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Tuesday, 13 November 2018

कॉमिक्स जंक्शन प्रस्तुति ....बाल-मन को झंझोड़ती एक पटकथा

कॉमिक्स जंक्शन प्रस्तुति ....

शीर्षक - बाल-मन को झंझोड़ती एक पटकथा (भाग - 2)

लेखक - गौरव श्रीवास्तव

(पिछले अंक में आपने पढ़ा कि नागराज बच्चो की कॉमिक ना खरीद पाने की समस्या से परेशान है और वो ध्रुव को इस बारे में बताता है, ध्रुव इस समस्या को ब्रह्मांड रक्षकों के बीच उठाने का सुझाव देता है और दोनो ब्रह्मांड रक्षक कार्यालय जाने को तैयार होने लगते हैं |)

अब आगे ................

ध्रुव - OK पर नाग रस्सी से नही मेरी बाइक पर चलो |

नागराज - OK पर बाइक मैं चलाऊँगा |

ध्रुव - (हैरानी से) अबे तूने कब बाइक चलानी सीखी ।

नागराज - नागू ने सिखा दी 🤭

ध्रुव - ये नागू को कंट्रोल में रख किसी दिन तुझे बॉलीवुड में हीरो बना के छोड़ेगा 🤣🤣
    
          दोनो हँसते हुए निकल लेते हैं

ब्रह्मांड रक्षक कार्यालय 🏢


तिरंगा - यार कहां रह गया ध्रुव, मैसेज पे तो कह रहा था अर्जेंट है |

परमाणु - हॉ यार, मैं तो अपनी कॉस्ट्यूम आज धो रहा था, प्रोबॉट सिर्फ बकबक करता है, अरे स्टील जरा अपने कंप्यूटर पे पता तो लगा कहां पहुंचे ये लोग ।

स्टील - मेरे ट्रैकर के हिसाब से ध्रुव, नागराज बिल्डिंग में आ चुके हैं, डोगा बगल वाली बिल्डिंग के गटर में पहुंच चुका है, बाकी ट्रैकर की रेंज से बाहर है ।
            
तिरंगा - शक्ति अपनी प्रकाश गति से उड़ रही होगी, और भेड़िया जंगल मे होगा, तेरा ट्रैकर काम नही करेगा दोनो पे ।
    
कुछ ही मिनटों में शक्ति, ध्रुव, नागराज, डोगा का प्रवेश !

ध्रुव - बाकी सब कहा है ?

तिरंगा - यार तुम्हारा अर्जेंट मेसेज आया तो जो आस पास थे आ गए |

ध्रुव - चलो कोई बात नही बाकियो तक मेसेज पहुंचा दिया जाएगा ।

डोगा - हॉ भाई ध्रुव अब बता क्या बात है, किसको ठोकना है ?

परमाणु - ओए तू फिर गटर से आया ना, कम से कम एक डियो ही रख के चला करो ।

डोगा - हॉ तो अर्जेंटली बुलाओगे तो गटर ही सबसे शॉर्टकट है मेरे लिए, और तेरे पास तो नोज़फिल्टर होगा ना लगा ले ।

शक्ति - तुम लोग अपना व्यर्थ का वार्तालाप बंद करो, ध्रुव नागराज ने एक साथ मीटिंग बुलाई है तो अवश्य कोई गंभीर विषय होगा ।

ध्रुव - हॉ शक्ति और ये गंभीर विषय नागराज द्वारा  उठाया गया है, नागराज आगे तुम बताओ ।

नागराज - आप सभी का आने के लिए धन्यवाद, आज विषय किसी आतंकवाद, किसी हाईटेक विलेन या किसी अन्य आयाम से आये हुए परग्रही का नही है बल्कि एक साधारण ही सामाजिक समस्या है |

डोगा - समाज की हर बुराई को मैं जड़ से उखाड़ फेंकूँगा, बताओ नागराज कही हफ्ता वसूली हो रही है या नशे के नए सौदागर पनप रहे हैं ।

नागराज - शांत डोगा शांत !
 मैं जिस समस्या की बात कर रहा हूं वो कुछ दिन पहले मैंने एक रेलवे स्टेशन पर महसूस की ।

तिरंगा - समस्या वो भी रेलवे स्टेशन पे, और महसूस की, क्या नागराज भाई TC ने बिना टिकट धर लिया था क्या, 😌😌

