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Tuesday, 28 July 2020

दीपक वर्मा की कलम से

मेरा कॉमिक्स सफर: कुछ चुलबुली यादें

आज बहुत दिन के बाद कुछ लिख रहा हूँ। 

लगभग 3-4 साल का रहा होऊंगा जब मैंने कॉमिक्स पढ़ना शुरू किया । मैं उन कुछ खुशनसीब लोगों में से हूँ जिन्होंने कॉमिक्स से ही पढ़ना सीखा । 

पापा एक कॉमिक्स लेकर आये थे "चाचा चौधरी और राका" । उसके चित्र देखकर मैं बड़ा आकर्षित हुआ था। फिर उसी से जैसे छोटे बच्चों को एक एक अक्षर मिलवा कर एक शब्द पढ़ना सिखाया जाता है मैंने वैसे कॉमिक्स पढ़नी सीखी और फिर चाव चाव में कई सारी पढ़ डालीं । इससे हुआ ये कि मुझे अपनी स्कूल की हिंदी की किताबों में से (उस समय बाल भारती चला करती थी) बिना एक-एक अक्षर मिलाये पूरा पूरा शब्द ही पढ़ने की "अद्भुत मायावी" शक्ति प्राप्त हुई । 

फिर तो पढ़ने का ऐसा शौक लगा कि क्या बताऊँ।
ऐसी उत्कंठा होती कि बस अगली कक्षा में आते ही नए पाठ्यक्रम की बाल भारती पढ़ने को मिल जाये । जैसे ही हत्थे चढ़ती पूरी पढ़ डालता ।

जानता हूँ कि पोस्ट थोड़ी लम्बी हो रही है पर आप धैर्य बनाए रखें । 😁

थोड़ा बड़ा हुआ तो पता लगा कि कॉमिक्स किराए पर भी मिलती हैं । बस मम्मी से जिद करके कॉमिक्स किराए पर ले आता और पढ़ता । एक बार यही पापा को पता लगा तो उन्होंने खूब डांटा पर ये सिलसिला रुका नहीं ।

धीरे धीरे डायमंड कॉमिक्स से राज कॉमिक्स पर आया । 

उस समय एक विज्ञापन देखा था नागराज की किसी कॉमिक्स का । बस उसे पढ़ने की इच्छा बलवती हो उठी ।
फिर क्या था मम्मी को मक्खन लगाने का सिलसिला शुरू हुआ, मक्खन काम करने लगा था लेकिन वह मक्खन कब चूने में परिवर्तित हो गया, पता भी ना चला। 
शीघ्र ही चाचा जी के कंप्यूटर से भी तेज दिमाग की तरह यह चूना लगाने की प्रक्रिया तेज़ होती गयी और अंततः सफलता प्राप्त हुई । 

पहली कॉमिक्स पढ़ी "नागराज" । 
बहुत पसंद आई !
फिर तो बस अधिकतर नागराज की ही कॉमिक्सें पढ़ने लग गया । 

फिर किसी दिन दुकान पर सुपर कमांडो ध्रुव की कॉमिक्सें दिखीं ।
एक ले आया । 
कॉमिक्स थी "रोमन हत्यारा" । 
फिर मैंने नागराज और ध्रुव, दोनों ही चरित्रों को पढ़ना शुरू कर दिया।

आशा है कि आप बोर हो रहे होंगे और मुँह फाड़ के उबासी ले रहे होंगे । 😄

एक वाक़या जरूर बताना चाहूंगा । 
एक बार ध्रुव की एक कॉमिक्स का विज्ञापन देखा । 
कॉमिक्स थी "आत्मा के चोर" । 
मैंने सोचा कि ध्रुव की आत्मा ही अगर अलग हो गयी तो वो तो मर जायेगा । 
क्या हुआ होगा उसे? आदि आदि!

बस फिर तो उस कॉमिक्स को पागलों की तरह ढूंढना शुरू किया । कॉमिक्स की दुकान वाले भैया भी उकता गए थे कि ये तो रोज़ ही पूछने आ जाता है (जैसे आप लोग मेरी पोस्ट पढ़ पढ़ के उकता गए हो... तो नोंच लो बाल ! 😆 )

इतनी ज्यादा बार दुकान पर पता करने गया कि कई बार तो कॉमिक्स की दुकान के बगल वाली दुकान से दूध ब्रेड भी लेने जाता तो कॉमिक्स वाले भैया दूर से ही कहते "नहीं आयी अभी" !

खैर! किस्से तो बहुत हैं जैसे किताबों के बीच कॉमिक्स छुपाना, पिटने से बचने के लिए दोस्त के बैग में रखना, इत्यादि । फिर किसी दिन बताऊंगा, वरना आप लोग गालियां दोगे (दे दो, क्या उखाड़ लोगे! 😆 )

तो इसी के साथ इस पोस्ट का समापन करता हूँ। 
भई! अपने अपने काम-धंधे देखो, मेरा तो ये रोज़ का नाटक है ! 😂

