसिक संपर्क स्थापित करके उसे अपने स्टार कॉप्टर द्वारा यहां बुलवा लेता है और इस बीच ध्रुव ने पूरे 3 घंटे तक सुपरमैन की गर्दन को अपने मजबूत हाथो से जकड़ रखा था....और जब बैटमैन आ जाता है तो उससे क्रिप्तो नाइट ले के सुपरमैन को मार देता है।

         :- समाप्त -:

सोमिल आर्य की कलम से -3

 सबम नायक :-

एक युग...................ध्रुव का युद्ध।


सबम नायक प्रतियोगिता के अन्तर्गत ध्रुव को थानोस के पास और जोजो को अपोकलिप्स ग्रह के शासक ' DARKSEID ' के पास भेजा जाता है उनसे लडने के लिए।

नियम ये था कि जो सबसे पहले विजयी होकर लौटेगा वोह इस स्पर्धा का विजेता होगा।

सर्वप्रथम, जोजो जब अपोकालिप्स के शासक DARKSEID से लडने जाता है तो DARKSEID की टेढ़ी - मेढ़ी हीट विजन जोजो को अपना निशाना बनाती है जिससे असावधान जोजो तुरंत ही बैकुंठ धाम की यात्रा पर चला जाता है।

DARKSEID भी मन ही मन कहता है कि " कैसे - कैसे मच्छर मुझे मारने पड़ रहे हैं। "

दूसरा भाग - अब जब ध्रुव thanos के सामने पहुंचता है तो Thanos पूछता है कि " तुम कौन हो प्राणी और कहां से आए हो।"

तब ध्रुव कहता है कि मै हूं सुपर कमांडो ध्रुव।

तुम्हारे जैसे परग्रही दैत्यों का काल।

अभी - अभी कुछ दिन पहले ही तेरे ही जैसे एक परग्रही की गर्दन 3 घंटे तक दबोच के रखी थी मैंने आज तेरा नंबर है।" 

इतना कहने के बाद ध्रुव Thanos के ऊपर ताबड़तोड़ स्टार ब्लेड्स से हमला कर देता है लेकिन स्टार ब्लेड्स Thanos तक पहुंच पाते इससे पहले ही Thanos तक वहां से teleport होकर ध्रुव के पीछे पहुंच जाता है और ध्रुव को एक जोरदार किक मारता है।

ध्रुव का सिर चकरा जाता है लेकिन उसकी इच्छाशक्ति ने उसे बेहोश ना होने दिया।

इस बार जब ध्रुव उठा तो Thanos को सोचने तक को मौका ना दिया और अपने कलारीपायात्तू के दांव पेंच से Thanos के कंसबल ढीले कर दिए और आखिर में ध्रुव का मुक्का खाकर Thanos तक ज़मीन चाटने लगा।

Thanos को हारता देख उसकी सारी सेना का मनोबल बुरी तरह से टूट गया और सब भाग गए।

और तब ज़मीन के नीचे पड़े हुए Thanos ने ज्यो ही उठने की कोशिश करी।

ध्रुव का भारी भरकम पैर Thanos के सिर को दबाता हुआ वापस ज़मीन से सटा देता है और लाख कोशिश करने के बावजूद ध्रुव के पैर के नीचे से अपने आपको निकाल नहीं पाता है। 

तब Thanos ने अपने आराध्य देव ' DARKSEID को याद किया और उनसे सहायता मांगी।

DARKSEID जोकि एक देवता ( अंधेरे का ) या लगभग एक भगवान् समान था अपने ग्रह अपोकलीप्स का, वोह तुरंत ही अपने बेटे Kalibak के साथ Thanos की मदद को पहुंचे।

मगर यह क्या, Thanos की इतनी बुरी दुर्दशा देखकर DARKSEID अत्यंत क्रोधित होते हुए अपने बेटे Kalibak को ध्रुव को मसलने का आदेश देते है।

शायद वे ध्रुव को एक मच्छर समझ रहे थे और अब वे मच्छर मारने के मूड में लग नहीं रहे थे।

तो उनके सूवर जैसे बेटे Kalibak ने ध्रुव के ऊपर छलांग लगा दी मगर ध्रुव कलाबाजियां खाकर बच जाता है और Kalibak की टांग को अपने हाथ से पकड़कर, अपनी पूरी इच्छाशक्ति झोंकते हुए उसने Kalibak के शरीर के दो टुकड़े कर दिए।

DARKSEID आश्चर्य के सागर में गोते लगाने लगा।

उसका मुंह बंद और गुस्से से आंखे सुर्ख लाल हो रही थी।

नथुने फूल - पिचक रहे थे।

मन में बस यही एकमात्र अरमान रह गया था कि ' अब इस इंसान रूपी मच्छर को मै ही मसलूंगा, वो भी अपने खुले हाथो से।'

मगर उसने अभी सुपर कमांडो ध्रुव के जज्बे और हिम्मत और इच्छाशक्ति को पहचाना कहां था।

जिसकी इच्छाशक्ति के आगे बड़े से बड़े खलनायकों ने भी अपने घुटने टेक दिए, उसकी इच्छाशक्ति को अभी ललकारा कहां था।

मगर DARKSEID भी अंधेरे का देवता था। इतनी जल्दी पराजित होनी वाली शक्सियत नहीं थी।

ये वोह ज़ालिम देवता है जिसने कई ग्रहों को तोड़ा , फोड़ा और उजाड़ा था सिर्फ शासन करने के लिए।

और उसके लिए ध्रुव एक मच्छर से ज्यादा कुछ भी नहीं था।

अब DARKSEID ने गुस्से से भरी उन लाल सुर्ख आंखो से टेढ़ी मेंढ़ी हीट विजन से ध्रुव के ऊपर हमला करता है।

ध्रुव की उछलकूद फिर से चालू हो जाती हैं।

बिजली की गति से ध्रुव लगातार अपने आपको उस टेढ़ी मेढी हीट विजन का निशाना बनने से बच रहा था मगर जहां जहां ध्रुव कुलाटी मारे वहां वहां वह टेढ़ी मेढी हीट विजन ध्रुव को निशाना बनाने के लिए पहुंच जाए।

और ध्रुव सोचने के लिए मजबूर हो जाता है कि " ऐसे तो ये हीट विजन देर सबेर मुझे अपना निशाना बना ही लेगी, कुछ तो करना पड़ेगा ध्रुव वरना मै, प्राण, प्रतियोगिता और अपना युग तीनों को हार जाऊंगा।

मगर इस बिफरे हुए सांड से निपटू कैसे।

अरे वाह ! एक आइडिया आ तो रहा है ट्राई करके देखता हूं। "

तब ध्रुव ने अपनी यूटिलिटी बेल्ट में रखा हुआ पोर्टेबल आइना निकाला और उसे उस हीट विजन के सामने कर दिया।

फलस्वरूप हीट विजन पलट के DARKSEID को ही लग जाती है और DARKSEID ज़मीन में गिर जाता है।

और ध्रुव DARKSEID के ऊपर स्टार ब्लेड्स से हमला करना शुरू कर देता है जिससे DARKSEID घायल होने लगता है। क्रोधवश DARKSEID ने अपनी हीट विजन से ध्रुव के दोनों ब्रेसलेट तोड़ डाले।

अब ध्रुव के पास कोई हथियार नहीं बचा था जिससे कि वो DARKSEID का मुकाबला कर सके।

तब उसने अपने शारीरिक बल और इच्छाशक्ति द्वारा ही DARKSEID को मारने की ठान ली और उछल कर DARKSEID के पीछे जाकर उसकी गर्दन को अपने मजबूत शिकंजे में फंसा लेता है और DARKSEID का गला घुटने लगता है। वोह लाख छुड़ाने की कोशिश करता है लेकिन ध्रुव की इच्छाशक्ति के आगे उसकी सारी कोशिशें नाकाम सिद्ध होती है और अब उसकी आंखे बाहर की ओर निकालने को तत्पर होने लगती है तभी उसने अपनी टेढ़ी मेढी हीट विजन से ध्रुव को पीछे से ही सही पर निशाना बना देता है।

ध्रुव घायल हो जाता है और DARKSEID उसकी पकड़ से आजाद हो जाता है।

अब ध्रुव को अपना और अपने युग का अंत अपने सामने नज़र आ रहा था।

तब ध्रुव ने अपना सम्पूर्ण ध्यान लगाके अपनी इच्छाशक्ति की तरंगों को मदद के लिए फैला देता है और उसकी इच्छाशक्ति की तरंगों कई यूनिवर्स पार करके एसगार्ड नामक ग्रह पर जा पहुंचती है और वहां के राजकुमार एवम् महान योद्धा Thor को ढूंढ निकालती है और उसके मोजीर ( हथोड़े ) को थोर सहित अपोकिलिप्स ग्रह पर जा फेंकती है और थोर का हथौड़ा उसके हाथो से छूटकर ध्रुव के हाथ में जा पहुंचता है।





ये ध्रुव की मजबूत इच्छाशक्ति का ही कमाल था कि वो मोजिर Thor के हाथो से छूटकर ध्रुव के हाथ में जा पहुंचता है।

मगर तब तक Thanos भी संभल चुका होता है और ध्रुव के ऊपर कूदने के लिए छलांग लगा देता है मगर कमांडो अपनी अपनी इच्छाशक्ति का अद्भुत प्रदर्शन करते है वहां से हट जाता है और एक हथौड़ा Thanos के कमर में मार देता है और Thanos की कमर टूट जाती है तब ध्रुव Thanos की छाती पे बैठ के Thanos का गला दबा के उसे मौत की नींद सुला देता है।

और अब DARKSEID को मारने के लिए हथौड़ा उठाया और दौड़ते हुए ध्रुव उसी हथोड़े से DARKSEID का सिर एक झटके में पके टमाटर की भांति फोड़ देता है और उसका भेजा बाहर निकाल देता है।

        :- समाप्त -:

सोमिल आर्य की कलम से -2

 : कप्तान कूल वर्सेज डेडपूल :-

लेखक - सोमिल आर्या

परिकल्पना - Pratham A 





आज राजनगर का वोह हिस्सा काफी शांत सा, वीराने जैसा लग रहा था।

जगह - राजनगर के डंप यार्ड के पीछे वाला गोरा कब्रिस्तान के पीछे वाली गली।

इटली और अमेरिका के ड्रग माफिया ' बास्तेटो ' और चार्ल्स ' आज उस जगह, राजनगर के ड्रग लॉर्ड ' चिन्नास्वामी ' से मीटिंग करने आए हुए थे।

इस बात से बेखबर कि कोई काला कौवा उन्हें लगातार देख रहा है।

और राजनगर में सारे पक्षी सिर्फ एक ही इंसान की जासूसी करती है। किसकी ? 

बताने की ज़रूरत नहीं।

चार्ल्स - चिन्नासामी, तुम्हे फक्का यखीन है ना कि इधर कोई धिक्कत नहीं होगी हम लोगो को मीठिंग करने में ?