ध्रुव - तिरंगा, यार बताने तो दे उसे ।

नागराज - नही तिरंगा,पहली बात तो मैं कोई नियम नही तोड़ता । 
समस्या बच्चो से जुड़ी है, जिसे मैंने कुछ दिन पहले एक रेलवे स्टेशन पर बुक स्टाल पर महसूस किया था !
बात कुछ दिन पहले की है (नागराज पूरी आपबीती सभी को पूरी गंभीरता से बताता चला गया)

 कुछ देर ब्रह्मांड रक्षक सभा मे सन्नाटा छा गया ।

शक्ति - हम्म्म्म तो ये बात है, विषय तो गंभीर के साथ साथ सोचनीय भी है । हम लोग अपने कार्यो के बारे में बताते तो घूमते नही, हमारे ही कुछ प्रशंशक है जो हमारी घटनाओं को कहानी के रूप में समाज के कोने कोने तक पहुंचाते हैं, इसीलिए आज विश्व हम लोगो के विषय मे जानता है |

 डोगा - 😣😣 (रुवंसा होते हुए) मुझे मेरे बचपन के दिन याद आ गए, मैं भी सुपरमैन, बैटमेन की कॉमिक का दीवाना था, अदरक चाचा कभी नहीं ख़रीदते थे । मैं ही चोरी छुपे पैसे इकट्ठा कर खरीदता था ।

तिरंगा - बात तो सोचने वाली है पर इसमे हम क्या कर सकते हैं, ये पब्लिकेशन का आंतरिक मामला है ।

परमाणु - तो क्या किया जाए, हो सकता है उन स्टेशन के बच्चो के पास पैसे ही ना हों या वो वहां से फ्री में पाना चाहते हो, जिससे बाहर जाके मंहगे में बेच सके ।

डोगा - ओय अपनी पुलसियागिरी यहां मत झाड़, वो बच्चे है !

शक्ति - नही अगर नागराज ने खुद खरीद के दी है उन बच्चो को कॉमिक, तो बच्चे अपनी जगह सही है, ध्रुव तुम ही बताओ हम लोग किस तरह इस मामले में मदद कर सकते है ।

ध्रुव - दोस्तो आप लोगो को यहां बुलाने के साथ ही मैंने इस विषय मे सोचना शुरू कर दिया था, पहले हम लोगो को इस मामले की तह तक जाना होगा, क्या देश के अन्य भागों में भी बच्चो की किताबें इतनी ही मंहगी है, इनकी मंहगी होने का क्या कारण है, और क्या इन किताबो के दाम कम किये जा सकते है ? अगर हाँ तो कैसे ??
 हमे इन सब सवालों का जवाब ढूंढना होगा । 

डोगा - अब क्या हम लोग जासूसी करेंगे ?

ध्रुव - नही, जासूसी नही, मगर एक सुपरहीरो की तरह नही एक आम इंसान की तरह हम लोगो को कुछ समय बच्चो, दुकानदारों और पब्लिकेशन और अन्य लोगो के साथ बिताने होंगे जिससे हम उनकी समस्या स्वयं महसूस कर सके ।

शक्ति - बहुत अच्छे ध्रुव तुम्हारा ये सुझाव अच्छा है लोगो के बीच रहकर ही हम उनकी समस्या समझ सकते है।

नागराज - हॉ ध्रुव तुम्हारा आइडिया अच्छा है पर हमको लोगो के बीच आम इंसान की तरह रहना होगा, अपनी पहचान छुपा कर ।

तिरंगा - हम लोग तो भेस बदल कर रह लेंगे, पर ये स्टील कैसे बदलेगा 😁😁।

ध्रुव - स्टील को अभी कोई जरूरत भी नही है उसका रोल बाद में मैं बताऊँगा ।

स्टील - OK ध्रुव |

ध्रुव - तो फिर तय रहा हम सब अपने कार्यक्षेत्र में एक महीने लोगो के बीच आम इंसान बन के रहेंगे, और इस समस्या की जड़ तालाशेंगे । 
जो ब्रह्मांड रक्षक आज नही आ पाए हैं उन्हें आज की मीटिंग की पूरी जानकारी दे दी जाएगी, और उन्हें इस प्लान के बारे में भी बता दिया जाएगा ।

तिरंगा, डोगा, स्टील, परमाणु, शक्ति सभी एक साथ सहमति में सर हिलाते है ।

नागराज -  OK आप सभी का शुक्रिया, स्पेशली तुम्हारा ध्रुव कि तुमने बच्चो की इस समस्या को छोटा नही समझा ।

ध्रुव - नागराज बच्चो से ही हम है, अगर बच्चे हमसे दूर हो जायेगे, तो हम लोग को कोई पूछेगा भी नही ।
 चलो अब सब विदा लेते हैं, यही मिलेंगे एक महीने बाद ।

सभी ब्रह्मांड रक्षक निकल पड़ते हैं एक अनोखे मिशन की ओर .........