Friday, 10 July 2020

अभिषेक मिश्रा की कलम से

वैसे तो ये पोस्ट हेलो बुक माइन के लिए लिखी थी लेकिन सोचा थोड़ा पब्लिसिटी बटोर ले और उनका आईडिया भी पसंद आया तो इस ग्रुप में भी चेप रहा.पसंद आये तो लाइक करना नहीं तो बांकेलाल कॉमिक्स वाले राक्षस की तरह छैया छैया नाच करके डरा दूंगा.चलते है भेड़िया देवता के आशीर्वाद के साथ🐶
मेरे बहुत से मित्र जो खुद कॉमिक्स प्रेमी है वो आये दिन पुछा करते है मेरे कॉमिक्स प्रेम के बारे में.मेरे कलेक्शन के बारे में.कई बार मुझे इग्नोर करना पड़ता है तो कई बार छोटे छोटे पार्ट में कहानी सुनकर शांत कर देता हु.आज यहाँ सबके कॉमिक्स से जुड़े निजी अनुभव देखे तो सोचा अपना पिटारा भी आज ही खोल लिया जाये.बहती गंगा में हाथ धोना ज्यादा सही रहता है.😁😁
बात तब की है ज़ब मैं "4 साल का परमाणु" बन चूका था और "बुद्धिपलट" की तरह बचपन से ही "शैतान" था.पूरी तरह तो नहीं लेकिन थोड़ा थोड़ा "काला अक्षर भैंस बराबर" पढ़ना और चित्र देख कर समझना आता था. मैं अपने बड़े भैया, दीदी, पापा, मम्मी, दादी, बुआ, चाचा और पिंकी के साथ रहता था.उस समय लाइट बहुत आती जाती थी और ज्यादातर हम अपनी खटिया या पलंग बाहर बिछा कर सोते थे.शाम का समय था वो, ज़ब पहली बार मैंने भैया को कोई "सुपरहीरो" ड्रा करते देखा."सुपर कमांडो ध्रुव" था जम्प करने की पोज़ करते हुए जो भाई बना रहे थे.नीली पीली ड्रेस में वो मुझे बहुत अच्छा लगा.फिर समझ आया कि कॉमिक्स नाम की कोई चीज आती है जिसमे ऐसे एक्शन करते "सुपरहीरो" होते है जो लोगो को दुष्ट लोगो से बचाते है.जानकारी के लिए बता दू के मेरे भैया कॉमिक्स के बहुत बड़े फैन रहे है और किराये पे कॉमिक्स लाने और पढ़ने की आदत उन्ही की वजह से लगी थी.जो शुरुआत ध्रुव से हुई थी वो भैया के लगातार कॉमिक्स लाने से और बढ़ती गयी.मेरे घर में लगभग सारे कॉमिक्स प्रेमी रहे है. दादी धार्मिक चित्रकथा, चाचा एक्शन कॉमिक्स, मम्मी राजा रानी वाली, दीदी और बुआ डायमंड वाली, पापा हॉरर और भैया सुपरहीरो की कॉमिक्स के दीवाने थे.इन सबके चक्कर में मुझे भी कॉमिक्स का ऐसा नशा चढ़ा कि जो आज तक ख़तम नहीं हुआ.आप यकीन नहीं करोगे लेकिन मेरे क्राइम स्कूल की हर कॉपी, भाई की कॉपी, दीदी की कॉपी, पापा के ऑफिस पेपर्स, मम्मी की मैगज़ीन और यहाँ तक की घर के अखबारों तक में मैं कॉमिक्स के नाम, विलन के नाम लिखा करता था.आर्ट बनाया करता था.क्या ऐड हो या क्या कॉमिक्स के अंदर का आर्ट, मेरी ड्राइंग क्लास की कम और इन सुपरविलेन और सुपरहीरो से भारी रहती थी.पागलपन का नशा यही नहीं ख़त्म हुआ.आगे चल के मैं कॉमिक्स के सेट, कौन सी कॉमिक्स में किस आर्टिस्ट, राइटर, एडिटर, कलरिस्ट का क्या योगदान है, कॉमिक्स सीरियल नंबर, कॉमिक्स ईयर और पता नहीं क्या क्या लिख के लम्बी चौड़ी "मोस्ट वांटेड" लिस्ट बनाने लगा.घर की ऐसी कोई कॉपी नहीं बची जहा मेरी कॉमिक्स से रिलेटेड आर्ट या कोई जानकारी ना लिखी हो.बहुत बार तो रुई की तरह धुनाई भी होती थी.पता चला पापा को बर्थ सर्टिफिकेट बना के देने है और पीछे "मा कसम", "योद्धा की चीख" लिखी हुई हो.पता चला भाई को होमवर्क जमा करना हो और कॉपी में आगे नगरस्सी पे झूलता "नागराज" बना हो.जैसे जैसे बड़ा होता गया मेरा जूनून और पागलपन जो कॉमिक्स को लेके था वो बढ़ता गया.मैंने देखा कि किराये पे कॉमिक्स लाने में समस्या ये है कि उसको वापस करना पड़ता है जो मुझे बिलकुल पसंद नहीं था तो मुझे कॉमिक्स कलेक्शन का पागलपन चढ़ गया.एक पागलपन ये भी था के मै अपनी खरीदी कॉमिक्स किसी को जल्दी हाथ नहीं लगाने देता था.इसके पीछे मंशा थी कि मेरी कॉमिक्स नयी जैसी बनी रहे, हाँ दुसरो की कॉमिक्स चुराने में, या मांगने में मुझे शर्म नहीं आती थी.होता ये था के इतनी मेहनत से खरीदी, या जुगाड़ करके लायी गयी कॉमिक्स ज़ब लोग मोड़ देते थे तो मुझे देख के हल्क वाला दौरा पड़ जाता था.फिर चाहे सामने मेरे से 4 गुना मेरा मामा का लड़का हो या क्लास का दादा, मैं डोगा की तरह दौड़ा कर मारता था.लोग कॉमिक्स छुपा के पढ़ते है, मैंने कॉमिक्स के लिए चोरी, डकैती, बड़ी बड़ी लड़ाई, सब कुछ किया है.सबसे मज़ा तब आता था ज़ब पापा क्लास में अच्छे नंबर लाने की "अनोखी शर्त" पर कॉमिक्स लाया करते थे.सच में उसी लालच के चक्कर में 70 परसेंट के नीचे कभी नंबर नहीं आये.फिर गर्मी की छुट्टिया हो तो मज़े से तखत पे बैठ कर या उल्टा लेट कर हलुवा खाते हुए कॉमिक्स पढ़ो, कितना मज़ा आता था बयान नहीं कर सकता.एक बुरी चीज इसमें ये भी है कि ये कॉमिक्स वाला प्यार इतना बढ़ गया था कि कॉमिक्स खरीदने के लिए घर से चोरी तक करनी पड़ी.उस बात का आज तक अफ़सोस है.हाँ पागलपन इतना किया है कि 16 की एक कॉमिक्स लेने के लिए 2 दिन 4km पैदल स्कूल जाता था.भूखे पेट रहता था और घर में किसी को पता भी नहीं चलने दिया.बड़े होने पे सबसे बड़ी दिक्कत यही है के दिमाग़ ज्यादा खुरापाती हो कर "मास्टरमाइंड" जाता है.शायद इसी का नतीजा था कि कॉमिक्स लेने के लिए डेली नयी नयी खुरपेंची किया करता था.ऐसे ही एक छोटा सा "हातिमताई" वाला किस्सा भी बताना चाहूंगा.एग्जाम शुरू होने वाले थे और उनकी फीस 200 जमा करनी थी.2 दिन की "डेडलाइन" थी मेरे पास."मेरे पापा" ने पैसे दिए और दिमाग़ में आया कि लास्ट डे जमा कर दूंगा.उन पैसो की शॉप वाले के पास "मैक्सिमम  सिक्योरिटी" जमा करके कॉमिक्स ले आया किराये पे पढ़ने के लिए.क्लास में फीस मांगी गयी तो अगले दिन का बहाना बना कर टाल दिया.अब मुसीबत ये थी के अगले दिन तक वो सारी कॉमिक्स पढ़ के लौटानी थी और मेरे पास किराये के भी पैसे नहीं थे कॉमिक्स वाले को देने के लिए.तो दिमाग़  ये लगाया के उस रात बिना सोये "मोमबत्ती" की रौशनी में कॉमिक्स चाट डाली और उसकी 2 कॉमिक्स भी दबा ली.अगले दिन कॉमिक्स शॉप पे वापस करने पहुँच गया.वापस 200 मांगे के अब और कॉमिक्स नहीं पढ़नी, आपके पास और नहीं है मेरी वाली.तो वो किराया जो 20 होता था वो काट कर 180 वापस करने लगा.अब क्या करता?मेरे पास तो एक भी पैसा नहीं था.मैंने उससे झूठ बोल दिया के किराया कल आपके बेटे को पहले ही दे दिया था और दो कॉमिक्स भी उसी समय पढ़ के वापस कर दी थी.उसको शक हुआ तो उसने पढ़ी हुई कॉमिक्स का नाम पुछा.मैंने उसी दिन उसकी कॉमिक्स रखने के सीरियल को समझ कर कुछ ऊपर के नाम याद कर लिए थे जो किसमत से वही निकले.उसको लगा मैं सच बोल रहा हु तो उसने पूरे पैसे वापस कर दिए.तब जाके मैंने फीस जमा करि और मेरी जान में जान वापस आयी जैसे बांकेलाल की आती है हर कॉमिक्स में.हालांकि बाद में मुझे बुरा लगा लेकिन तब तो मैं कॉमिक्स के "अमर प्रेम" में था इसलिए खुद को माफ़ कर दिया.😄😄
लोगो का समय के साथ प्यार बदलता जाता है लेकिन मेरे केस में ये बढ़ता गया.एक दो गर्लफ्रेंड भी बनाई जिन्होने कुछ समय बाद मेरे कॉमिक्स प्रेम का सबके सामने मज़ाक बनाया और "मजबूर" होकर उन्होंने हीरे जैसा अपना बॉयफ्रंड खो दिया.कॉलेज के दोस्तों ने जो खुद को स्टाइलिश समझते थे, थोड़ा इंसल्ट भी किया, टीचरों और घर वालो ने जम के कूटा, सबकी हंसी का पात्र भी बना लेकिन ये कॉमिक्स की "प्रेम ऋतू"  का "खेल ख़त्म" नहीं हुआ.वीडियो गेम बने, कम्प्यूटर गेम्स आये, जमाना बढ़ता गया लेकिन अपनी पहली पसंद हमेशा कॉमिक्स रही.आज काफ़ी उम्र हो चुकी है."ये शादी होकर रहेगी" वाली दहलीज पे खड़ा हु लेकिन आज भी दिल बचपन वाला कॉमिक्स प्रेमी है जिसने तय किया है कि शादी भी उसी से करेगा जिसके पास उसके जैसा कॉमिक्स प्रेम वाला दिल होगा.महादेव की कृपा से कल जो भी हो लेकिन "सुपर इंडियन" की तरह एक कसम मैंने भी खायी है कि 80 साल का बुड्ढा भी हो जाऊंगा तब भी कॉमिक्स का नशा ख़त्म नहीं होने दूंगा.
बाकि कहानियाँ बहुत सी है लेकिन ज्यादा लम्बा लिखा तो लोगो के प्रोफेसर कमल कांत की तरह "कोमा" में जाने के आसार है इसलिए आज इतना ही.बाक़ी फिर "काली दुनिया " होने के बाद.....🙏😎