चिन्नास्वामी - डोंट वरी, मिस्टर चार्ल्स, हम यहां पर है इस बात का पता तो रॉ, सी.आई.ए. भी नहीं लगा सकती और किसी की तो दूर की बात है।

बास्टेतो - हमें रॉ, सी.आई.ए. का डर नहीं, हम तो उस शैतान का अवतार से डारा हुआ है।

एक शैतान तुम्हारे देश में तो एक हमारे देश में हम लोगो की जान का धुस्मन बना हुआ है। इसीलिए वहां का रिस्क ना लेके हम लोग इधर को मीटिंग किया।

इधर वोह तुम्हारा शैतान का अवतार आ भी गया तो हम लोगो की फौज से बच के नहीं जा पाएगा। आखिर है तो इंसान ही ना।

मगर हमारे देश में जो है वो तो साक्षात् शैतान ही है। उसपे तो गोली, बम, चाकू, तमाम हथियार उसके ऊपर बेकार है।" 

काले कौवे ने, दूसरे काले कौवे को, दूसरे काले कौवे ने तीसरे काले कौवे को जानकारी दी कि कब्रिस्तान के पीछे वाली गली में कुछ अज्ञात लोग मौजूद हैं।

और कौवे के द्वारा जल्द ही यह जानकारी सुपर कमांडो ध्रुव के पास पहुंचा दी गई।

ध्रुव ने सुपर बाइक पे सवार होकर निकल पड़ा।

( कब्रिस्तान में ) ठो फिर हम लोगो की ढील फक्की ना ? 

चार्ल्स बोला।

चिन्नास्वामी - ऑफकोर्स चार्ल्स जी ऑफकोर्स, डील तो पक्की हो गई है तो आप लोग क्यों ना मेरी मेहमान नवाजी का आनंद उठाइए, मेरे अड्डे पे चलके।

वहां पर आप लोगो के जश्न का पूरा इंतजाम किया गया है और जश्न के बाद आप दोनों की थकावट उतारने वाली का भी इंतजाम किया गया है।

मगर आप लोग ज़रा ये बताइए कि आप लोग वहां इटली और अमेरिका में किसके आतंक से इतना डरे हुए है? ऐसा कौन सा माई का लाल पैदा हो गया जिससे आप लोग भी घबरा गए ?

चार्ल्स - डेड....

उसका नाम भी मत लो चार्ल्स। ( बास्टेटो ने चार्ल्स को बीच में ही टोकते हुए कहा )

उस मनहूस तलवारबाज़ ने तो हमारा जीना हराम कर रखा है। ( बास्तेतो ने दांत पीसते हुए कहा )

तभी चिन्नास्वामी ने दोनों से कहा " अब यहां समय बर्बाद करने से कोई फायदा नहीं होने वाला, अड्डे चलके थोड़ा मूड फ्रेश कर लीजिएगा।

तीनों गाड़ी में बैठने ही वाले थे कि एक जबरदस्त हवा का झोंका आया और चार्ल्स का सिर अपने धड़ से गायब हो गया था।

सभी लोगो ने अपनी बंदूके, पिस्तौल लोड करके हाथो में पकड़ ली, यहां - वहां नजर मारी पर कोई दिखाई ना पड़ा।

तभी एक सुर्ख लाल पोशाक पहने एक व्यक्ति, जिसके दोनों हाथो में कटाना (तलवार) थी। वोह ऊपर से पके आम की भांति टपका और अपनी सरसराती कटाना से 2 दर्जन गुंडों के हाथ पैर सिर 22 सेकेंड में काट कर ज़मीन में बारिश की बूंदों की तरह बिखरा दिए और अपनी गन निकाल के 8 लोगो का भेजा फाड़ देता है और कहता है कि " ये मेरा हेल्लो कहने का स्टाइल है " और उनकी पैंट उतार - उतार कर कुछ चेक करने लगा और बोला - कुछ लोगो ने मेरे घर में आकर मेरे सारे सामान का सत्यानाश कर दिया। तब मै घर पे नहीं था।

मै तब भी उन्हें छोड़ देता मगर तुम सालो ने मेरा फेवरेट चढ्ढा भी गायब कर दिया जिसे मै दिलोजान से प्यार करता था। इसीलिए अब तो मै नहीं छोडूंगा तुम लोगो को क्योंकि मुझे पता चला है कि वोह तुम ही लोगो का गैंग था जो मेरे घर में आए और मेरा चढ्ढा गायब कर दिया। ज़रा देखू तो तुममें से किसी ने मेरा चढ्ढा तो नहीं पहना है 


चिन्नास्वामी और बास्तेटों ने गाड़ी में बैठ कर उस नकाबपोश को उड़ाने की सोची मगर वोह नकाबपोश फूर्ति से उछलकर गाड़ी के ऊपर आया और अपनी दोनों कटाना चिन्नास्वामी और बास्टेतो की सिर में गाड़ी के ऊपर से ही पेवस्त कर दिया।

सभी को निपटाने के बाद वोह नकाबपोश जा ही रहा था कि स्टार लाइन ने उसके पैरो में लिपट कर उसे गिरा दिया।

नकाबपोश - किस सूवर की मौत आई है जो डेडपूल को रोक कर अपने पंचनामे के कागज पर खुद हस्ताक्षर कर रहा है ?

मुझे सुपर कमांडो ध्रुव कहते है और ये नगर मेरे संरक्षण में है और कोई भी व्यक्ति यहां कानून व्यवस्था को धता बताकर मेरे हाथो की पकड़ से नहीं बच सकता।

क्योंकि कानून के तो सिर्फ हाथ ही लंबे है मगर मेरा ये भी लंबा है।

Deadpool - क्या ?

ध्रुव - अबे, स्टार लाइन की बात कर रहा हूं।

डेडपूल - अबे, तेरी स्टार लाइन की तो ऐसी की तैसी, 

तेरे संरक्षण में चाहे ये नगर हो या हो नगर निगम।

डेडपूल को जहां भी गंदगी नजर आएगी, वहां थोक के भाव में फिनायल डाल के साफ करेगा।

ध्रुव - जो भी हो। अब तुम्हे यहां अपने आपको कानून के हवाले करना होगा। उसके बाद तुम्हारा क्या करना है वो हमारी न्याय पालिका समझ लेगी।

अब बेहतर यही है कि तुम अपनी मर्ज़ी से मेरे साथ चलोगे वरना मुझे दूसरे रास्ते अपनाने पड़ेंगे।

डेडपूल - अबे जा, मै जा रहा हूं और अगर अपने ओवर स्मार्ट से भरी हुई बुद्धि वाले सिर को अपने धड़ पे देखना नहीं चाहते हो तभी रोकियों मुझे।

इतना कहकर डेड पूल जाने लगा तो ध्रुव ने अपनी स्टार लाइन से उसे बांध दिया। डेडपूल ने भी अपनी कटाना से स्टार लाइन काट डाली और उछलकर ध्रुव के जबड़े पे लात रसीद कर दी।

अचानक पड़ी लात से ध्रुव का सिर चकरा गया।

होश संभालते हुए उठा और कलाबाज़ी खाते हुए डेड पूल को एक जोरदार किक मारी जिससे डेडपूल भी थोड़ी दूर जाकर गिरता है।

डेडपूल के गिरते ही ध्रुव उसके ऊपर स्टार ब्लेड्स की बौछार कर देता है। 

डेडपूल थोड़ा घायल हो जाता है मगर उसके घाव भी जल्द ही भर जाते है।

उधर डेडपूल ने भी अपनी गन निकाल के ध्रुव के ऊपर ताबड़तोड़ फायरिंग करनी शुरू कर दी।

मगर कप्तान तो आखिर कप्तान है।

कोई भी ध्रुव को छू भी ना सकी और डेडपूल की गन की मैगजीन खाली हो जाती है।

अब ध्रुव ने अपना मुक्का डेड पूल के थोबड़े पे मारा तो डेडपूल के चार दांत टूट जाते है मगर तुरंत ही उसकी जगह नए दांत भी आ जाते है।

ध्रुव भी हैरत में पड़ गया कि ये कमबख्त है क्या चीज़। क्या इसके शरीर में रेजेनरेशन की शक्ति मौजूद है या फिर ये कोई चमत्कार है। अगर ये चमत्कार है तो मुझे भी अपना चमत्कार इसे दिखाना ही पड़ेगा।

तब ध्रुव अपनी इच्छाशक्ति के द्वारा एक मोटा बरगद का पेड़ उखाड़कर डेड पूल के ऊपर दे मारता है मगर डेडपूल ऐन वक्त पर अपनी कटाना से वोह पेड़ काट डालता है और खड़ा हो जाता है।

ध्रुव - तुम्हारे लिए अच्छा यही है कि अपने आपको कानून के हवाले सौंप दो वरना तुम देख ही चुके हो कि मै अपनी इच्छाशक्ति से क्या क्या कर सकता हूं।

डेडपूल - " अबे तेरी, इच्छाशक्ति की बत्ती बनाके मै तेरे कान में डालूंगा, हट जा मेरे रास्ते से वरना जान से मार डालूंगा।"

दोनों में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं थे और इसीलिए उन दोनों में फिर से द्वंद्व शुरू हो जाता है।

कभी ध्रुव भारी पड़ता तो कभी डेडपूल। दोनों बहुत देर तक एक दूसरे से लड़ते रहे

और फिर ध्रुव ने अपनी इच्छाशक्ति से भरी हुई जोरदार किक डेडपूल के सीने में मार दी और डेडपूल, डेडबॉडी बन जाता है।

ध्रुव डेडबॉडी का निरीक्षण

करने उसके पास जाता है।

मगर तभी डेडपूल झटके से उछल कर ध्रुव के पीछे खड़ा हो जाता है और अपनी कटाना से ध्रुव की कमर पे वार करता है जिससे ध्रुव की यूटिलिटी बेल्ट टूट जाती हैं और ध्रुव की पैंट नीचे की ओर खिसकने लगती है।

और ध्रुव का ध्यान भटकने लगता है जिस कारण डेडपूल की कटाना का एक वार ध्रुव की बाह को छू के निकल जाता है।

तभी वहां पे रिचा उर्फ ब्लैक कैट की एंट्री होती है और वो ध्रुव से कहती है कि " तुम फिक्र मत करो ध्रुव, मै आ गई हूं, तुम्हारी मदद करने को। "

ध्रुव - कोई बात नहीं ब्लैक कैट, मै अपनी इच्छाशक्ति से अपनी पैंट संभाल लूंगा, मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत नहीं। तुम जाओ यहां से।

ब्लैक कैट - तुम लड़को की यही प्रॉब्लम है, मर जाएंगे मगर एक लड़की की सहायता नहीं लेंगे। अपना ये झूठा आत्मसम्मान अपने पास रखो और चुपचाप मेरी मदद ले लो।" 

तब ब्लैक कैट ने अपनी इलेक्ट्रॉनिक टेलिस्कोपिक पूछ को बढ़ा कर ध्रुव की कमर में बांध देती है जिससे कि उसकी पैंट ना सरक जाए। मगर अगले ही पल डेडपूल अपनी कटाना से ब्लैक कैट की पूछ को काट डालता है जिससे ब्लैक कैट को गुस्सा आ जाता है और वोह अपने धारदार पंजों से डेड पूल के ऊपर हमला करती है मगर डेड पूल की किक ब्लैक कैट को पीछे की ओर धकेल देती है।

तब डेड पूल कहता है कि " क्यों री छमिया, ये नीला - पीला तेरा खसम लगता है क्या ? जो इसके लिए अपनी जान देने पे तुली है। वैसे है तो तू मेरी कटाना जितनी ही तेज तर्रार और मुझे काली बिल्लियां बहुत पसंद है  मेरे साथ डेट पे चलेगी क्या ? 