     ( अगले अंक में - ध्रुव रेलवे स्टेशन में बुक स्टाल के बगल में ही एक चाय का स्टाल खोल लेता है, और साधारण कपड़ो में चायवाला बन जाता है......... )

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🙏🙏🙏🙏

Monday, 12 November 2018

राज कॉमिक्स -28 वर्षो का ब्यौरा

यह Data बनाया गया है,आपको जानकारी देने के लिए कि राज कॉमिक्स ने अपने सफ़र के हर साल में क्या-क्या उतार-चढ़ाव देखे हैं! 1986 में शुरू होने के बाद लगातार राज कॉमिक्स ने प्रकाशन जारी रखा है! इन 28 वर्षो में हज़ारो कॉमिक्स छापी गई हैं! उन्ही का एक हर साल का मोटा-मोटा खाका यहाँ तैयार किया गया है! जैसा कि आप देख सकते हैं कि शुरुआत में राज कॉमिक्स सिर्फ GENERALS कॉमिक्स छापती थी...जिसमे 40 पन्ने होते थे....लेकिन ऐसी सिर्फ कुछ ही कॉमिक्स थी...उसके बाद  28-32 पन्ने की कॉमिक्स आने लगी! 5 साल तक इसी तरह छापने के बाद 1991 में "नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव" नामक कॉमिक्स से RC ने 64 पन्नो की कॉमिक्स की दुनिया से पाठको को रू ब रू करवाया!
पाठको को यह बहुत पसंद आया और RC ने उसके बाद लम्बी कहानियां देना शुरू किया! उस वक़्त तक स्थापित हो चुके हीरो कई बन गए थे..और उनकी कहानियां 30 पन्नो में समा नहीं सकती थी! 1993-2003 राज कॉमिक्स का स्वर्णिम दशक था! राज कॉमिक्स इन्ही 10 सालों में शिखर पर पहुंची! 2004 में राज कॉमिक्स ने GENERALS कॉमिक्स का प्रकाशन बंद कर दिया और पूरा ध्यान 60 पन्नो से अधिक की कहानियां देने पर लगाया! जिसके फलस्वरूप कई कमजोर कहानियां जो पहले 30 पन्नो में ठीक लगती थी..ज्यादा पन्नो में उबाने लगी! परिणामस्वरूप साल दर साल कॉमिक्स आने की गति कम होती गई! जहाँ पहले साल भर में 100 नई कॉमिक्स मिलना आम बात थी...अब 50 के नीचे आ चुकी थी!
2010 के बाद गिरावट का यह सिलसिला लगातार जारी है और आज राज कॉमिक्स साल में 20 नई कॉमिक्स का आंकड़ा भी नहीं छू पा रही!
2015 में एक बार फिर से राज कॉमिक्स ने GENERALS का प्रकाशन शुरू किया है!

Maximum - 1999
Minimum  - 2014



1986...............................38.......GENERALS.....=38

1987...............................44.......GENERALS.....=44

1988...............................89.......GENERALS.....=89

1989...............................73.......GENERALS.....=73

1990...............................72.......GENERALS.....=72

1991...............................28.......GENERALS.....+.....8.....SPECIALS.....=36

1992...............................44.......GENERALS.....+.....6.....SPECIALS.....=50

1993...............................110.....GENERALS.....+.....13.....SPECIALS.....=123

1994...............................65.......GENERALS.....+.....9.....SPECIALS.....=74

1995...............................94.......GENERALS.....+.....20.....SPECIALS.....=114

1996...............................90.......GENERALS.....+.....20.....SPECIALS.....=110

1997...............................97.......GENERALS.....+.....33.....SPECIALS.....=130

1998...............................105.......GENERALS.....+.....15.....SPECIALS.....=120

1999...............................97.......GENERALS.....+.....45.....SPECIALS.....=142

2000...............................78.......GENERALS.....+.....47.....SPECIALS.....=125

2001...............................65.......GENERALS.....+.....65.....SPECIALS.....=130

2002...............................46.......GENERALS.....+.....74.....SPECIALS.....=120

2003...............................11.......GENERALS.....+.....101.....SPECIALS.....=112

2004...............................103.....SPECIALS.....=103

2005...............................86.......SPECIALS.....=86

2006...............................68.......SPECIALS.....=68

2007...............................55.......SPECIALS.....=55

2008...............................52.......SPECIALS.....=52

2009...............................49.......SPECIALS.....=49

2010...............................55.......SPECIALS.....=55

2011...............................21.......SPECIALS.....=21

2012...............................20.......SPECIALS.....=20 

2013...............................18.......SPECIALS.....=18

2014...............................15.......SPECIALS.....=15

2015...............................4.........GENERALS.....+.....9.....SPECIALS.....=13


2016.........................