Thursday, 9 July 2020

शक्ति और वंडर वोमेन -राज कॉमिक्स की कॉमेडी कहानी-8

सुबह-सुबह चंदा का शरीर कामने लगा और वो
शक्ति बनकर पहुंच गई बगल वाले गुप्ता जी के घर ।
गुप्ता जी और उनकी पत्नी की लड़ाई चल रही थी ।
शक्ति ने आव देखा ना ताव, दिया घुमा कर गुप्ता जी के
। गुप्ता जी बेहोश हो गए । मिसेज
गुप्ता को गुस्सा आ
गया।
मिसेन गुप्ता - ये क्या किया... अयन... तेरै बाल नोच
लू ?
गुप्ता जी की बेटी - मम्गी ! ये आप उसे बता रही हो या पूछ रही हो... खीच लो इसके बाल ।
मिसेज गुप्ता
और उनकी बेटी शक्ति के बाल खीचकर उसे पीटने लगी।
शक्ति - अरे.. स्को.... पर मे तो आपको बचा रही थी गुप्ता आंटी... आप मुझे ही क्यो मार
रही है ?
गिसेन गुप्ता - अभी मेरे इतने भी बुरे दिन नहीं आये है कि में गुप्ता जी से ही मिट जाऊ... वो
तो में पड़ोसियो को सुनाने के लिए और इनकी आवाज दबाने के लिए चिल्लाती हूँ। ये तो अब
मेरी रोज की थ्रिल बन गई है ।
शक्ति - अच्छा... अच्छा जा रही ह... हेयर क्लिप का क्या करोगी आंटी वो तो लोटा दो !
चंदा के दिन की बोहनी (शुरुआत) ही खराब हुई थी। पर एकदम तभी उसे कही से शक्ति
बनने की फिर पुकार आई। युवती समुन्द्र में डूब रही थी, शक्ति की गति इतनी तेज थी कि वो सगुन्द्र तल के अंदर ड्रिलिंग करती चली गई । जब उपर पहुंची तब तक कॉस्ट गार्स ने उस युवती को बचा लिया था । शक्ति के शरीर पर समुन्द्र के अंदर का गाढ़ा तेल चिपक चुका था।

शक्ति - शाबास... आप लोगो ने बहुत अच्छा काम किया जो इस युवती को बचा लिया ।
कॉस्ट गार्ड केडिट - पर तेरा सत्यानाश जाये काली माई...
शक्ति
पर मैने क्या किया ?
कोस्ट गार्ड केडिट वहा बार्डर के उस तरफ पकिस्तान के समुन्द्र क्षेत्र मे तुम कच्चे तेल की
खोज कर आई हों और उन्हें सब रेडीमेड मिल जायेगा! खुदाई भी नहीं करनी पड़ेगी ।
शक्ति वहा कैसे रुकती पर रास्ते मे ही उसे कहीं और से किसी नारी की पुकार आई... सहमी
हुई शक्ति एक मंदिर में पहुंची जहा एक मंडित जी अपनी पत्नी को बुरी तरह झंट रहे थे।
शक्ति - आंटी... ये क्या ये मंडित जी आपको पीड़ा पहुंचा रहे है ?
पंडिताईन जी - हा... जाउन रहे के मंदिर के चढ़ावे मे से दुई रुपिया लेय रहे... ई देख लेस
आउर डांट दिये रहें तबही तुम आयं गई रही ।
शक्ति - क्या आप चाहती है कि इन्हें सजा मिलें?
पंडिताईन जी - जबसे शॉदी हुई रही तबही से इनको मारने की सोचत रहिन ।
भीड़ जमा हो गई, मंडित जी ने मोंके की नजाकत को संभालते हुम दाँव बदला ।
पंडित जी - अरे... देख्यो... बलविंदर.. हुकुम... चप्पल पहिन के मंदिर में घुस आई रही (चंदा
आज जल्दीबाजी मे चप्पल उतारना भूल गई थी) और कारा-कारा कुछ रिसत है... हमका तो ई
चुडैल लागत है । मारो... मारो... हपक के दई दो ई का.... बाल नोच लो... पंडिताईन तुग का
ताइत हो तुहाऊ दो ईक घुमाय के...
शक्ति का आज दिन ही खराब चल रहा था... और उपर पक गुप्त स्थान पर वंडखूमेन प्रिंसपल
के साथ मिलकर शक्ति को निपटाने का प्लान बना रही थी।
प्रिंसपल
प्लॉन क्या है ?