तुझे हर सुख दूंगा मै, बस एक बार तू मेरी हो जा।

ये नीला पीला तो तुझे भाव भी नहीं देता और देगा भी कैसे, इसने कभी हथियार ना उठाने की कसम जो खाई हुई है। इसीलिए ये तुझे खुश नहीं कर सकता मतलब नहीं रख सकता है।

तब डेडपूल अपना दिल निकाल कर ब्लैक कैट के सामने रख देता है और बोलता है कि ये सिर्फ तुम्हारे लिए ही धड़क रहा है ब्लैक कैट, आई एम् इन लव विथ यू ब्लैक कैट।

ये दृश्य देखकर ब्लैक कैट सकते में आ जाती है कि ये इंसान है या कोई मुर्दा, जो अपना सीना चीर दिल निकाल लेता है वोह भी अपने हाथो से। 

अभी तक ध्रुव अपनी पैंट संभालने में ही लगा हुआ था और तब डेड पूल कहता है कि " क्यों बे कप्तान, बड़ा उछल कूद मचा रिया तू, ज़रा पैंट उतार अपनी, देखू तो कहीं तू ही तो मेरा चढ्ढा पहन के उसे गंदा तो नहीं कर रहा।"

तब ब्लैक कैट ध्रुव को हौसला देते हुए कहती है कि, इसे मार डालो ध्रुव, ये इंसान नहीं है और भूलो मत तुम जुपिटर के सितारे हो।

तब डेड पूल बोलता है कि " जुपिटर का सितारा ? 

मगर जुपिटर तो मरा हुआ तारा है ना, डेड स्टार।

खैर मुझे क्या, तू कहीं का भी सितारा हो मगर अभी तो तू एक बेल्ट का मारा है ना ?

अब मुझे बस ब्लैक कैट मिल जाए तो मै टेम्स नदी में जाके डुबकी लगा आऊ।

यह सब सुनकर ध्रुव को क्रोध आ जाता है और

वोह अपनी इच्छाशक्ति से अपनी पैंट संभालते हुए डेड पूल के जबड़े पे लात जड़ दी और डेडपूल साइड में जा गिरता है।

तब डेडपूल कहता है कि " अबे बुझे हुए सितारे, क्यों अपनी मौत को दावत दे रहा है, मरना तो तुझे है ही अपनी मौत को कष्टदायक क्यों बनाना चाहता है।

अब तो तुझे बताना ही पड़ेगा कि डेडपूल क्या चीज है।" और अपनी कटाना निकाल के फुर्ती से ध्रुव का दाया हाथ उसके कंधे से जुदा कर देता है और ध्रुव के मुंह से दर्दनाक चीख निकल जाती है।

ब्लैक कैट भी उछल के आती है डेडपूल पे हमला करने के लिए मगर उसी क्षण उसके ऊपर उसकी रहस्यमई बीमारी का दौरा पड़ता है और ब्लैक कैट बेहोश हो जाती है।

तब ध्रुव उठता है और कहता है कि कोई बात नहीं, तुझे परास्त करने के लिए मेरा एक हाथ ही काफी है" और ध्रुव अपनी इच्छाशक्ति लगा के खड़ा हो जाता है और लड़ने लगता है।

तभी डेडपूल ध्रुव का बाया पैर भी धड़ से काट डालता है और ध्रुव फिर गिर जाता है। फिर ध्रुव कहता है कि मुझमें अभी भी इतनी इच्छाशक्ति है कि तुझसे लड़ सकु " और ध्रुव अपनी इच्छाशक्ति लगा के खड़ा हो जाता और बाएं हाथ से स्टार ब्लेड्स मारता है। 

सारे स्टार ब्लेड्स डेड पूल की कटाना से टकराने लगे और इधर उधर जाने लगे।

तब डेड पूल ने ध्रुव का बायां हाथ भी काट डालता है।

अब ध्रुव का साथ सिर्फ उसका दायां पैर ही दे रहा था और डेडपूल ने उसे भी काट डाला।

शरीर के दोनों हाथ पैर काटने के बाद भी उस लहूलुहान जिस्म में इच्छाशक्ति बहुत बाकी थी।

अपनी बची खुची इच्छाशक्ति लगा कर ध्रुव उछल उछल कर डेडपूल को अपने सिर से मार रहा था मगर डेडपूल की कटाना ने एक अंतिम वार किया और कप्तान का सिर धड़ से अलग कर देता है और इसी के साथ अपने कप्तान की इहलीला समाप्त हो जाती है। 

और जाते - जाते डेडपूल कहता है। " एक बात मत भूल, बेस्ट किलर इज डेडपूल।

        -: सेवा समाप्त :-

सोमिल आर्य की कलम से -1

  कष्टहर्ता :- 💜

            💚



अफगानिस्तान के गंभीर हालात देखकर ध्रुव वहां जाने का निर्णय लेता है।

करीम - कैप्टन, क्या वहां जाना सही रहेगा क्योंकि अब तक किसी भी देश ने उनकी तरफ मदद का हाथ नहीं बढ़ाया है। "

ध्रुव - कोई देश मदद को आगे आए ना आए, यह मेरा कर्तव्य है कि वहां जाकर मानवता की रक्षा करू, क्योंकि हमारा कर्म हमारे धर्म से बड़ा होता है।

और मेरा कर्म यही कहता है कि जो मुसीबत में हो उसकी रक्षा करना सर्वोपरि है तभी हम लोग सही मायने में मानव कहलाएंगे।"

रेणु - ठीक है कैप्टन, अगर आपने जाने की ठान ही ली है तो हमें भी अपने साथ ले चलिए।"

ध्रुव - नहीं रेणु, मै वहां तुम लोगो की जान खतरे में नहीं डाल सकता। इस विपदा से मुझे स्वयं निपटना होगा।"

शीघ्र ही ध्रुव अपने स्टार कॉप्टर में बैठकर अफगानिस्तान के लिए रवाना हो जाता है। अफगानिस्तान पहुंचते ही ध्रुव का मुसीबतों से सामना होना शुरू हो गया था।

अपना स्टार कॉप्टर काबुल में उतारते ही तालिबानी लड़ाके उसके ऊपर टूट लड़ते है और फायरिंग करनी शुरू कर देते है।

ध्रुव की किसी मानव की जान ना लेने की कसम आज उसे भारी पड़ने वाली थी।

मगर आज ध्रुव किसी को भी बख्शने के मूड में बिल्कुल नहीं था।

उसके मन में तालिबानों के प्रति नफरत इतनी प्रचंड थी कि आज सभी उस आग में झुलसने वाले थे।

करीब 400 लड़ाके ध्रुव के ऊपर टूट पड़े।

उनकी बंदूके तो ध्रुव का कुछ बिगाड़ नहीं पाई तो उन्होंने उसे जिंदा पकड़ने की ठान ली ताकि उसे अपने तालिबानी आका ' अबू बकर अल असद' के सामने पेश कर सके।

परन्तु जिस तरह आज ध्रुव के हाथ पैर तालिबानों के अंगो का नक्शा बिगाड़ रहे थे उससे लगता नहीं था कि ध्रुव उनके काबू में आएगा।

हालांकि ध्रुव में इच्छाशक्ति और साहस की कोई कमी तो ना थी,

परन्तु था तो वो सिर्फ एक मानव ही ना।

उससे जितना हो सका वोह लड़ा, उनके लिए जो खुद अपने लिए नहीं लड़ सके।

कुछ ही देर में ध्रुव अपनी इच्छाशक्ति, साहस और एकमात्र हथियार स्टार ब्लेड्स की मदद से उस स्थान को तालिबानों की लाशों से भर देता है। परंतु इतना लड़ते लड़ते अब उसकी इच्छाशक्ति भी जवाब दे रही थी, हालांकि उसके अंदर इस चीज की कोई कमी तो ना थी मगर उसके जख्मों से गिरते हुए खून ने उसे अत्याधिक कमजोर कर दिया था।

मैदान साफ हो चुका था। ऐसा ध्रुव को लगा इसीलिए वोह थोड़ा निश्चिंत हो गया था।

मगर तभी 2500 तालिबानों की फौज ने अचानक से धावा बोल दिया और ध्रुव को धोखे से बंदी बना लिया।

       :----:

 स्थान - पुल - ए - खिस्ती बाजार, कुंदुज, अफगानिस्तान।

"जहां एक समय इस बाज़ार में अफ़ग़ानिस्तान की लगभग सभी वस्तुएं मिला करती थी आज वहां गुलाम औरतों की खरीद फरोख्त चल रही है।

अफ़ग़ानिस्तान के लगभग सभी पुरुष अपने बीवी और बच्चों को यही छोड़कर देश से निकलने की फिराक में लगे हुए है। कैसे मतलबी लोग है जो अपने ही परिवार को काल व अपमान का ग्रास बनने के लिए छोड़ गए।

मै कभी ना आता ऐसे लोगो की मदद के लिए जो इतने स्वार्थी हो पर मुझसे वो टीस भी नहीं देखी गई जो यहां की औरतों और बच्चो के दिल से सिसक सिसक कर उठ रही थी।

निर्बलों पे होने वाले अत्याचार को रोकने और अत्याचारियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए ही तो सूरज डोगा बना है।"

 डोगा एक लबादा ओढ़े बाज़ार में प्रविष्ट होता है और तालिबानी इससे बेखबर थे।

वे तो बस इस समय लुफ्त उठाने में मग्न थे, अपनी अमानवीय कृत्यों का जो वो वंहा की महिलाओं को दे रहे थे।

"अफ़ग़ानिस्तान से भागते हुए सभी पुरुष दिख रहे हैं जो अपनी स्त्रियों और बच्चों को तालिबानी लड़ाकों के लिए छोड़ कर भाग रहे हैं। 

अपनी छोटी छोटी बच्चियों को उन दरिंदों को सौंप कर अपनी जान बचा कर भाग रहे हैं । 

सोच कर कलेजा मुँह को आ जाता है।  

यह कृत्य एकमात्र उनके संकीर्ण विचारधारा की देन है जिसमें स्त्रियों को एक 'सेक्स ऑब्जेक्ट '  के अलावा कुछ नहीं माना जाता। ये लोग लड़कियों और औरतों को अपनी हवस का शिकार बनाकर कई दिनों तक अमानवीय यातनाएं देने के बाद सेक्स स्लेव बनाकर बेच देते है। लानत है ऐसे लोगो पे जो सिर्फ अपने बारे में सोचते है और इन लोगो पे भी जो स्त्रियों को सिर्फ भोग - क्षुदा शांत करने के लायक समझते है।

एक हमारा इतिहास उठा लीजिए , हमारे सिर कट गए हैं लेकिन हमने अपनी स्त्रियों की मर्यादा की रक्षा के लिए महाभारत कर दिया था और समुद्र तक पर पुल बाँध दिया था ।

लाखों क्षत्रियों ने सिर्फ अपनी ही नहीं , हर वर्ग की स्त्रियों की रक्षा के लिए धड़ाधड़ शीश काट दिए या तो कटा लिए लेकिन अपनी स्त्रियों की रक्षा से कोई समझौता नहीं किया।

और आज डोगा भी यहां समझौता करने के मूड में बिल्कुल भी नहीं है।"

 डोगा एक कोठी के सामने जा पहुंचता है और कोठी के दरवाजे को जोर से लात मारकर तोड़ देता है।

अंदर औरतों व नाबालिग बच्चियों के साथ हो रहे हैवानियत का मंजर देखकर डोगा की आंखो में खून उतर आता है।

तुरंत अपनी AK96 उतार कर आतंकियों को भूनने में लग जाता है डोगा और कहता है कि " तुम हैवानों ने हैवानियत की सारी हदें लांघ दी है। आज डोगा तुम लोगो को सिर्फ तुम्हारी हदों का अहसास ही नहीं करवाएगा बल्कि तुम लोगो को मौत का वोह नंगा नाच दिखाएगा कि तुम लोगो की जन्नत में 72 हूरो से मिलने की तमन्ना भी दया की भीख मांगेगी।"

डोगा की लगातार बरसती गोलियां, आतंकियों से सिर से उनके भेजे को फाड़ते हुए निकल रही थी।