2017........................


2018.......................

मनोज पांडेय जी के इंटरव्यू वीडियो और अन्य कॉमिक्स संबंधित वीडियो

इस वीडियो पर क्लिक कीजिए और 2 या 3 सेकंड इंतजार कीजिए,और दुबारा क्लिक कीजिए,वीडियो सीधा ही ब्लॉग पर प्ले हो जायेगा।स्क्रीन ज़ूम करने के लिए फिंगर का प्रयोग करें।


DOGA MOVIE




MANOJ PANDEY COMICS COLLECTION VIDEO




SUPER COMMANDO DHURVE ADVERTISEMENT VIDEO 











MANOJ PANDEY INTERVIEW VIDEO



Saturday, 20 October 2018

पायरेसी टॉपिक पर विचार-विमर्श

पायरेसी के ऊपर बहुत से टॉपिक आपको फेसबुक और व्हाट्सएप्प ग्रुप पर मिल जायेंगे।आज हमारी चर्चा भी कॉमिक्स संबंधित पायरेसी पर है।
सबसे पहले ये जानने की कोशिश करते है,कि पायरेसी क्या होती है,क्यों होती है,किसलिए होती है,कौन करता है।उसके करने से किसी को क्या फायदा होता है, और किसको नुकसान होता है।
पायरेसी को ओरिजिनल कंटेंट की डब्लिकेट कॉपी या ज़ेरॉक्स कॉपी कहा जा सकता है।जिसका तुलना हम नकल से कर सकते हैं।
पायरेसी की जरूरत अपने ओरिजिनल कंटेंट को सेव करने के लिए भी की जाती है,उसको जब तक पायरेसी श्रेणी में नही कहा जा सकता,तब तक उस कंटेंट से उसको व्यावसायिक लाभ नही होता हो या किसी को नुक्सान नही होता हो।
उदहारण के लिए रामायण,महाभारत पर काफी पुस्तकें छपी है,तो जिस पब्लिकेशन ने इनके आधार को मानकर अपनी पुस्तकें छाप कर बाजार में बेची हो और इनसे फायदा उठाया हो तो क्या वो भी पायरेसी नही है क्या।नही जी ये पायरेसी नही है,अगर हम छपी हुई पुस्तक के कंटेंट को ज्यूँ का त्यौ प्रिंट कर उसको बेचते है,तो वो पायरेसी में आता है।
पायरेसी सस्ते और महंगे कंटेंट दोनों की जाती है,या जो कंटेंट मार्किट में आसानी से उपलब्ध नही हो।
पायरेसी से एक तरफ जहां व्यवसाय को नुकसान होता है,वही दूसरी तरफ पायरेसी करने वाले को भी कोई फायदा नही मिलता।क्योँकि उसने तो पायरेसी शेयर करने के लिए की है,लेकिन उसका नुकसान कंपनी ने उठाया।
अधिकतर कॉमिक्स पब्लिकेशन भी पुराने पब्लिकेशन के कंटेंट से आईडिया लेते है,जिनका मुख्य source विदेशी कॉमिक्स पब्लिकेशन है,वो वहां से इमेज वाइज इमेज की कॉपी भी कर लेते है।और उनकी स्टोरी को थोड़ा बहुत चेंज कर अपनी कॉमिक्स में प्रिंट कर देते है,यहाँ तक कुछ पब्लिकेशन तो अन्य हिंदी पब्लिकेशन से कॉपी कर लेते है,तो यह सब पायरेसी में ही आता है।
कुछ मजबूरीवश पायरेसी का सहारा लेते है,क्योँकि वो कंटेंट या तो काफी महंगा होता है या बाजार में उपलब्ध नही होता,कुछ अज्ञानवश करते है,और कुछ कुंठित होकर।लेकिन कोई भी सही नही है।
इसलिए पायरेसी को रोक पाना लगभग असंभव सा काम है,इसके लिए कंपनियों को अपनी सामग्री को जेनुइन रेट में उपलब्ध करवाना पड़ेगा, ताकि सभी इसको ख़रीद सकें।