वंडरखूमेन - देखो ... अपना टकला मत खुलाओ मे बता रही हूँ ... मेरी गुडियो की ब्रिगेड तैयार
है... प्लॉन सिंम्पल हैं ... देखते जाओ।
वंडखूमैन के एक इशारे पर उसकी "गुंडी ब्रिगेड की हजारो सदस्य आपस में लड़ने लगी और
इतनी सारी नारियो की चीख-पुकार सुनकर शक्ति के कई प्रतिस्प उन्हे मैनेज करने के लिंग
शक्ति से अलग हो गये।
प्रिंसपल - इससे क्या होगा ?
वंडखूमन - तुम्हे विलेन बनाया किसने ? ... टकले से हाथ दूर रखो । देखों शक्तिं हजारो
प्रतिस्पों में बट चुकी हैं अब मेरी गुडिया आपस में लड़ाई छोड़कर शक्ति के कमजोर प्रतिस्पों पर
टूट पड़ेंगी और इतने कमजोर स्पों को सुना देंगी । रुको मे सबको ईयरफोन पर गाइड कर लू
थोड़ी देर ।
प्रिंसपल - लेकिन ....
वंडरखूमैन - तुम्हे अपना टकला प्यारा नहीं है क्या ? ..
अच्छा अच्छा ने प्रेटिकल डेमोट्रेशन से समझाती हूँ।
वंडरखूमैन - जरा ... मुझे हलके से मारना
मेरे चीखने पर शक्ति का प्रतिस्प जरूर आयेंगा।
अपने टकले पर वंडखूमैन की टिप्पड़ियो से नाराज प्रिंसपल ने बड़ी जोर से पक गुक्का मारा
वंडखून के सर पर और वंडखूमेंन का विंग उतर गया ।
प्रिंसपल - ओह ... तो ये है सच्चाई...
आययय
वंडखूमन - इसपर हम बाद में बात करेंगे ... देखो शक्ति का प्रतिस्प आ गया
फूउउउह
...
शक्ति का प्रतिस्प बंडखूमैन की फूंक से ही उड़ गया ।
वंडखूमेन - देखा... टक... ओह... मारती रहो मेरी गुडियो... बाल खीच-खीच कर इसे भी
टकला बना दो।



प्रिंसमल - जानती हो वंडरवूगन ... गै आज तक कुबारा क्यों हूँ ?
वंडखूगन - क्यो... हो ?
प्रिंसमल - वयोकि कोई गंजी गिली ही नही.. और गिली भी तो गेरे विचारों से उसके विचार
বहीं गिले... आई लव यू... वंडरवूमैन ।
वंडरवूमन - ये बात तो मैं भी तुमसे कहना चाहती हूं.. आई लब यू 2 प्रिंसमल ।


शक्ति के प्रतिरूपों का पिटना जारी था ।

घोंचू-राज कॉमिक्स की कॉमेडी कहानी-6

शीर्षक - घोंचू
एक दिन सुबह सुबह गुरुदेव ने लतिया के नागपाशा को नींद से जगाया। 

गुरुदेव - अरे उठ। कब तक सोएगा ?

नागपाशा - लाकडाउन है गुरुदेव। उठ के भी क्या करूंगा। 

गुरुदेव - जो त्रिफना तुझसे नागराज ने छीन ली थी, वो वापस लाएंगे। 

त्रिफना की बात सुनते ही नागपाशा उछल के खड़ा हो गया। और ऐसा होते ही उसकी इकलौती गमछी जो वो हमेशा पहने रहता है, सरक के नीचे आ गयी। 

गुरुदेव (अपनी आंख बंद करते हुए) - छी। जल्दी से गमछा लपेट।

नागपाशा - सॉरी गुरुदेव, वो गलती से गलती हो गयी। 

चटाक।चटाक।चटाक।

जैसे ही नागपाशा ने अपना गमछा टाइट किया वैसे ही गुरुदेव में उसे एक जोर का तमाचा मारा - नामुराद। अगली बार तेरा गमछा सरका, तो सच कहता हूं, मार मार के तेरा तेरा गमछा फाड़ दूंगा। अब चल।

नागपाशा - कहां गुरुदेव। 

गुरुदेव - अतीत में।

नागपाशा - अतीत में तो ध्रुव था ना। अपना दुश्मन तो नागराज है। फिर आप उस पीले फफूंदी के पीछे क्यों पड़े हो ?

चटाक। गुरुदेव ने एक और चपेट धर दी उसे।

गुरुदेव - अरे गधे। कॉमिक्स अतीत में नहीं। असली के अतीत में। 50000 साल पीछे।

नागपाशा - इतना पीछे क्यों ? त्रिफना तो नागराज के पास होगा न?

गुरुदेव - पता नहीं।

नागपाशा - जब पता नही तो अतीत में क्यों जा रहे हो गुरुदेव ?

चटाक ।

गुरुदेव - नालायक। त्रिफना अतीत में पहली बार जिस मानव के हाथ लगी थी, हम उसके पास जा रहे है। वो एक आम मानव है। उससे त्रिफना छीनना आसान होगा।

नागपाशा - ओ ऐसा है तो सीधे सीधे बता देते ना आप। बेकार में मैंने आपसे इतना सवाल किया। 

गुरुदेव ने परेशान होकर अपना सर पकड़ लिया।

नागपाशा - सर मत पकड़ो गुरुदेव। अब चेला मुझ जैसे बैल दिमाग को बनाया है तो भुगतना तो तुम्हें ही पड़ेगा। वैसे हम अतीत में जाएंगे कैसे?

