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Monday, 12 November 2018

राज कॉमिक्स -28 वर्षो का ब्यौरा

यह Data बनाया गया है,आपको जानकारी देने के लिए कि राज कॉमिक्स ने अपने सफ़र के हर साल में क्या-क्या उतार-चढ़ाव देखे हैं! 1986 में शुरू होने के बाद लगातार राज कॉमिक्स ने प्रकाशन जारी रखा है! इन 28 वर्षो में हज़ारो कॉमिक्स छापी गई हैं! उन्ही का एक हर साल का मोटा-मोटा खाका यहाँ तैयार किया गया है! जैसा कि आप देख सकते हैं कि शुरुआत में राज कॉमिक्स सिर्फ GENERALS कॉमिक्स छापती थी...जिसमे 40 पन्ने होते थे....लेकिन ऐसी सिर्फ कुछ ही कॉमिक्स थी...उसके बाद  28-32 पन्ने की कॉमिक्स आने लगी! 5 साल तक इसी तरह छापने के बाद 1991 में "नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव" नामक कॉमिक्स से RC ने 64 पन्नो की कॉमिक्स की दुनिया से पाठको को रू ब रू करवाया!
पाठको को यह बहुत पसंद आया और RC ने उसके बाद लम्बी कहानियां देना शुरू किया! उस वक़्त तक स्थापित हो चुके हीरो कई बन गए थे..और उनकी कहानियां 30 पन्नो में समा नहीं सकती थी! 1993-2003 राज कॉमिक्स का स्वर्णिम दशक था! राज कॉमिक्स इन्ही 10 सालों में शिखर पर पहुंची! 2004 में राज कॉमिक्स ने GENERALS कॉमिक्स का प्रकाशन बंद कर दिया और पूरा ध्यान 60 पन्नो से अधिक की कहानियां देने पर लगाया! जिसके फलस्वरूप कई कमजोर कहानियां जो पहले 30 पन्नो में ठीक लगती थी..ज्यादा पन्नो में उबाने लगी! परिणामस्वरूप साल दर साल कॉमिक्स आने की गति कम होती गई! जहाँ पहले साल भर में 100 नई कॉमिक्स मिलना आम बात थी...अब 50 के नीचे आ चुकी थी!
2010 के बाद गिरावट का यह सिलसिला लगातार जारी है और आज राज कॉमिक्स साल में 20 नई कॉमिक्स का आंकड़ा भी नहीं छू पा रही!
2015 में एक बार फिर से राज कॉमिक्स ने GENERALS का प्रकाशन शुरू किया है!

Maximum - 1999
Minimum  - 2014



1986...............................38.......GENERALS.....=38

1987...............................44.......GENERALS.....=44

1988...............................89.......GENERALS.....=89

1989...............................73.......GENERALS.....=73

1990...............................72.......GENERALS.....=72

1991...............................28.......GENERALS.....+.....8.....SPECIALS.....=36

1992...............................44.......GENERALS.....+.....6.....SPECIALS.....=50

1993...............................110.....GENERALS.....+.....13.....SPECIALS.....=123

1994...............................65.......GENERALS.....+.....9.....SPECIALS.....=74

1995...............................94.......GENERALS.....+.....20.....SPECIALS.....=114

1996...............................90.......GENERALS.....+.....20.....SPECIALS.....=110

1997...............................97.......GENERALS.....+.....33.....SPECIALS.....=130

1998...............................105.......GENERALS.....+.....15.....SPECIALS.....=120

1999...............................97.......GENERALS.....+.....45.....SPECIALS.....=142

2000...............................78.......GENERALS.....+.....47.....SPECIALS.....=125

2001...............................65.......GENERALS.....+.....65.....SPECIALS.....=130

2002...............................46.......GENERALS.....+.....74.....SPECIALS.....=120

2003...............................11.......GENERALS.....+.....101.....SPECIALS.....=112

2004...............................103.....SPECIALS.....=103

2005...............................86.......SPECIALS.....=86

2006...............................68.......SPECIALS.....=68

2007...............................55.......SPECIALS.....=55

2008...............................52.......SPECIALS.....=52

2009...............................49.......SPECIALS.....=49

2010...............................55.......SPECIALS.....=55

2011...............................21.......SPECIALS.....=21

2012...............................20.......SPECIALS.....=20 

2013...............................18.......SPECIALS.....=18

2014...............................15.......SPECIALS.....=15

2015...............................4.........GENERALS.....+.....9.....SPECIALS.....=13


2016.........................


2017........................


2018.......................