डोगा - "आज ये कुत्ता तुम सियारो का, शेर होने के भ्रम का स्तंभ उखाड़ फेंकेगा और फाड़ खाएगा तुम्हारी चर्बियों को और नेस्तनाबूद कर देगा तुम्हारे अस्तित्व को।"

आज वाकई में डोगा के क्रोध का लावा, ज्वालामुखी बन कर फूंट पड़ा था।

गोलियों से, चाकू से, तलवारों से, हाथों से।

आज डोगा हर हथियार का प्रयोग कर रहा है।

वोह एक अपराध विनाशक होने साथ साथ एक कुशल लड़ाका भी है। आज उसकी इसी डेडली फाइटिंग स्किल्स से कई आतंकियों को 72 हूरे नसीब हो चुकी थी।

कोठी के समस्त आतंकियों को निपटाने के बाद, डोगा ने वहां की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि " हर बार आप लोगो को मुसीबतों से बचाने कोई नहीं आएगा। अपने हक की लड़ाई आपको खुद ही लड़नी होगी। पुरुषों के भरोसे रहना या अपने आपको उनसे कम समझना बेवकूफी है। माना कि आप लोगो में उन दरिंदो जैसी शारीरिक शक्ति ना सही परन्तु साहस उनसे ज्यादा दिखाना पड़ेगा। एक बात याद रखो, हाथ नहीं हथियार सही। बस अंदर हिम्मत का ज्वालामुखी होना चाहिए।"

इसी के साथ डोगा वहां से बाहर निकल आता है मगर बाहर भी करीब 1500 आतंक के रहनुमा उसका इंतज़ार कर रहे थे।

तालिबानी - "ख़तम कर दो इस कुत्ते सी सूरत वाले काफिर को। आज अल्लाह मेहरबान है जो काफिरों की मौत हमारे हाथों लिखी है"

डोगा - "मुझे ख़तम करने में तेरी पुश्ते फना हो जाएंगी फिर भी ये कुत्ता तुम जैसे गीदड़ो को भमभोड़ने के लिए खड़ा रहेगा।"

तत्पश्चात डोगा अपने बेल्ट से ग्रेनेड निकाल कर आतंकवादियों की और फेकने लगता है और जगह जगह से तालिबानों के चीथड़े उड़ने शुरू हो जाते है। चारो तरफ से गोलियों की तड़तड़ाहट शुरू हो जाती है। अधिकतर गोलियों का निशाना डोगा ही था परन्तु वोह महारथी ही क्या जो अर्जुन की तरह चक्रव्यूह को भेद ना पाए।

डोगा उन सभी गोलियों को फूर्ति से डौज कर रहा था और बंदूकों और ग्रेनेड से आतंकवादियों को खत्म करता जा रहा था।

यकीनन आज वोह उस जगह से आतंकवाद का वजूद ही ख़तम कर देता परन्तु होनी को कुछ और ही मंजूर था। 

डोगा एक रॉकेट लॉन्चर के रॉकेट के विस्फोट की चपेट में आ जाने से पल भर के लिए ही सही, मूर्छित हो गया।

तालिबानी भीड़ ( चिल्लाते हुए ) - कत्ल कर डालो इसे....."

"रुको" एक आतंकी हाथ उठाकर उन्हें रोकता है और कहता है कि " इस काफिर ने हमारे कई भाइयों को बेदर्दी से मौत दी है। इसे इतनी आसान मौत नहीं मिलनी चाहिए। बंदी बना लो इसे भी। इसे और उस कमांडो वाले छोकरे को एक साथ पूरी दुनिया के सामने मीडिया की लाइव कवरेज में कत्ल करेंगे, ताकि कभी किसी और काफिर की हिम्मत ना हो हमारे नेक इरादों के रास्तों में रोड़ा बनने की" 

      :-------------:

जगह - गाजी अमानुल्लाह इंटरनैशनल क्रिकेट स्टेडियम , जलालाबाद।

समय - शाम से 5:30 pm 

आज न्यूज - ए - तालिबान की मीडिया पूरी तरह से तैयार थी डोगा और ध्रुव की मौत का लाइव कवरेज कवर करने के लिए और तैयार था खुद आका - ए - तालिबान ' अबू बकर अल असद ज़ैदी'

उन्हें मौत देने के लिए।

करीब 14000 तालिबानी आतंकियों से लबरेज़ थी वोह जगह और मैदान में थे ध्रुव, डोगा और आका - ए - तालिबान।

असद ज़ैदी - "तुम दोनों काफिर कौन हो अच्छी तरह से जानता हूं मगर तुम लोग यहां चले आओगे इसकी उम्मीद ना थी हमें।

तुम काफिर कितने ही बड़े तुर्रम खां क्यों ना हो, हमें हमारे जिहाद की राह से डिगा नहीं पाओगे।

अरे जिहाद तो अल्लाह का फरमान है और हमारी चाहत बस उस फरमान को पूरा करने में है।

और जो भी काफिर हमारे नेक रास्ते में आएगा, फना हो जायेगा। 

अरे अभी तो हम जिहादियों को ' खुरासान ' से निकलकर पूरा हिन्द फतह करना है।

इंशाअल्लाह वो दिन भी जल्द ही आएगा जब पूरी दुनिया पे हुकूमत सिर्फ हमारी होगी।

तुम दोनों काफिरों की मौत की मिसाल कायम करेंगे हम, मगर उससे पहले कुछ दिखाना ज़रूर चाहेंगे हम तुम दोनों को।

फजर, ले आओ उन बांदियो को, जिन्हें देख ये यहां उन्हें बचाने आए थे। आज इन्हीं के सामने बेआबरू करूंगा सभी बांदियों को।

तालिबानी आतंकी सभी हदें पार करते हुए औरतों को खींचते हुए सरे राह उन्हें बेआबरू करने लगे।

उन लोगो ने आतंकियों से रहम की भीख मांगी मगर उन दरिंदो की आखों में बस दरिंदगी ही नजर आ रही थी। हैवानियत का मैल उनके कानों में जम सा गया था जिसके आगे उन मासूम लड़कियों और औरतों की करुण वेदनाएं भी उनकी अंतरात्मा को झकझोड़ नहीं पा रही थी। 

डोगा और ध्रुव भी बेबसी के मारे अपने होठों को भींचे हुए थे और आंखो में उन्हें इस अमानवीय कृत्य से ना बचा पाने का अपराधबोध आंसू बन के निकल रहा था।

शायद उन्हें बचाने वाला कोई नहीं था।

या शायद था ?

अचानक से उस स्टेडियम में धमाका हुआ।

असद ज़ैदी चौंका कि ये क्या हुआ ? किसने किया ?

नज़रे उठा के देखी तो एक शख्स स्याह बादलों को चीरता हुआ मजलूमों की उम्मीद बनके चला आ रहा था।

उसकी आंखो से विष ज्वाला की लपटे निकल रही थी और मुंह से स्याह हरा धुआं आतंकवाद को खाक में मिलाने के लिए निकल रहा था।

हां आतंकहर्ता ही था वो जो उनकी पुकार को नकार ना सका।

और उस काल को हरने महाकाल आ गया था।

अब तांडव होना तय था।

"अरे, ये तो नागराज है, हमारे नेक इरादों का सबसे बड़ा दुश्मन। मगर ये तो मर गया था, खबीस की औलाद है ये फिर से जिंदा कैसे हो गया। मगर जिंदा हो भी गया है तो दोबारा मरेगा।

हमारी इस अकूत फौज के आगे नहीं टिकेगा एक अकेला शैतान।

मार डालो इसे।"

नागराज - "असद ज़ैदी, नागराज कोई अबला नहीं, जिसे तेरे तालिबानी दरिंदे अपनी बर्बरता का शिकार बना ले,

नागराज को फना करने का ख्वाब देखने वाले, तेरी हस्ती फना हो जाएगी, मेरी हस्ती को मिटाते - मिटाते।

नागराज की कलाइयों से अनगिनत सांप निकालने लगे और सर्प रस्सी बनकर स्टेडियम के उन मेटल ग्रिल से लिपट गए जो स्टेडियम को सहारा दिए हुए थे।

और नागराज ने वक़्त ना बर्बाद करते हुए तुरंत अपनी सर्प रस्सी खींच डाली जिसके फलस्वरूप पूरा स्टेडियम भड़भड़ा कर ढह गया और उसमेए बैठे हज़ारों के हिसाब से आतंकवादी मारे गए।

असद ज़ैदी - ( चिल्लाते हुए ) "या अल्लाह, यह काफिर तो कहर ढा रहा है।"

नागराज - "आज तुम लोगो को आतंकहर्ता का वो कहर दिखाऊंगा जिसे देखकर तुम लोगो की रूहे भी सरसरा जाएंगी

बर्बरता का वो नज़ारा दिखाऊंगा, जिसे देखकर तुम लोगो की सम्मिलित बर्बरता भी अदनी सी मालूम चलेगी।"

और वाकई में, आज आतंकहर्ता ने आतंकवाद को समूल नाश करने की जिद ठान ली थी।

नागराज के हाथ से ध्वंसक सर्प निकाल हर जगह तालिबानों में तबाही मचा रहे थे।

आज मौत का वो तांडव हो रहा था जिसे देखकर अगर यमराज भी आते तो उन्हें भी मौत का भय हो जाता और अपने कदम पीछे खींच लेते।

बर्बरता का जो मंजर उस हुजूम को दिखाया जा रहा था कि सभी में एक देहशत सी भर गई।

नागराज के तीव्र विष से आतंकियों के शरीर कोढ़ के जैसे गल रहे थे और कुछ को तो अपने नंगे हाथों से फाड़े दे रहा था वो आतंकहर्ता।

ना जाने कितने ही आतंकियों को नागफनी सर्पो से मक्खन के जैसे काटता चला गया वह।

यकीनन उसने जो किया वो तांडव ही था, मौत का तांडव।

उसके आगमन ने डोगा और ध्रुव के अंदर के हौसले को जगा दिया था अतः उन दोनों ने भी अपने बंधन तोड़ डाले और लड़ाई में नागराज का साथ देने लगे।

शीघ्र ही तीनों ने उस जगह को तालिबानों की लाशों से भर दिया और अबू बकर अल असद ज़ैदी भी नागराज के हाथों मारा गया।

      :- समाप्त -:

Monday, 14 June 2021

बृजमोहन की कलम से

 एक भाई ने पूछा था, ध्रुव की कोमिक्सों से हमने नया क्या सीखा-



Here's my reply-


अल्ट्रासोनिक साउंड, ग्लाइडर, रोप वे, वैज्ञानिक (बिहेमथ ऑफ हिन्दी कॉमिक्स इंडस्ट्रीज, नन अदर दैन-आवाज की तबाही)

रेडियो एक्टिविटी (वैम्पायर)

पाश्चुराइजेशन (मैंने मारा ध्रुव को)

जीरो ग्रेविटी (षड्यंत्र)

वायब्रेशन्स, एसिड इफैक्ट (सुप्रीमा)

भू गर्भीय जलस्तर (दलदल)

रेडिएटर, राशियों के बारे में (हत्यारी राशियां)

डायनोसोर, जुरासिक काल, मानव का विकास (महामानव)

स्वप्न विज्ञान, ऊष्मीय प्रभाव (सामरी की ज्वाला)

प्रकाशीय प्रभाव (अंधी मौत)

सॉफ्ट ड्रिंक्स नेचर, क्रोध को नियंत्रित करना, कह के लेना (अतीत)

नानचाक (चण्डकाल की वापसी)

पेड़ों में जीवन और सम्वेदना (विनाश के वृक्ष)

कृत्रिम अंगों का यांत्रिक प्रभाव, यूएफओ, भविष्य पर आधारित विज्ञान कथा (उड़नतश्तरी के बंधक)

मोर्स कोड (स्वर्ग की तबाही)

ईल मछली, एक्वेरियम (रोबो का प्रतिशोध)


लम्बी लिस्ट है। बाकी कोमिक्सों में भी बहुत कुछ सीखा


पार्कर, बेमिसाल तर्क क्षमता, बेजोड़ साहस और पीक माइंड कैपेबिलिटी (सुपर कमांडो ध्रुव की सभी कॉमिक्स)

Thursday, 15 April 2021

हिमांशु भाई की कलम से

 एक बात गौर किजिएगा! 