गुरुदेव - एक चुम्बकीय यंत्र से। 

नागपाशा - कैसे।

गुरुदेव - मैंने इस यंत्र को त्रिफना की शक्ति से बनाया था। इसलिए कि कभी त्रिफना हमसे चोरी हो जाये या कोई उसे हमसे छीन ले तो बाद में हम इस यंत्र की सहायता से सीधे त्रिफना के पास पहुंच जाए।

नागपाशा - ओ ओ ओ ओ। पर गुरुदेव ऐसा है तो हमे अतीत में जाने की क्या जरूरत है?  वर्तमान वाली त्रिफना जहां है वही से इस यंत्र की सहायता से जाकर उसे ले आते है।

चटाक।

गुरुदेव - अरे नालायक। वर्तमान में उसकी सुरक्षा पता नही कैसे कैसे शक्तिशाली नाग कर रहे होंगे, और अतीत में वो एक आम मानव के पास है, तो अतीत में जाना ज्यादा सही होगा न घोंचू ।

नागपाशा - बात तो सही कही आपने गुरुदेव। पर हमरा एक ठु सवाल है।

गुरुदेव - पूछ।

नागपाशा - जब आप ऐसा यंत्र बना सकते थे जिसकी मदद से हम चुम्बक की तरह खींच कर त्रिफना के पास पहुँच सकते है, तो अपने ऐसा यंत्र क्यों नही बनाया जिससे कि वो त्रिफना चुम्बक की तरह खिंच कर अपने आप हमारे पास आ जाये।

गुरुदेव चुप। उन्हें एकदम से सांप सूंघ गया था।

नागपाशा - खिखिखि। हमेशा मुझे घोंचू कहते हो आप, लेकिन जो घोंचूपना आपने किया उससे आज साबित हो गया कि आपसे बड़ा घोंचू इस दुनिया मे और कोई नहीं।

हिहिहि। समाप्त। क्रमशःहिहिहि। समाप्त। क्रमशःहिहिहि। समाप्त। क्रमशः

शीर्षक - दिमागदार नागपाशा

गुरुदेव को मूर्ख बनाने के बाद नागपाशा जमीन पे लोट-पोट होके हँसने लगा। 
पहले से ही शर्मिंदा गुरुदेव जमीन पर नागपाशा को लुघड़ते देख भड़क उठा। 

और इतिहास गवाह है कि कोई गुरु जब अपने चेले पर भड़कता है तो उसकी ऐसी धुनाई होती है, ऐसी धुनाई होती है, जिसके बाद उस चेले के मुहँ से दोबारा एक चु तक नही निकलती।

अब भड़का हुआ गुरुदेव जमीन पे लुघड़ते नागपाशा को बुरी तरह लतियाने लगा। 

धाड़, धाड़, धाड़ !!!

नागपाशा जोर से चींखा - आहहहह। गुरुदेव क्षमा। माफी, सॉरी, क्षमा दई दो गुरूदेव। मैं अमर भले हू लेकिन दर्द मुझे भी होता है। आह, ऊई, पुई।

गुरुदेव - नामुराद, आगे से कभी मेरा मजाक उड़ाया तो सोच लेना, तेरी इतनी ठुकाई करूँगा की अजीवन तू ठीक से सोफे पर भी बैठ नही पायेगा।

नागपाशा - कसम खाता हूं गुरुदेव आज के बाद मैं आपको कभी घोंचू नहीं कहूंगा। आपने कोई घोंचूपना नहीं किया है, और आप कोई घोंचू भी नहीं है। 

चटाक !

नागपाशा - आह, अब क्यों मारा गुरुदेव ?

गुरुदेव - घोंचू ना बोलने का बोल के दो बार घोंचू बोल दिया तूने मुझे इसलिए। 

चटाक !

नागपाशा ने भी एक जोर का लाफा गुरुदेव को लगाया।

चटाक चटाक चटाक। 

गुरुदेव गुस्से में नागपाशा को तीन चार चाटें मारते हुए - नामुराद। मुझ पर हाथ उठाने की हिम्मत कैसे हुई तेरी।
नागपाशा - सॉरी गुरुदेव। वो मैंने आपको।घोंचू ना बोलने का कह कर दो बार घोंचू बोला तो आप मुझे दो लपेड़ मार दिए। लेकिन फिर मुझे समझाने के लिए आपने भी खुद को दो बार घोंचू कहा। अब आप खुद को तो लपड़िया नहीं सकते थे। इसलिए मैंने ही मौके का फायदा उठाया और आपको दिया धर के एक। खिखिखि।

चटाक !

गुरुदेव ने फिर से नागपाशा को एक रापटा दिया - औकात में रह पाशा, अगली बार मेरे सामने होशियारी दिखाई तो तेरे इकलौते वस्त्र में घुजली का पाउडर डाल दूंगा। उसके बाद तेरा क्या होगा, शैतान ही जाने।

नागपाशा - नाराजगी छोड़ो गुरुदेव। अब चलो अतीत में। त्रिफना लाएंगे, उसके बाद मैं फिर से नागराज को बूढ़ा बनाऊंगा।

गुरुदेव - एक बार बूढ़ा बनाया था न तूने उसे। क्या तब कोई फायदा हुआ था?

नागपाशा - पूरी बात तो सुनो गुरुदेव। इस बार नागराज को जुलजुल बूढ़ा बना दूंगा, इतना बूढ़ा की बेचारा बैसाखी के सहारे भी चल ना पाये, और उसे किसी अनजान आयाम के निर्जन द्वीप पे ला पटकूँगा। 

गुरुदेव - उससे क्या होगा। 

नागपाशा - अबकी बार बीच मे बोला तुमने गुरुदेव तो कसम है मुझे मेरे गमछे की, आपकी एकलौती मैक्सी मैंने फाड़ ना डाली तो मेरा नाम नागपाशा नही।

गुरुदेव (अपनी मैक्सी कस के पकड़ते हुए) - माफ कर दे यार , अब बीच मे नहीं बोलूंगा। बोल बोल, अपना प्लान बक।

नागपाशा - उस निर्जन द्वीप पे एक कन्या भी होगी। नागराज की प्रेमिका नागिन। राजकुमारी विशर्पि। एकदम जवान रूप में। हिहिहि।

गुरुदेव - वाह चेले। तू तो दिमाग चलाना सीख गया।

नागपाशा - हिहिहि। नागराज का दिल जलता रहेगा। बेचारा विशर्पि की जवानी को देख तड़पता रहेगा और एक दिन खुद ही आत्महत्या कर लेगा। हिहिहि।

गुरुदेव - शाबाश। नागराज पे होगा इससे इमोशनल अत्याचार। विशर्पि की जवानी का मारा, नागराज बूढ़ा बेचारा। 

नागपाशा - तो चलो गुरुदेव।

गुरुदेव - जरूर। मेरा हाथ पकड़। जैसे ही मैं अपने यंत्र का प्रयोग करूंगा वैसे ही हम अतीत में खींचते चले जायेंगे। 

नागपाशा - जो आज्ञा घोंचूदेव ..... सॉरी-सॉरी, मेरा मतलब गुरुदेव। खिखिखि।

गुरुदेव - बेटा पहले त्रिफना ले आते है। फिर देख मैं तेरी कैसी धुनाई करता हूँ।

क्रमशः ....