मनोज पांडेय जी के इंटरव्यू वीडियो और अन्य कॉमिक्स संबंधित वीडियो

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Saturday, 20 October 2018

पायरेसी टॉपिक पर विचार-विमर्श

पायरेसी के ऊपर बहुत से टॉपिक आपको फेसबुक और व्हाट्सएप्प ग्रुप पर मिल जायेंगे।आज हमारी चर्चा भी कॉमिक्स संबंधित पायरेसी पर है।
सबसे पहले ये जानने की कोशिश करते है,कि पायरेसी क्या होती है,क्यों होती है,किसलिए होती है,कौन करता है।उसके करने से किसी को क्या फायदा होता है, और किसको नुकसान होता है।
पायरेसी को ओरिजिनल कंटेंट की डब्लिकेट कॉपी या ज़ेरॉक्स कॉपी कहा जा सकता है।जिसका तुलना हम नकल से कर सकते हैं।
पायरेसी की जरूरत अपने ओरिजिनल कंटेंट को सेव करने के लिए भी की जाती है,उसको जब तक पायरेसी श्रेणी में नही कहा जा सकता,तब तक उस कंटेंट से उसको व्यावसायिक लाभ नही होता हो या किसी को नुक्सान नही होता हो।
उदहारण के लिए रामायण,महाभारत पर काफी पुस्तकें छपी है,तो जिस पब्लिकेशन ने इनके आधार को मानकर अपनी पुस्तकें छाप कर बाजार में बेची हो और इनसे फायदा उठाया हो तो क्या वो भी पायरेसी नही है क्या।नही जी ये पायरेसी नही है,अगर हम छपी हुई पुस्तक के कंटेंट को ज्यूँ का त्यौ प्रिंट कर उसको बेचते है,तो वो पायरेसी में आता है।
पायरेसी सस्ते और महंगे कंटेंट दोनों की जाती है,या जो कंटेंट मार्किट में आसानी से उपलब्ध नही हो।
पायरेसी से एक तरफ जहां व्यवसाय को नुकसान होता है,वही दूसरी तरफ पायरेसी करने वाले को भी कोई फायदा नही मिलता।क्योँकि उसने तो पायरेसी शेयर करने के लिए की है,लेकिन उसका नुकसान कंपनी ने उठाया।
अधिकतर कॉमिक्स पब्लिकेशन भी पुराने पब्लिकेशन के कंटेंट से आईडिया लेते है,जिनका मुख्य source विदेशी कॉमिक्स पब्लिकेशन है,वो वहां से इमेज वाइज इमेज की कॉपी भी कर लेते है।और उनकी स्टोरी को थोड़ा बहुत चेंज कर अपनी कॉमिक्स में प्रिंट कर देते है,यहाँ तक कुछ पब्लिकेशन तो अन्य हिंदी पब्लिकेशन से कॉपी कर लेते है,तो यह सब पायरेसी में ही आता है।
कुछ मजबूरीवश पायरेसी का सहारा लेते है,क्योँकि वो कंटेंट या तो काफी महंगा होता है या बाजार में उपलब्ध नही होता,कुछ अज्ञानवश करते है,और कुछ कुंठित होकर।लेकिन कोई भी सही नही है।
इसलिए पायरेसी को रोक पाना लगभग असंभव सा काम है,इसके लिए कंपनियों को अपनी सामग्री को जेनुइन रेट में उपलब्ध करवाना पड़ेगा, ताकि सभी इसको ख़रीद सकें।

Thursday, 18 October 2018

नॉवेल लिस्ट

राज भारती
कमलकांत सीरिज
1. तिगनी का नाच
2. तेरी गर्दन मेरे हाथ
3. त्रिशूल
4 मौत खङी तेरे द्वार
5. विष क्या
6. हिसाब बराबर
7. कातिल माने ना
8. काम तमाम
9. सारे दिमाग मेरे शिकार
10. दिल तो कातिल है
अग्निपुत्र सीरिज

1. मायाजाल
2. महादण्ड
3. खुदा का बेटा
4. महाबली
5. महाक्रोधी
6. महारथी
7. महायोगी
8. महामंत्र
9. महाकाल
10. महादाह
11. महामंत्र
12. महापाप
13. महाविनाश
14. महासंग्राम
15. महाकुण्ड
16. अग्निपुत्र
17. रक्तपात
18. रक्तधारा
19. मिस्त्री शहजादी
20. रक्त सिंदूर
21. रक्त सागर
22. शंग्रीला
23. रक्त पिपासु
24. रक्त रेखा
25. रक्त आहुति
26. रक्त कलश
27. रक्त-सुरा
28. रक्तांचल
39. रक्तदेव
30. रक्त -भैरवी
41. रक्त-मंथन
42. मृत्युराग
43. मृत्युदंश
44. मृत्युधाम
45. मृत्युजाल
46.. मृत्युरथ
47. मृत्युद्वार
48. शाही रक्कासा
49. सफेद कबूतरी
50. मल्लिका का ताज
51. शाही जल्लाद
52. ताजपोशी
53. जादूगरनी
54. दोधारी तलवार
55. रक्त-मंदिर 
56. तौर ग्रह के हत्यारे
57. तौर ग्रह के देवता
58. मंगोल सुंदरी
60. तौर ग्रह के छापामार
61. अभिसारिका
62. सुर्ख सैलाब
63. सरहदी भेङिये
64. शिकारी मल्लिका
65. तौर के लूटेरे
66. रेगिस्तानी कबीले की मल्लिका
67. हुंकार
68. आमरा
69. आमरा का इंतकाम
70. विनाश चक्र
71. बिल्ला हरूमा
72. शिंगूर के दरिंदे
73. शाबा
74.शंखनाद
75. महायोद्धा (65 वा उपन्यास, अग्निपुत्र)
ये सब राजभारती के नावेल है.