वो तो राज कॉमिक्स निरंतर बिकती रही, और लगातार नागराज और ध्रुव की कॉमिक्सो को प्रकाशित करती रही! तो Company इतने सालों तक Running में रही!हां वक्त के साथ किमतों में बदलाव होना लाजिमी है! ...... ये जो हम दुसरे कॉमिक्स के किरदारों को 300/400 रूपये एक कॉमिक्स के दे देते हैं!


 जैसे:-.हवलदार बहादुर/राम रहीम/क्रुकबाण्ड अन्य पब्लिकेशन के किरदारों के! ........ वजह ये हैं की वो कॉमिक्सो कंपनियां अब रनिंग में हैं नहीं! ...... और संख्या में कम हैं इसलिए किमत़ ज्यादा हैं! उनकी कहानियां भी राज कॉमिक्स के मुकाबले औसत ही रही हैं! (ऐसा मेरा मानना हैं) 


    जैसे चाचा चौधरी को बच्चा-बच्चा तक पहचानता हैं! वैसे ही नागराज और ध्रुव का क्रेज भी भारतीय कॉमिक्स जगत में, उतना ही रहा हैं... और हैं भी! 


    ध्रुव-नागराज की कहानियां इतनी बार प्रकाशित हुई इसलिए इतने लोगों की जुंबा पर वो नाम आ पाया! ...... मैं खुद कॉमिक्स के स्वर्णकाल मैं पैदा नहीं हुआ उम्र की बात अगर की जाए तो कोहराम कॉमिक्स जितनी उम्र हैं मेरी! (April 2000) 😊

    मेरा कॉमिक्स क्रेज़ आप सब भली भांति जानते होंगे, 2000 के बाद मनोरंजन के कईं साधन विकसित हुए कागज़ पर आने वाले किरदार 30-32 इंच के डब्बे(T.v.) पर स्वचालित होने लगें, तो पढने की ज़हमत कौन करें? रही सही कसर इस 5-7 इंच के डब्बे (मोबाइल) ने पुरी कर दी! खैर इसी डब्बे की वजह से हम सब यहां हैं और ये ग्रुप हैं और कॉमिक्स का मार्केट भी तभी हैं|     

    2000 के बाद मैं भी कॉमिक्स फैन/लवर/ सेलर/बायर/कलेक्टर/ जुनुनी जो समझो वो बना ही हूँ.......

 अरे सॉरी ब्लेक मार्केटिया लिखना तो भूल ही गया 😊! 

    वजह ये थी कि तब तक ये किरदार कॉमिक्स की दुनिया में बने रहे! उनकी पापुलैरिटी ने मुझे भी कॉमिक्स से जोड़ दिया! ..... इसलिए डायमंड कॉमिक्स का स्लोगन " 5 साल के बच्चों से लेकर 80 साल तक लोकप्रिय" ये फिट बैठता है! Rc भी हर उम्र के पाठकों को बांधे रखती हैं! 

    दुसरी कॉमिक्स के जो दाम आप 300-400 देते आ रहे, मैनें भी कईं कॉमिक्से इतने में ही बेची हैं! ..... इसलिए की वो गुमनाम किरदार हैं! ..... कॉमिक्स की दुनिया में सेलर और कलेक्टर के लिए "Rare" शब्द का मतलब हैं की गुमनाम किरदारों की कॉमिक्स जो प्रचलन में नहीं वो रेयर हैं! 

   एक बार खुद सोचिए, नागराज और ध्रुव इतनी बार प्रिंट नहीं होती तो उन कॉमिक्स का रेट आज़ क्या होता? ब्लेक मार्केट में वो कितने की बिकती? ........ उदाहरण के लिए "किरीगी का कहर" आज़ कितने में बिकती? 

  आज़ की तारिख में Comics की किमतों का आकलन उसका अप्रचलन और गुमनामी तय करती हैं, ना की अच्छी कहानी और अच्छे चित्र से परिपूर्ण होना! 

   किमत़ निर्धारित करना कंपनी की अपनी मर्जी हैं! जरूरी नहीं आप हर कॉमिक्स लें, कॉमिक्स अब मुलभत आवश्यकता की चीज़ तो हैं नहीं कि लेना जरुरी हैं! इस देश में कुछ लोगो को दो वक्त के लिए रोटी-पानी नसीब नहीं हैं! कॉमिक्स मनोरंजन का एक साधन हैं, अपर-मीडिल क्लास वाले लोगों का थपका हैं एक! (किराए का दौर समाप्त होने के बाद)

   जिन कंपनियों ने मेरा बचपन बनाया, में कोशिश करूंगा की उन कंपनियों या उनके किरदारों कि मैं किसी प्रकार की आलोचना ना करुं, और नकारात्मकता फैलाकर पाठको को दुर ना करुं, या कॉमिक्स प्रेमी को नागराज-ध्रुव के प्रंशसको में विभाजित ना करूँ! सबसे यही दरख्वास्त करता हूँ जिन्हें जो पसंद हो उनकी कॉमिक्स ले! 💐 बस नकारात्मकता से दूर रहें! 

नयी कॉमिक्स कंपनी "फिक्शन" के रेट पता होंगे आपको की क्या थें, उसे कभी कहानी से तोल कर देखा हैं? खैर! सबकी पसंद को नमन!💐

    Bargain अथार्त मौल भाव करना भारतीयों का धर्म हैं जरूऱ करें! आप कॉमिक्स को उसकी कहानी या उसके परिपूर्ण चित्र से उस कॉमिक्स को तोलें, ना की गुमनामी से! 💐 

    कॉमिक्स के कलेक्शन के इस शौक मैं मैनें बेकार कॉमिक्स की जो किमत़ अदा की हैं, तो नयी राज कॉमिक्स की किमतें सही है उस हिसाब से! बाके सबके अपने विचार हैं साहब!💐🙏 सबके विचारों का आदर अपनी जगह! 

   बस नकारात्मकता ना फैलाएं जो सही लगें वो कॉमिक्स लें! 

     आपका कॉमिक्स वाला दोस्त "हिमांशु" 😊🙏

Saturday, 14 November 2020

कॉमिक्स प्रंशसको की कलम से लेख

 ***

उसकी आँखें किसी ने नहीं देखी!!
खुद प्राण सर ने भी नही! अपने ज़माने का फुलटू मॉडर्न टीनएजर..आँखों को ढकते लंबे बाल, चुस्त-दुरुस्त काया, दिल्ली की गलियों में मस्ती करते फिरने वाला किशोर! क्रिकेट का दीवाना..फ्लिर्टी बॉयफ्रेंड...क्लास में स्लीपिंग मोड, दोस्तों का दोस्त, टेक्नो सैवी, मस्तमौला...उसके व्यक्तित्व के अनेक पहलू! 
         जी हाँ...अपना प्यारा शरारती, चतुर, डरपोक, भोला-भाला, मनमौजी..बिल्लू!!

       प्राण सर का ये करैक्टर अपने आप में बहुत ही मजेदार और आकर्षक है! खास बात ये की केवल इसी करैक्टर को क्रोनोलॉजिकल आर्डर में बढ़ते दिखाया गया है...माने रियल लाइफ जैसा! शुरुवाती कॉमिक्स में नन्हा शरारती बच्चा बिल्लू है( कुछ कुछ पिंकी जैसा ही)! उसके रुझान भी बस खेल-कूद, आइसक्रीम, चॉकलेट, लुका-छुपी, स्कूल से बचने का बहाना, पापा की डांट का डर...इन्ही के इर्द-गिर्द घूमता। फिर धीरे धीरे बढ़ता बिल्लू...टीनएज यानि किशोरावस्था में पहुँचता! यहाँ से कहानियां ज़्यादा रोचक होतीं। लेटेस्ट फैशन में रहना, मोबाइल-कंप्यूटर में खटर-पटर में दिलचस्पी,  रातों को हॉलीवुड मूवीज़ देखना, स्कूल में क्लास के वक़्त खर्राटे लेना, गर्लफ्रेंड जोज़ी के साथ मस्ती करना,और बेशक....हर वक्त क्रिकेट खेलने को तैयार रहना...ये सब उसके नए शौक व पसंद! इस तरह बिल्लू की कहानियों में कुछ बदलाव आये, जो अधिक मनोरंजक ही थे...ज़्यादातर कॉमिक हीरोज या तो वयस्क होते हैं या किड्स हीरोज। ऐसे में एक टीनएजर हीरो की ज़िन्दगी के किस्से देखने-पढ़ने में अपना मज़ा आता था! 

        हरदम कंधे पर शान से क्रिकेट बैट लिए, कैप पहने,दूसरे हाथ से बॉल उछालता हुआ आता दिखाई देता बिल्लू! क्रिकेट के मैदान का सितारा! अपनी सोसाइटी का स्टार बल्लेबाज़...चौके-छक्के उड़ाता। 
        दूसरी तरफ बजरंगी पहलवान से पंगे लेता, फिर उसे मूर्ख बनाता, जान बचाकर भागता या हड्डी-पसली तुड़वाता हुआ। रुस्तम-ऐ-हिन्द बजरंगी उस्ताद के डर से बचपन से किशोरावस्था तक डरता-भागता,और मन ही मन गबरू जवान बनके उसे मज़ा चखाने के ख्वाब देखता बिल्लू। 
            साथ ही साथ क्लासमेट और पडोसी जोज़ी के साथ रोमांस! कभी स्कूटर पर घुमाना या फ़ास्ट फ़ूड के लिए रेस्त्रां ले जाना, पर टीनएज की प्रॉब्लम से जूझता जेब में बस 50-100 का नोट होना..उस पर मन ही मन तिकड़म लगाना, गर्लफ्रेंड की नज़र में इज़्ज़त बनाये रखना..साथ साथ मौका मिलते ही स्कूल की नयी स्टूडेंट पर  इम्प्रैशन ज़माने की कोशिश करने में भी पीछे न रहना...गर्लफ्रेंड को मालूम हो जाये तो खैर बचाकर भागना और बहाने बनाना...ये सब बिल्लू के चुलबुले किशोर स्वाभाव की झलकियाँ!
        साथ ही कच्ची उम्र का मिडिल-क्लास, तंग-जेब मासूम आशिक़! अमीर कर्नल की बेटी से इश्क़ लड़ाता, खुर्राट कर्नल की नज़रों में फ़ालतू आवारा शरारती छोकरा! कर्नल की आँख बचाकर जोज़ी से मिलने उसके घर जाता...कर्नल की सख्त आवाज़ से उछल पड़ता, फिर रायफल की ..रेट रेट रेटटटट...निकलती गोलियों से सर झुकाकर बचता भागता बेचारा दिलफेंक आशिक़! 