Sunday, 14 June 2020

कॉमिक्स---दुसरे ब्लॉग और साइट पर जाने के लिंक









SITES LINK:-

1    https://pyaretoonscomics.blogspot.com/
1.1 http://indrajal-online.blogspot.com/
(ALL INDRAJAL COMICS)

1.2 http://sscomicsheaven.blogspot.in/  
(IS SITE MEIN AAPKO TINKLE,MADHU MUSHKAN AUR KAAFI OTHER PUBLICATION K RARE COMICS EASILY MIL JAAYEGE)

http://www.rajcomics.com/

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Thursday, 4 June 2020

बोकाबाड़े -राज कॉमिक्स की कॉमेडी कहानी-4



एक दिन डोगा अपराधियों की चटनी बना रहा था । 
लेखक ( खुद से ) - चटनी तो अडिग बनाता है । ठीक से लिख धोन्धे । बोका कही का । 

एक दिन डोगा अपराधियों से भिड़ा हुआ था । एक रहस्यमयी शख्स का अपहरण कुछ चिन्दी टपोरियों ने कर लिया जिसे बचाने डोगा आया था । 

इतना बम मारेंगे , इतना बम मारेंगे वाली संवाद के तर्ज पे डोगा ने चिन्दी अपराधियो के अड्डे को धुवां धुवां कर दिया ओर अपहृत को बचा के एक कंटेनर के पीछे छिप गया । 

डोगा ( परेशानी में ) - ज्यादा जोश में  आके सभये बम फोड़ दिया मैंने । अब का करू । 

तभी डोगा का ध्यान खुद को घूरते हुए उस अपहृत शख्स पर गया । 

डोगा - घूर क्या रहा है झंडू । कौन है तू ? 
अपहृत - हमार नाम बोकाबाड़े है । 
डोगा - बोकाबाड़े । ये कैसा नाम है । 
बोकाबाड़े - पहले बचा लियो तब पता चल जाएगा । 

उधर से चिन्दी टपोरी लोग डोगा के डर में लगातार कंटेनर के पास बम गोली बारूद मार मार के सब धुवा धुवां कर रहे थे । 

डोगा ( गुस्से में ) - इनकी तो । डर मत डोगा । हम किसी से कम नही.....
बोकाबाड़े ( जोर से ) - डोगा के पास बम नही .... 

इत्ता सुनते ही सब अपराधी तेजी से डोगा की तरफ बैट , हॉकी , बेस बैट , मोटी लोहे की चेन  लेके बढ़ने लगे । 

डोगा ( बोकाबाड़े का गला पकड़ते हुए ) - उन्हें क्यों बताया की मेरे पास बम नही । बोका हो का । 
बोकाबाड़े - हमारा तो नाम से पता चल जाये कि हम बोका है । जो ना समझे उ भी बोका होई जाए । 

डोगा ( गुर्ररर ) - आज मेरे  डॉगीज ने पिस्टल तो दिया  पर गोली देना भूल गए । अपनी तो लग गयी है । खैर कोई बात नही । गिने चुने अपराधी है ये , नौसिखिए भी लगते है , ऊपर से गिनती में कम .... 
बोकाबाड़े ( चिल्ला के ) - डोगा की गोली खत्म....... 

गोली खत्म सुनते ही सब चिन्दी टपोरी दौड़ पड़े डोगा को लतियाने । 

बोकाबाड़े को बचाने से पहले अब डोगा को खुद को बचाना था । गुस्सा तो बड़ा आया उसे लेकिन बोके को बचाने के चक्कर मे उसकी लग ना जाये इसीलिए हर बार की तरह कमरे में गटर का ढक्कन ढूंढ के वो उसमें कूद के भाग गया । 

लेखक ( फिर से खुद से ) - ये डोगा को हर बुरी स्तिथि में गटर कहा से दिख जाता है ? 

समाप्त ।

Sunday, 24 May 2020

शाम में कसरत -राज कॉमिक्स की कॉमेडी कहानी-5

एक शाम नागराज कसरत कर रहा था । 
।।
शाम में कसरत ?
नागराज का मन सुबह करे या शाम , आप पढ़ो ज्यादा दिमाग न लगाओ । खिखिखि ।
।।
तभी ध्रुव भागते हुए नागराज के पास आया । 
।।
नागराज - क्या मेरे याड़ी । आज संध्या दर्शन ? 
ध्रुव - जान बचा के भागा हु भाई । 
नागराज - जान बचा के ? 
ध्रुव - हा यार । 