   सब के सब किस्से मज़ेदार व खिलखिलाने वाले। अपने ज़माने के टिपिकल टीनएजर का प्रतिनिधि...शौक, कारनामे, इश्क़बाजी..सब कुछ! डायमंड कॉमिक्स में ये किरदार मुझे सबसे ज़्यादा पसंद होने की यही सब वजहें हैं...। अपने आप में एक मज़ेदार किरदार...आज भी बिल्लू कॉमिक्स पढ़ने में वही मज़ा आता है जो पहले! :)

Wednesday, 28 October 2020

कॉमिक्स प्रंशसको की कलम से लेख

 संसार में सुख के सत्य की तलाश में सिकंदर ने ज़मीन नाप दी, बुद्ध ने गृह त्याग दिया. सुख पर लिखी किताबें बेस्टसेलर बन गयी और सुख पाने के चक्कर में जाने कितने घनचक्कर मारे - मारे फिरते हैं. सुख कमबख्त है कि मुहल्ले की सामूहिक महबूबा बना हुआ है, जो क्षण भर को छत पर कपड़े सुखाने के लिये आये और उस क्षण के इंतज़ार में मुहल्ले का लौण्डागण दिन भर धूप में विद्यमान विटामिन डी सोख सोख कर टैन होते चला जाये.

तो मालिकों सुख की तलाश में बियाबान-रेगिस्तान भटक चुकने के बाद अचानक रेल्वे स्टेशन पर एक कॉमिक पा कर खुशी से झूम जाने वाले उस बालक की याद आयी जो कभी हम स्वयं हुआ करते थे. 

एक आठ रुपये की अदद कॉमिक पा कर कारूँ का खज़ानावाली जो फील आती थी उसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता. चिथड़ों में व्याप्त कॉमिक कम दामों में खरीद कर उसे किसी पुरातत्त्ववेत्ता वाली कुशलता से कभी सी कर, कभी स्टेप्लर मार कर पुनर्जीवित करने के सुख को भुला कर हम दुनिया के मायाजाल में ऐसे रमे कि भूल गये बण्डल बण्डल कॉमिक खरीद कर अलमारी सजा लेना सुख नहीं... सुख उन्हें बिखेर के फिर पढ़ने में है. फिर उन फटे कवर वाली कॉमिक्सों को देख कर याद करने में है कि इन्होंने हमारा कितना जीवन कैसे स्पेशल बनाया है इसलिये आज भी कॉमिक्स पढ़ना सच्चा सुख लगता है -

Sunday, 11 October 2020

कॉमिक्स_वाले_अंकल

 #कॉमिक्स_वाले_अंकल 


वो हमारे कॉमिक्स वाले अंकल थे। नाम तो उनका कभी पूछा नहीं। ये भी पता नहीं हिन्दू थे, मुसलमान थे या किस जाति से थे। ये सब बातें हमारे लिए बेमतलब बेमानी थीं। हम बच्चों को बस इतना ही पता था कि गली में उनकी छोटी सी दुकान थी। यूं दुकान तो किरयाने की थी, पर उसी के एक कोने में ढेर सारी कॉमिक्स भी रखी रहती थीं, और यही बात उनकी उस छोटी पुरानी सी दुकान को खास बनाती थी। 

जब मम्मी पैसे देकर घर का कुछ सामान लाने को भेजती तो हम दूसरी बड़ी दुकानों को छोड़कर कॉमिक्स वाले अंकल की छोटी सी दुकान में घुस जाते। जब तक अंकल सामान तौलते तब तक हम कॉमिक्स उलट पलट कर देखते रहते। जाने कैसी खुशी मिलती थी वहां। 

अंकल की दुकान पर ग्राहक कम ही होते थे। सब कहते थे उस पुरानी दुकान में कुछ घुटन सी रहती है। पता नही क्यों हमें वो घुटन कभी महसूस ही नहीं हुई। कभी जेबखर्च को कुछ पैसे मिलते तो लेकर हम सीधा अंकल की दुकान पर पहुंच जाते। उस वक्त वो 50 पैसे में कॉमिक्स किराये पर दिया करते थे। घर ले जाकर पढ़ने का एक रुपया लगता था। हम कम पैसो में ज़्यादा कॉमिक्स पढ़ने के लालच में वहीं बैठकर घण्टों कॉमिक्स पढ़ते रहते थे। वहीं बैठकर पढ़ने पर अंकल भी खुश रहते थे। शायद इससे उन्हें अकेलापन नहीं लगता था। गली की उस छोटी सी पुरानी दुकान में एक अलग ही किस्म का सुकून था।

वक्त बीत गया। हम बच्चे से बड़े हो गए। पुराना शहर भी छूट गया। कॉमिक्स का शौंक कुछ सालों के लिए पूरी तरह छूट कर फिर दोबारा भी शुरू हो गया। पर ज़िन्दगी की भागमभाग में उन सब यादों पर जैसे धूल की परत सी जम गई थी। 

फिर अभी 2 साल पहले किसी काम से पुराने शहर जाना हुआ। तब फिरसे कॉमिक्स वाले अंकल और उनकी दुकान की याद आई। मन में वही पुरानी उमंगें लिए गली की उस सबसे पुरानी दुकान पर पहुंचा।

अंकल अब नहीं रहे। दुकान आंटी और उनका लड़का मिलकर सम्भालते हैं। एक कोने में कुछेक कॉमिक्स भी पडी धूल खा रही हैं। पर वो पहले जैसा सुकून नहीं है। मैं ज़्यादा देर दुकान में खड़ा नहीं रह सका। उस छोटी, पुरानी दुकान की घुटन अब महसूस होने लगी है।


नोट: तस्वीर केवल प्रतीकात्मक मात्र है।

डोगा ही है रियल हीरो....

 डोगा ही है रियल हीरो....

आज की ये पोस्ट ये बताने के लिए है कि डोगा रियल हीरो क्यों है? नागराज और ध्रुव बहुत लोकप्रिय पात्र हैं लेकिन मुझे उनसे ज़्यादा डोगा पसन्द है। इसकी वजह है डोगा की कॉमिक्स की रियल स्टोरीज़। 


अगर डोगा की स्टोरीज़ को नागराज और ध्रुव की कॉमिक्स से कम्पेयर करेंगे तो पता चलेगा कि डोगा की कॉमिक्स वास्तविकता के कितने करीब होती हैं। जो समस्याएं हम अक्सर न्यूज़ में या अखबारों में पढ़ते हैं, डोगा ऐसी ही समस्याओं को जड़ से उखाड़ता दिखाई देता है।


आप सब कॉमिक प्रेमियों को याद होगा कि जब नागराज शाकूरा  के चक्रव्यूह में फंसा, नागपाशा द्वारा दिखाए गए सपनों के मंदिर का पीछा कर रहा था और ध्रुव सर्कस में स्टार फिश की मानसिक शक्तियों का सामना कर रहा था ...

तब डोगा बस में लगे स्पीड बम से 40 जिंदिगियों को बचाने की ज़बरदस्त जद्दोजहद कर रहा था।

जब नागराज और ध्रुव परग्रहीयों के हमले से राजनगर की तबाही होने से रोक रहे थे....

तब डोगा सिंथेटिक दूध बनाने वाली फैक्ट्री को नेस्तनाबूद कर रहा था। (कायर, हाथ और हथियार)

जब नागराज और ध्रुव विषाला की प्रलय से दुनिया को बचा रहे थे...

तब डोगा एग्जाम का पेपर लीक करने वाले शोला गैंग को सबक सिखा रहा था। (मारा गया डोगा, मरेंगे डोगा के दुश्मन)

जब नागराज और ध्रुव कल्कि अवतार और मसीहा को दुनिया में विनाश फैलाने से रोक रहे थे...

तब डोगा भिखारियों को मौत के घाट उतारने वाले हत्यारे के लिए मृत्युदाता बना हुआ था और दलित नेता का अपमान करने के इल्जाम से खुद को बचाने की कोशिश कर रहा था। (डोगा को गाड़ो)

जब नागराज और ध्रुव देवताओं की मदद कर रहे थे जिससे दुनिया में हमेशा के लिए कलियुग व्याप्त न हो...

तब डोगा करवाचौथ सुहागनों पर मंडराता खून का खतरा खत्म कर रहा था।


इसके अलावा भी...

कभी डोगा नवजात बच्ची को कार के टायर से कुचलने वाले गोलू को चार किलोमीटर आगे जाकर सज़ा दे रहा था।

तो कभी डोगा रक्तदान करके हिन्दू मुस्लिम फसाद को खत्म करने की कोशिश में लगा था। (डोगा हिन्दू है सीरीज़)

कभी डोगा बूढ़े लोगों पर खतरा बने युवा को खत्म कर रहा था। (वृद्ध वॉरियर सीरीज़)

और कभी डोगा करोड़ो की संपत्ति के मालिक 18 वर्षीय कुमार सक्षम की अंडरवर्ल्ड से हिफाज़त कर रहा था। 

अब आपको पता चल ही गया होगा कि डोगा क्यों है रियल हीरो क्योंकि "*डोगा है ही ऐसी चीज़*"।

एक बहस जिसका ना कोई आधार ना कोई अन्त....

 एक बहस जिसका ना कोई आधार ना कोई अन्त....


ध्रुव चंडिका को क्यों नहीं पहचान पाता?...

सभी अपने अपने तर्क देते हैं. विपक्ष वाले कहते हैं ध्रव इतनी सी बात नहीं जान सकता.. बस आंखों को कवर करने से वो चेहरा नहीं पहचान पाता, आवाज नहीं पहचान पाता और उसके दिमाग पर सवालिया निशान लगाते हैं....पक्ष वाले कहते हैं चंडिका आवाज बदल लेती होगी, चेहरे में कुछ बदलाव कर लेती होगी, अपनी गंध छुपाने के लिये कोई यंत्र प्रयोग करती होगी इत्यादि...

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मैं कहता हूं ये सवाल है ही क्यों?

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भले ही‌ श्वेता डरपोक और चंडिका बहादुर, भले ही चंडिका कोई यंत्र प्रयोग करती हो जो उसकी गंध, चेहरा, आवाज सब बदल दे... इन सब के बावजूद क्या अगर ध्रुव ठान ले कि उसे चंडिका  का राज पता लगाना है तो क्या वो पता नहीं लगा सकता?.... जिस स्तर का ध्रुव का दिमाग स्थापित गया है उसके लिये ये बांये हाथ का काम है.... आखिर पहले भी उसने हर बार दिमाग का इस्तेमाल करते हुये ही जीत हासिल की‌ है. कई बार परदे के पीछे छुपे विलेन्स का राज फाश किया है... फिर श्वेता/चंडिका के मामले में उसके दिमाग पर सवालिया निशान क्यों लगाने लगते हैं?

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असल बात ये है कि ध्रुव आज तक ये बात इसलिये नहीं जान पाया क्योंकि लेखक ने कभी चाहा नहीं कि वो यह बात जाने..  ध्रुव एक काल्पनिक किरदार है तो उसकी ताकत और कमजोरी सब लेखक की कलम पर निर्भर है. ध्रुव वही सोचेगा वही करेगा जो लेखक के अनुसार उसकी कहानी को आगे बङायेगा और ध्रुव और चंडिका की कहानियों का एक चटपटापन यह भी‌ है कि ध्रुव चंडिका की असलियत नहीं जानता इसलिये उसके साथ मिलकर बिना किसी टेंशन के दुश्मनों की वाट लगा सकगा हैं अगर वो जान जाये कि ये उसकी बहन श्वेता है तो शायद फिर चंडिका का रोल इतना बहादुरी वाला नहीं हो पायेगा क्योंकी ध्रुव उसे ये सब नहीं करने देगा. यह अनभिग्यता ही दोनों के एक साथ काम करने में सहायक है. जिस दिन अ‌नुपम सर ने सोचा कि एक कहनी लिखें जिसमें ध्रुव को ये राज पता चल जाये तो वह ऐसे १०० तरीके दिखा देंगे कि ये राज खुल जाये.

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ये सवाल दो ही टाईप के लोग पूछते होंगेंं...