कह के ध्रुव दो मिनट तक चुप रहा । 
नागराज भी चुप-चाप रहा ।।

ध्रुव ( आंखे तरेर के ) - अबे आगे भी तो पूछ ।।
नागराज - क्यों ? बिना पूछे तू बताएगा नही ? 
ध्रुव - बताना तो पड़ेगा भाई । मेरी समस्या का हल शायद तुझ मूर्ख से हो जाये । 
।।
नागराज ( सुलगते हुए ) - बहुत मोटे दांत वाले बिना जहर के सांप से डसवां दूंगा सड़े हुए पियर फफूंदी । गुर्ररर । 
ध्रुव - अले नाराज ना हो यार । भाई है तू अपना । 
नागराज - ज्यादा अमूल वाला बटर मत लगा । अच्छे से जानता हूं तुझे । अब जल्दी से भौक , ऐसे भागते हुए क्यों आया आज ? 
ध्रुव - क्या बताऊँ यार ...
नागराज ( बीच मे टोकते हुए ) - क्या बताऊँ । मतलब बताएगा नही । फिर टाइम क्यों वेस्ट कर रहा मेरा ।
ध्रुव - अबे बता रहा हु । सुन तो ले । पहले ही फुफकारेगा तो मैं बताऊंगा कैसे कुछ । 
।।
नागराज - ओके ओके आगे बोल । 
ध्रुव - आज नताशा को बीच पे ले गया था । 
नागराज - बीच पे । किसके बीच पे । 
ध्रुव - सॉरी सॉरी । बिच पे । समुंदर किनारे वाले बिच पे । 
नागराज - ओअअअअअ । फिर ।
ध्रुव - मैंने कहा । तुम्हारे दिल मे क्या है वो गा के बताओ । 
नागराज ( हाहाहाहा ) - बिना सुर वाली लड़की से तूने गाने को कहा । अरे वो चंदले की बेटी है जिसके सर से पानी तक फिसल जाता है उससे गाने को कैसे कह बैठा तू । 
ध्रुव ( आंखों से आग उगलते हुए ) - हो गया । अब आगे बोलू । 
नागराज - ठीक है ठीक बोल । 
ध्रुव - मेरे कहने पे नताशा ने अपने दिल में छिपा राज गा कर बताया । 
।।
जन्म-जन्म का साथ है हमारा - तुम्हारा । हमारा-तुम्हारा । 
।।
नागराज - बाप रे । लड़की बड़ी शातिर है । अगले जन्म में भी अपने बाप को तुझसे बचाने का ठेका लेना चाहती है । 
ध्रुव - वही तो । इसीलिए मैं भागा ...
नागराज - और सीधा मेरे पास आया । 
ध्रुव ( गुस्से ) - फिर फुफकारा तू बीच मे । बात तो पूरी सुना कर । 
नागराज - ठीक है भाई । अबकी बात पूरी होने के बाद फुफकारूँगा । सीधे तू मेरे पास नही आया तो कहा गया ? 
ध्रुव - ऋचा के पास । 
नागराज - साले को मेरी दोस्ती की कद्र ही नही है । पहले सारी लड़कियों के चक्कर लगाएगा फिर मेरे पास आएगा । गुर्ररर । फिर क्या हुआ ? 
ध्रुव - मैंने ऋचा से कहा की तुम्हारे दिल मे क्या है गा के बताओ । 
नागराज - इंडियन आइडियल का ऑडिशन लेने का ठेका ले रखा है तूने । गा के बताओ । गा के बताओ । 
ध्रुव - अरे समझा कर यार । गाते हुए लोग झूठ नही बोल पाते । 
।।
नागराज - तो ऋचा ने गाया ।
ध्रुव - हा गाया ना।
।।
तू जहां - जहां रहेगा । मेरा साया साथ हो....गा । तू जहां-जहां रहेगा मेरा साया.... मेरा साया ।
।।
नागराज - बाप रे । भूत बन के भी पीछा ना छोड़ेगी तेरा ये तो । 
ध्रुव - भूतनी बनने के बाद भी जो साथ म छोड़े उसके आस-पास रहना बेवकूफी ही होती । उससे बच के मैं भागते हुए  सीधे तेरे पास आया हु यार । 
नागराज - ह्म्म्म । 
ध्रुव - सिर्फ ह्म्म्म । आगे भी तो कुछ बोल ।
नागराज - क्या बोलू ? 
ध्रुव - अबे मेरी प्रॉब्लम तो सॉल्व कर ।
नागराज - अब तू प्रॉब्लम बताएगा तब न सॉल्व करू । 
ध्रुव - अरे पूरी रामकथा बता दी । अब और क्या बताऊँ ।
नागराज - भाई । जरा रिवाइंड में जा । 

रिवाइंड । 

चकर चकर ---/-/
किर्रर्रर .....^///
पुईई ...?....:..."
कुईईई टिर्रर्रर .....)*/// ....
तुरर्...?@///....

रिवाइंड पूरा हुआ । 

ध्रुव - धत्त तेरे की । प्रॉब्लम तो मैंने बताई ही नही । 
नागराज - बड़बोला होने से यही होता है । बड़-बड़ करने के चक्कर मे जरूरी बात बिच पे छोड़ आता है तू । खिखिखि । 
ध्रुव - सुन प्रॉब्लम बताता हूं । 
नागराज - रहन दे । जानता हूं तुझे गाना गवां के ही दिल मे क्या है जानना है । 
ध्रुव - वो तो है । 
नागराज - सर्वनाश में जो तुझे डव कहती थी ना ।
ध्रुव - हा । 
नागराज - उसे कॉल कर । तेरी प्रॉब्लम सॉल्व हो जाएगी । 
।।
ध्रुव ने झट से डव वाली को कॉल लगाया । 
।।
ध्रुव - तुम्हारे दिल मे क्या है गा के बताओ । 
।।
एव्री नाईट इन माय ड्रीम आय सी यू ... आयी सी यू ... 
।।।
ध्रुव ( नागराज को गले लगाते हुए ) - बस इतना ही तो चाहिए था । थैंक्स भाई ।
नागराज ( अंदर-अंदर हस्ते हुए मन मे  ) - एव्री नाईट इन माय ड्रीम के चक्कर मे पड़ के टाइटेनिक में हीरो टपक गया था । खिखिखि । ये भी टपकेगा एक दिन ।जोर वाली खिखिखि ।

समाप्त ।

राज कॉमिक्स की कॉमेडी कहानी-3

कैसे हो मित्रो

बहुत दिन बाद आपकी सेवा में हाजिर हुआ हूँ


हे देव कालजयी 🐍: पढ़िए नई कहानी जो देगी मन को



हे देव कालजयी 🐍: उधर ध्रुव युगमक्षेत्र में अपने दिमाग के घोड़े दौड़ा रहा था और इधर बैठे-बैठे सब बोर हो रहे थे ।।

शक्ति - चलो अंताक्षरी खेलते है ।।
डोगा ( बिफर के ) - हूह । खेलना है तो कोई मर्दो वाला खेल खेलो । ये औरतों वाला खेल मुझे नही खेलना ।।
शक्ति ( गुस्सा होके गुस्से को काबू करते हुए ) - चलो अंताक्षरी छोड़ो । कुश्ती लड़ते है ।।
डोगा - शब्बाश । ये हुई न मर्दो वाली बात । मैं तैयार हूं बोलो किससे कुश्ती ....

डोगा के बात पूरी करने से पहले ही शक्ति ने डोगा को उठाया और लगातर 20-30 धोबी पछाड़ दे मारा ।।

शक्ति - मजा आया मर्दो वाले खेल में । 
डोगा ( दर्द से तड़पते हुए ) - आआआएहह । मार डाआललल्लल्लाआआ रे ।।। बहूऊऊऊ ।। बहुत जोर की बहुहऊऊऊऊ
।।
भोकाल  - देवी शक्ति । ये अंताक्षरी क्या होता है । जरा हमे भी बताए । 

शक्ति ने आव देखा ना ताव और भोकाल की टांग पकड़ उसे भी डोगा की तरह 20-30 पठकनी दे मारी ।।

भोकाल ( दर्द से चिंघाड़ते हुए ) - भो भो कालळळळळळळळळ । 

।।
रक्षक मंडली ठहाके लगाते हुए पेट पकड़ लेती है । 
।।
भोकाल ( जैसे तैसे अपने आंसुओ पे काबू करते हुए ) - देवी शक्ति । हमने आपको देवी कहा और आपने हमे धो दिया । ऐसा भी कोई करता है भला ।
शक्ति ( अत्यधिक क्रोध में ) - नारियों पे अत्याचार करने वाला चाहे कोई तुझ जैसा महाबली क्यों न हो ।  शक्ति नारियों पे अत्याचार करने वाले कि बलि ले लेती है । 
भोकाल ( चौक के ) - अरे मैने किस नारी पे अत्याचार किया ? 
।।
भेड़िया - तुरीन श्री के होते हुए दो और विवाह कर लिया आपने तो पहला अत्याचार तुरीन श्री पे । फिर ना जाने क्या मिर्गी चढ़ी की आपने सलोनी को त्याग दिया । रूपसी तो फिर भी त्याग के लायक थी पर सलोनी श्री से क्या गलती हुई । बिना कोई गलती के सलोनी श्री पे अत्याचार । अब शक्ति आपको धोएगी नही तो और क्या करेगी । 
।।
भोकाल ( अपनी गलती पे पछता कर ) - यहां से लौटते ही सलोनी को वापस अपने पास बुला लूंगा । अब तो गुस्सा थूक दीजिए शक्ति ओर बताए कि ये अंताक्षरी होती क्या है ।