१) जो मासूम हैं और सच में इस बात को सोचकर हलकान होते होंगे कि आखिर ये पहचान क्यों नहीं रहा.

२) जिनका फेवरिट किरदार कोई और है और वो ध्रुव को कम बताने के लिये उसके दिमाग पर उंगली उठाते होंगे.

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दोनों टाईप वालों से निवेदन है कि कृप्या दिमाग को ज्यादा लोड ना दें... लाईट लें.. कामिक्स पढें..कहानी के मजे लें!

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धन्यवाद

Friday, 28 August 2020

गरीबी मिटाने का फॉर्मूला:-पर्दीप बरनवाल की कलम से हास्य लेख (आधारित राज कॉमिक्स )

सावन और रक्षा बंधन के उपलक्ष्य पर यह छोटी सी पेशकश बिल्कुल एडवांस में🤕🤕

गरीबी मिटाने का फॉर्मूला:

जैसा कि आप सब जानते हैं, तिरंगा अभी निहायती आखिरी दर्ज़े की गरीबी से गुज़र रहा है। उस मच्छरदानी वाले ने भी उसे लूट लिया। वो तो डोगा की दया थी कि उसे बिरयानी खाने को मिल गई। वरना पता नहीं  का क्या होता। बहूहूहु।

तिरंगा अपनी हालत पर रो रहा है।

तिरंगा: लानत है मेरे ऊपर। दुनिया का सबसे बड़ा डिटेक्टिव बन के घंटा कुछ नहीं हो रहा। खाने को पैसे नहीं। लोग समझते हैं मैं सख्त लौंडा हूँ इसलिए कोई गर्लफ्रैंड नहीं है। परंतु असलियत तो ये है कि भाई डेट पर ले जाने को भी पैसे नहीं हैं। पर ये बात दुनिया वालों को नहीं बता सकता। एक तो सुपरहीरो का टैग लग गया। लोग समझते ही नहीं हैं कि हमारे ऊपर भी गरीबी आ सकती है। जहाँ जाता हूँ और भी दाम बढ़ा कर बोलते हैं। बहूहूहू। क्या करूँ मैं, क्या करूँ? 

काफी दिमाग दौड़ाने के बाद।

तिरंगा: अरे हाँ। ये करना सही रहेगा। हीहीहीही। अब तुमलोगों का क्या होगा कालिया? हीहीही हाहाहाहा हूहूहूहू।

क्या सोचा था तिरंगा ने ऐसा? उसकी गरीबी कैसे मिटेगी? क्या वह दोबारा बिरयानी खा पायेगा? वो चिकन तंदूरी खायेगा या दाल चावल भी नसीब नहीं होगा?

Scene 1: रक्षाबंधन का दिन, राजनगर

श्वेता सुबह सुबह ताज़ी मिठाई ख़रीदने निकली। राजनगर की प्रसिद्ध बंगाली मिठाई की दुकान, दास स्वीट्स में।

श्वेता: भैया वो कलाकंद देना 10 पीस और 20 काजू कतली और मेरे फेवरेट रसगुल्ले 20 पीस। हीहीही।

पीछे से आवाज़ आती है,”अरे श्वेता! इतनी मिठाई ध्रुव के लिए?”

श्वेता: अरे नहीं रे उसको तो 1 कलाकंद देकर साइड कर देना है बाकी तो मैं खाऊँगी। हीहीहीही। (पीछे मुड़ते हुए) अरे तिरंगा तुम यहाँ? तुम यहाँ कैसे? अच्छा है रक्षाबंधन के दिन आये अब तुमको भी राखी बांध दूंगी। मोहल्ले के चोट्टे लोगों के लिए कुछ एक्स्ट्रा राखियाँ खरीद रखी थी। तुमको भी बांध दूंगी। हीहीहीही।

तिरंगा: (मन में: गुर्रर। सोचा था कभी सेटिंग करूँगा ये तो मुझे भाई बनाने पर तूल गयी। मैंने भी कच्ची गोलियाँ नहीं खेली हैं।) अरे राखी पहनाओ तुम उस नीली पीली ड्रेस वाले को। गुर्रर। मैं यहाँ किसी और काम से आया हूँ।

श्वेता: अच्छा तो जाओ अपना काम करो मैं चलती हूँ। बाय।

तिरंगा: गुर्रर। ये तो बिल्कुल भाव नहीं दे रही। अभी बताता हूँ इस नकचढ़ी को। (चिल्लाते हुए) अरे सुनो तुमसे ही काम था।

श्वेता: अरे तो घर आ जाना बाद में। अभी बिजी हूँ। बहुत काम है मुझे। चलो फूटो रंग बिरंगे। 

तिरंगा: मुझे रंग बिरंगा बोला। मैं छोडूंगा नहीं।

तिरंगा दौड़ते हुए श्वेता के पास पहुँच गया।

श्वेता: अच्छा तो अब तुम लड़कियाँ छेड़ने लगे हो। सुपरहीरो गिरी नहीं चली तो इस काम पर उतर आए। रुको भैया को कॉल लगाती हूँ।

तिरंगा: हाँ हाँ। लगाओ ध्रुव को फ़ोन मैं भी थोड़ा बात करना चाहता हूँ। चंडिका के बारे में।

श्वेता तुरंत फ़ोन काट देती है।

श्वेता: हैं! क्या बोला तुमने?

तिरंगा: बेटा सबसे बड़ा डिटेक्टिव ऐसे ही नहीं हूँ मैं। हीहीहीही। मुझे तो उस सर्कस के बंदर नक्षत्र के बारे में भी पता है जिससे तुम आजकल कुछ ज्यादा ही मिलती जुलती हो वो भी छुप छुपकर।

श्वेता मन में: हे भगवान ये कहाँ फँस गई मैं? इस चमगादड़ को तो सब पता है। अब क्या करूँ? बहुत तीसमारखाँ समझती थी खुद को। अब भुगत।

श्वेता: खीखीखीखी। अरे तिरंगा भैया…..

तिरंगा: भैया नहीं बोलने का।

श्वेता: ऊप्स। सॉरी। आई मीन तिरंगा। हीहीहीही। तुम तो लाइक भैया के इतने अच्छे दोस्त हो। क्यों उसकी छोटी बहन को परेशान कर रहे हो? हम भी तो कितने अच्छे दोस्त हैं। हीहीहीही।

तिरंगा: अरे चुप न तो तू मेरी दोस्त है ना तेरा वो भाई। उसने ही तो सारी फेम छीन ली मुझसे। बहूहूहू। क्या दर्द बताऊं तेरे भाई ने कितना दर्द दिया है। कोहराम में उसने कोहराम मचाया। जलजला में तो मुझे पूछा भी नहीं। एक नेगेटिव्स आई मेरी थोड़ी ठीक ठाक तो अचानक से बाल चरित ही शुरू हो गया। अरे भाई हम भी तो कभी पैदा लिए रहे। हमरे पर काहे नहीं बनता कोई चरित। हमरा तो चरित्र ही दागदार बना दिया। बहूहूहू। 😭😭😭😭😭😭

श्वेता: अरे अरे तुम तो सेंटिया गए। चुप हो जाओ लो 1 रसगुल्ला तुम खा लो।

तिरंगा तो जन्मों का भूखा था ही। तुरंत उसने वो रसगुल्ले वाला पैकेट ही छीन लिया और श्वेता के देखते ही देखते सारे रसगुल्ले ठूँस गया और भयानक डकार भी मारी।

तिरंगा: हाँ। अब थोड़ा ठीक लग रहा है। (दूसरी डकार)

श्वेता: अबे रंग बिरंगे तूने तो मेरे सारे रसगुल्ले खा लिए। गुर्रर। मैं तुझे छोडूंगी नहीं। 

श्वेता तिरंगा को पीटने के लिए हाथ उठाती ही है कि तिरंगा बोल उठता है।

तिरंगा: रुक जा बेटा। भूल क्यों रही तेरे सारे राज़ मुझे पता हैं। हीहीहीही।

श्वेता: खीखीखीखी। अरे मैं तो बस यूँही तुमको और मिठाई देने के लिए हाथ निकाल रही थी। लो और मिठाई खा लो। बहूहूहू। सारी काजू कतली ठूँस लो। बहूहूहू।😭😭

तिरंगा: (श्वेता के हाथ से सारी मिठाई छीनते हुए) हाँ वो तो मैं खाऊंगा ही। अब सुनो काम की बात। आज रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने पर तुझे उस पीली चड्डी वाले से बहुत पैसे मिलने वाले हैं। शाम में आकर बाबू भैया की चाय की दुकान के पास आके मुझे दे जाइयो। 100 रुपये तू रख लेना आखिर रक्षाबन्धन है। हीहीहीही। और सुन बाबू भैया की चाय भी तेरे पैसे से पियूँगा। हीहीहीही। वरना तो तुझे पता है अगर मैंने ध्रुव को चंडिका वाली बात बता दी तो तेरी बहुत पिटाई होगी। और अगर नक्षत्र वाली बात बता दी तो तेरा घर से निकलना बंद और वो बंदर पिटेगा अलग से। हीहीहीही।

श्वेता: (अंदर ही अंदर आँसू बहाते हुए। ये किस घड़ी में मिठाई लेने निकली थी बहूहूहू। पैसे भी गए और मिठाई भी। ऊपर से ये रंग बिरंगा सारे राज़ जान गया है।) बहूहूहू। ठीक है तिरंगा शाम को तुम आके पैसे ले जाना। बट प्लीज 500 रुपये तो दे दो यार। मेरे भी बहुत खर्चे हैं। और वो नक्षत्र भी पैसे नहीं खर्च करता। बोलता है सर्कस का धंधा मंदा चल रहा है। बहूहूहू। 

तिरंगा: जा सिमरन जा जी ले अपनी ज़िंदगी। दिए तुझे 500 रुपये। पर मेरे से होशियारी नहीं। बाकी सारे पैसे मेरे। हीहीहीही। और बाई दी वे, रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं। हीहीहीही।

श्वेता: छोडूंगी नहीं तुम्हें।

तिरंगा वहाँ से निकल गया। तिरंगा उछलते कूदते जा रहा था।

तिरंगा: आज मैं छक कर बिरयानी खाऊंगा। हीहीहीही। ओह नहीं आज तो सावन का लास्ट डे है। माफ करना भोले शंकर। हीहीहीही। बिरयानी कल से। पर पनीर तो आज खा ही सकता हूँ। हीहीहीही।

तो देखा दोस्तों तिरंगा अपनी गरीबी मिटाने के लिए पहली चाल चल चुका है। और उसमें वो कामयाब भी हो गया है। अब आगे क्या चालें चलेगा तिरंगा। ये कैसा रूप धारण किया है उसने? कौन होगा उसका अगला शिकार? क्या उसकी गरीबी मिटेगी? क्या ब्रह्माण्ड रक्षक कुछ कर पाएंगे? जानने के लिए इंतेज़ार कीजिये अगले एपिसोड का। हीहीहीही।

Thursday, 30 July 2020

अमित कुमार की कलम से हास्य लेख (आधारित राज कॉमिक्स)

ऐसे ही कुछ भी

नागराज सुबह ही भागता हुआ ध्रुव के घर पहुँचा और ध्रुव से कहता है -जल्दी चलो महामानव ने महानगर पर हमला कर दिया है अब तुम ही कुछ कर सकते हो
ध्रुव-ठीक है चलो।
(मन ही मन सोचता है अभी तो काढा भी नहीं पिया है और काढा भी खत्म हो गया,लगता है आज इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी) 
घर से थोडी़ दूर चलके हकीमजी का घर के पास ध्रुव जमीन पर गिर पडा।
नागराज-क्या हुआ ध्रुव
ध्रुव-पता नहीं क्यों पेट में बहुत दर्द हो रहा है पर तुम मेरी चिंता मत करो महानगर वालों को हमारी जरूरत है जल्दी चलो
नागराज-पर तुम्हारी तबीयत भी ठीक नहीं लग रही, एेसा करते है ये पास ही हकीम जी रहते है,इनको दिखा लेते है।
हकीम जी के घर
नागराज-देखिये हकीम जी ध्रुव को क्या हुआ

हकीम जी ध्रुव को देखते ही सब समझ जाते है कि शायद इसका काढा खत्म हो गया है कल ये ले जाना भूल गया था
हकीमजी-इसे बराबर के कमरे में लिटा दो,देखता हूँ।

कमरे के अंदर
ध्रुव फुसफुसाते हुये-हकीमजी काढा खत्म हो गया
हकीमजी धीरे से-मै भी समझ गया था काढा तैयार है जल्दी से पी लो
ध्रुव ने जल्दी से काढा पिया और हकीमजी के पैर छुये-आज आपने मेरी इज्जत बचा ली
हकीमजी-बस कर पगले अब रूलायेगा क्या?