अपेक्षा तो भोकाल को शक्ति से अंताक्षरी के ज्ञान के प्राप्ति की थी लेकिन फिर से शक्ति ने भोकाल को उठाया और  अबकी बार 30-40 धोबी पछाड़ दे मारे । 

भोकाल तड़प के रोते-चिल्लाते हुए - तू शक्ति नही चुड़ैल है । मुझे नही खेलना अंताक्षरी । 
भेड़िया - रोते नही महागुरु । 
भोकाल ( बहुत जोर से रोते हुए ) - रोऊँ नही तो और क्या करूँ ।  बात-बात ये लड़की कूटे जा रही मुझे । बहुत जोर की बुहूऊऊऊ । बहुत बुरी है ये । बहूऊऊऊ ।
भेड़िया - अब आप सलोनी श्री को वापस बुला लेंगे तो तुरीन श्री का दिल फिर से दुखेगा इसीलिए शक्ति ने फिर से आपको धो दिया । 

भोकाल - मतलब एक तरफ कुंवा दूसरी तरफ खाई । 
भेड़िया - आपकी तो आयी शामत आयी । 
भोकाल - अब मैं क्या करूँ । 
भेड़िया - अपने दल में भाग लो । शक्ति का गुस्सा फिर से डोगा पे उतरेगा । 

इत्ता सुनते ही भोकाल वहां से अपने दल में दुड़की हो लेता है और शक्ति फिर से डोगा को कूटने लगती है । 

समाप्त ।

Sunday, 17 May 2020

संन्डे की छुट्टी -राज कॉमिक्स की कॉमेडी कहानी-10

संन्डे की छुट्टी 😂😂🤪

सन्डे के दिन सभी रक्षक छुट्टी मना रहे थे । 

नागराज - क्या सोच रहा स्टील ? 

ध्रुव - हाहाहाहा । 

स्टील - तू हँसा क्यों रे ? क्या मैं सोच नही सकता ?

तिरंगा - स्टील भाई गुस्सा न हो ध्रुव ये सोच के हस पड़ा कि आज तेरा मन रसगुल्ले खाने का कर रहा पर तु खा तो सकता नही बस सोच सकता है ।हिहिहि । 

ध्रुव - मैं क्या सोच रहा था तूने कैसे जान लिया तिरु भाई । 

तिरंगा - धरु बेटा तू जितना सोच सकता उतनी सोच का तो मैं सुबह सुबह  कुल्ला करता हू ।

स्टील - ध्रुव के बच्चे एक मुक्का मार के तेरे सारे दांत तोड़ दूंगा मैं । 

नागराज - अरे रुको रुको पहले तिरु मुझे ये बता तूने एक वक्त में स्टील ओर ध्रुव दोनो के दिमाग मे क्या चल रहा कैसे जान लिया । 

तिरंगा - बड़ा सिंपल है जब किसी के सामने रसगुल्ला खाने से पहले बार बार उसका रस निचोड़ोगे और सामने वाले बन्दे की तरफ देख कर खाओगे वो भी ये जानते हुए की वो कुछ कह नही सकता तो अगले का मन खाने को करेगा ही । 

ध्रुव - वाह तिरंगा वाह । चल इसी बात पे तुझे कमांडो हेड क्वार्टर में नौकरी दे देता हूं मैं । 

तिरंगा - हट रे । तेरी नैकरी तेरे पास रख । अपन की खुद की नौकरी है वो इज्जत वाली तेरी तरह निठल्ला नही घूमता रहता  मैं ।

नागराज - नौकरी तो मैं तुम तीनो को दे दू । बोलो चाहिए । 

ध्रुव , तिरंगा , स्टील - नही । 

नागराज - ठीक है ठीक है । इतना ऐंठने की जरूरत नही । 

ध्रुव - स्टील भाई । रसगुल्ले खाने के अलावा क्या सोच रहे थे । मतलब तुम तो रोबोट हो न, एक वक्त में ढेर सारे ख्याल आते होंगे तुम्हे । 

स्टील - सोच रहा था कि राज कॉमिक का सबसे चहेता कॉमिक हीरो कौन है । 

नागराज - यार फिर से न सुरु हो जाओ । हर किसी की कॉमिक आने के बाद इसी बात पर बहस छिड़ जाती है कि कौन बेस्ट  है । 

तिरंगा - तू गधा ही रहेगा नागराज । कमअक्ल कही का। 

नागराज - जुबान को थाम ले तिरु वरना काट के छोटी कर दूंगा । 

ध्रुव - गुस्सा होने की क्या जरूरत नागराज । स्टील सबसे बेस्ट की बात नही सोच रहा , सबसे चहेते की बात सोच रहा । 

स्टील - हा ओर मेरे एनालिसिस के हिसाब से ..... 

तिरंगा ( स्टील की बात काटते हुए ) - नागराज सबसे चहेता है । 

स्टील - तूने फिर से मेरे मन की बात जान ली । तू पुलिस में भर्ती हो जा अपना पर्सनल हवलदार बना लूंगा तुझे । 

ध्रुव - गुररर । सबसे बेस्ट मैं तो सबसे चहेता भी मैं ही हु ना ।

तिरंगा - पहले तो बेस्ट हमेशा बदलते रहते है । और अपने मुह मिया मिट्ठू मत बन तू । पाठक समझ लेंगे की कौन बेस्ट है ।

ध्रुव - ठीक है ठीक है । अब ये बता की नागराज सबसे चहेता क्यों है ? 

तिरंगा - क्योंकि राज कॉमिक का पहला प्लांड सुपर हीरो नागराज है । 

स्टील - क्योंकि जन्मोत्सव सिर्फ नागराज का मनाया जाता है न कि तेरा । 

नागराज - क्योंकि नागराज के नाम मे भी राज कॉमिक का नाम जुड़ा हुआ है । 

तिरंगा, ध्रुव, स्टील तीनो चौकते हुए - नागराज का सन्धि विच्छेद कर दे तो नाग + राज ,,, राज से राज कॉमिक । 

नागराज - हिहिहि । 

समाप्त ।