दोनो कमरे से बाहर आते है

नागराज-इतनी जल्दी ठीक हो गये ध्रुव,क्या जादू कर दिया हकीमजी ने?

हकीमजी मक्कारी वाली हँसी हँसते हुये-हीहीही,कुछ नहीं पेट में गैस इकट्ठी हो गयी थी,दवा दे दी है अब कुछ ही देर में हवा घूम जाएगी पर थोड़ा दूर रहना ध्रुव से।
ध्रुव भी खीखीखी करके हँसने लगता है

नागराज गुस्से में- ओ काढा़ पुरूष ज्यादा खीखीखी मत कर सर्प वाले कान है मेरे,सब फुसफुसाहट सुन ली मैनें,अब जल्दी चल महानगर भी पहुँचना है।

ये कह कर नागराज ने ध्रुव को खींचा, ध्रुव का बैलेंस बिगड़ा और ध्रुव गिर पड़ा,हड़बड़ा कर ध्रुव बेड पर से गिर पड़ा वो पसीना पसीना हो चुका था उसे अहसास हुआ वो सपना देख रहा था,उसने भगवान का शुक्रिया किया चलो शुक्र है कि चलो किसी को इस राज के बारे में किसी को पता नहीं चला।

सजन चौहान की कलम से

दोस्तों आज मैंने एक बात नोटिस करी जब मेरे paytm में पैसे ख़त्म हो गए थे और सिर्फ मेरे पास सिर्फ case पड़े थे तो में कॉमिक्स लेने आपने पास के ही बुक शॉप पर गया था, उस बुक शॉप वाले ने मेरे सामने कम से कम 150 कॉमिक्स रख दी और मैं कॉमिक्स सिलेक्ट करने लगा तभी बहा पर एक व्यक्ति आता है पेन और डायरी खरीदने और उसकी नजर मेरे सामने रखी कॉमिक्स पर जाती है और बह व्यक्ति मुझसे पूछता हे--

बह व्यक्ति:-  क्या राज कॉमिक्स अभी भी आरही है ?
मैं:- यह तो कई सालों से आरही है।
बह व्यक्ति:- मैं समझा की राज कॉमिक्स कई साल पहले ही बंद हो गई।
मैं:- जी बह मनोज और तुलसी की बंद हुई थी। और अब तुलसी भी फिर से रीप्रिंट हो रही है।
बह व्यक्ति:- क्या लोग इसे अभी भी पड़ते है।
मैं:- कॉमिक्स पड़ने वालो की कमी थोड़ी है । मैंने उन्हें हेल्लो बुक माइन व राज कॉमिक्स ग्रुप के बारे मैं बताया तो बह व्यक्ति तुरंत ग्रुप में ऐड हो गया और मुझसे बोला की अब मैं भी कुछ कॉमिक्स लेकर जाऊंगा और मेरे साथ कॉमिक्स चुनने लगा और 5 कॉमिक्स खरीद कर ले गया पर मै कॉमिक्स चुनता रहा तभी बहा पर दूसरा व्यक्ति आता है और उस व्यक्ति की भी नजर कॉमिक्स पर पड़ती है और बो मुझसे बोलता है ये तो हमारे ज़माने की कॉमिक्स है लोग अभी भी बच्चो की तरह इन कॉमिक्स को पढ़ते है मैंने कहा इन्हें सिर्फ बच्चे ही नहीं सभी उम्र के लोग पड़ते है तो बह व्यक्ति मुझसे बहस करते हुए मुझसे कहता है कि ऐसा हो ही नही सकता, तब मैने फिर फेसबुक खोल लिया तब बह व्यक्ति चोंक गया और बोला की कैसे लोग है अभी भी कॉमिक्स पड़ते है मैंने उसपर ध्यान ना देते हुए कॉमिक्स चुनने लग गया तब बह जाने लगा , थोड़ी दूर जाने के बाद बह व्यक्ति बापस आकर बोलता है कि मैं अपने बच्चो के लिए ले लेता हूँ कॉमिक्स बो भी तो जानेगे हमारे ज़माने की कॉमिक्स के बारे में तब बह 2 कॉमिक्स खरीद कर ले जाता है तब मुझे लगता है कि कॉमिक्स पड़ने बालो की अभी भी कमी नहीं है बस उन्हें पता नहीं है कि कॉमिक्स अभी भी मिलती है उन्हें सिर्फ इतना ही पता की diamond comics ही मिलती है अगर ज्यादातर लोगो को पता चल जाये की राज कॉमिक्स अभी भी मिलती है तो तो भारत में भी कॉमिक्स ज्यादा मात्रा में बिकेगी जिससे भारत की कॉमिक्स इंडस्ट्री भी बहुत तरक्की करेगी बस जरूरत है लोगो को कॉमिक्स के प्रति जागरूक करने की 
और मैं भी 16 कॉमिक्स खरीदने के बाद घर बापस लोट आया ।
और रही बात की लोग कहते है कि नितिन मिश्रा जी की कहानी लंबी होती है तो उन्हें कहानी लंबी इसलिए लगती है क्योंकि कॉमिक्स देरी से आती है अब सर्वनायक ही मान लीजिए ज्यादतर लोग कहते है कि सर्वनायक की कहानी लंबी है तो मैं उन्हें बता दू की हो सकता है कि नितिन मिश्रा जी ने सर्वनायक की कहानी कब की समाप्त कर ली हो और कॉमिक्स देरी के आने की बजह से हमे लगता है कि कहानी लंबी बना दी है । अब मुझे पता है कि आप भी कुछ राय जरूर देना चाहोगे कमेंट में तो मेरे पोस्ट के कमेंट में आपका स्वागत है।
               धन्यवाद

# राज कॉमिक्स है मेरा जूनून
# जूनून जिन्दा है

Tuesday, 28 July 2020

दीपक वर्मा की कलम से

मेरा कॉमिक्स सफर: कुछ चुलबुली यादें

आज बहुत दिन के बाद कुछ लिख रहा हूँ। 

लगभग 3-4 साल का रहा होऊंगा जब मैंने कॉमिक्स पढ़ना शुरू किया । मैं उन कुछ खुशनसीब लोगों में से हूँ जिन्होंने कॉमिक्स से ही पढ़ना सीखा । 

पापा एक कॉमिक्स लेकर आये थे "चाचा चौधरी और राका" । उसके चित्र देखकर मैं बड़ा आकर्षित हुआ था। फिर उसी से जैसे छोटे बच्चों को एक एक अक्षर मिलवा कर एक शब्द पढ़ना सिखाया जाता है मैंने वैसे कॉमिक्स पढ़नी सीखी और फिर चाव चाव में कई सारी पढ़ डालीं । इससे हुआ ये कि मुझे अपनी स्कूल की हिंदी की किताबों में से (उस समय बाल भारती चला करती थी) बिना एक-एक अक्षर मिलाये पूरा पूरा शब्द ही पढ़ने की "अद्भुत मायावी" शक्ति प्राप्त हुई । 

फिर तो पढ़ने का ऐसा शौक लगा कि क्या बताऊँ।
ऐसी उत्कंठा होती कि बस अगली कक्षा में आते ही नए पाठ्यक्रम की बाल भारती पढ़ने को मिल जाये । जैसे ही हत्थे चढ़ती पूरी पढ़ डालता ।

जानता हूँ कि पोस्ट थोड़ी लम्बी हो रही है पर आप धैर्य बनाए रखें । 😁

थोड़ा बड़ा हुआ तो पता लगा कि कॉमिक्स किराए पर भी मिलती हैं । बस मम्मी से जिद करके कॉमिक्स किराए पर ले आता और पढ़ता । एक बार यही पापा को पता लगा तो उन्होंने खूब डांटा पर ये सिलसिला रुका नहीं ।

धीरे धीरे डायमंड कॉमिक्स से राज कॉमिक्स पर आया । 

उस समय एक विज्ञापन देखा था नागराज की किसी कॉमिक्स का । बस उसे पढ़ने की इच्छा बलवती हो उठी ।
फिर क्या था मम्मी को मक्खन लगाने का सिलसिला शुरू हुआ, मक्खन काम करने लगा था लेकिन वह मक्खन कब चूने में परिवर्तित हो गया, पता भी ना चला। 
शीघ्र ही चाचा जी के कंप्यूटर से भी तेज दिमाग की तरह यह चूना लगाने की प्रक्रिया तेज़ होती गयी और अंततः सफलता प्राप्त हुई । 

पहली कॉमिक्स पढ़ी "नागराज" । 
बहुत पसंद आई !
फिर तो बस अधिकतर नागराज की ही कॉमिक्सें पढ़ने लग गया । 

फिर किसी दिन दुकान पर सुपर कमांडो ध्रुव की कॉमिक्सें दिखीं ।
एक ले आया । 
कॉमिक्स थी "रोमन हत्यारा" । 
फिर मैंने नागराज और ध्रुव, दोनों ही चरित्रों को पढ़ना शुरू कर दिया।

आशा है कि आप बोर हो रहे होंगे और मुँह फाड़ के उबासी ले रहे होंगे । 😄

एक वाक़या जरूर बताना चाहूंगा । 
एक बार ध्रुव की एक कॉमिक्स का विज्ञापन देखा । 
कॉमिक्स थी "आत्मा के चोर" । 
मैंने सोचा कि ध्रुव की आत्मा ही अगर अलग हो गयी तो वो तो मर जायेगा । 
क्या हुआ होगा उसे? आदि आदि!

बस फिर तो उस कॉमिक्स को पागलों की तरह ढूंढना शुरू किया । कॉमिक्स की दुकान वाले भैया भी उकता गए थे कि ये तो रोज़ ही पूछने आ जाता है (जैसे आप लोग मेरी पोस्ट पढ़ पढ़ के उकता गए हो... तो नोंच लो बाल ! 😆 )

इतनी ज्यादा बार दुकान पर पता करने गया कि कई बार तो कॉमिक्स की दुकान के बगल वाली दुकान से दूध ब्रेड भी लेने जाता तो कॉमिक्स वाले भैया दूर से ही कहते "नहीं आयी अभी" !

खैर! किस्से तो बहुत हैं जैसे किताबों के बीच कॉमिक्स छुपाना, पिटने से बचने के लिए दोस्त के बैग में रखना, इत्यादि । फिर किसी दिन बताऊंगा, वरना आप लोग गालियां दोगे (दे दो, क्या उखाड़ लोगे! 😆 )

तो इसी के साथ इस पोस्ट का समापन करता हूँ। 
भई! अपने अपने काम-धंधे देखो, मेरा तो ये रोज़ का नाटक है ! 😂