Sunday, 16 September 2018

कॉमिक्स जंक्शन

लौट रही है कॉमिक्स

रचनाकार – गौरव कुमार निगम


हर साल की तरह इस साल भी गर्मियों की छुट्टियां लौट आयी हैं, लेकिन हर साल गर्मियों की छुट्टियों के साथ ही गली गली में दिखाई देने वाली एक चीज धीरे धीरे गायब होती जा रही है…कॉमिक्स।

नब्बे के दशक में, जब ज्यादातर लोगो के पास मनोरंजन के लिए बड़ी मुश्किल से एक अदद शटर वाला ब्लैक एंड वाइट टीवी हुआ करता था जो कि कभी बड़ो के आँख तरेरने पर और अक्सर बिजली ना होने की वजह से बंद ही रहता था तब समय काटने के लिए नौजवानों के लिए लुगदी उपन्यास और बच्चों के लिए कॉमिक्स ही भरोसेमंद सहारा हुआ करते थे। अस्सी और नब्बे का दशक कॉमिक्स इंडस्ट्री का स्वर्णकाल कहा जा सकता है। गर्मियां आते ही गली के कोने की किसी दुकान पर कॉमिक्स सज जाती थी…कुछ एक पतले तार पर लटकाई हुई और बाकी एक ढ़ेर की शक्ल में दुकान के एक कोने में रखी हुई।
तब नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव, डोगा, हवलदार बहादुर, क्रुकबांड, चाचा चौधरी जैसे पात्र बच्चों के बीच किसी सुपरस्टार का दर्जा रखते थेI

इंडियन कस्टमर, जो कि अक्सर बच्चे हुआ करते, की परचेजिंग कैपेसिटी कम हुआ करती थी क्यूंकि जेब खर्च सीमित मिलता थाI सो कॉमिक्स ज्यादातर किराये पर ही ला कर पढ़ने का रिवाज था…पतली वाली के 25 पैसे और डाइजेस्ट कॉमिक्स के 50 पैसे पूरे 24 घंटे के लिये तय किराया हुआ करता था, जिसमें देर होने पर बाकायदा डबल किराया वसूलने का भी मौखिक प्रावधान हुआ करता था।












सयाने बच्चे आपस में तीन चार बच्चों का ग्रुप बनाकर एक साथ 3 या 4 कॉमिक्स किराये पर ले आते थे और किसी एक के घर में बैठकर सारी कॉमिक्स पढ़कर अगले दिन वापस कर आते थे…यानी एक कॉमिक्स का किराया देकर एक से ज्यादा कॉमिक्स के मजे ले लिया करते थे। दूकानदार इसके बदले कॉमिक्स के साथ मिलने वाली फ्री आइटम्स जैसे कार्ड्स, स्टिकर, पोस्टर्स वगैरह उन बच्चों को ही औने पौने दाम पर बेचकर अपना प्रॉफिट पूरा कर लेता था

नब्बे के दशक के बाद इंडियन कॉमिक्स इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा चोट घर घर पहुँच चुके केबल टीवी ने पहुंचाईI जो कहानियां चित्रों के रुप में मिलती थी वैसी कहानियां कार्टून शोज के रूप में ज्यादा आकर्षक तरीके से बच्चों के सामने पेश की जाने लगींI जिन किस्सों के लिए दुकान तक दौड़ लगानी पड़ती थी, वो कहानियां घर के एक कमरे में रखे टीवी पर ही मिल जा रही थीI

कॉमिक्स की मांग घटने लगी क्यूंकि बच्चों के माँ बाप को भी दो सौ रुपये महीने में कॉमिक्स के ऊपर खर्च करने से बेहतर केबल टीवी कनेक्शन पर खर्च करना सही लगता थाI कॉमिक्स तो सिर्फ बच्चे या किशोर पढ़ते थे, केबल टीवी सबका मनोरंजन करने में सक्षम था…साथ ही अपने शुरुआती दौर में केबल कनेक्शन रखना भी अपने आप में आज के दौर के लेटेस्ट मोबाइल फ़ोन रखने जैसा स्टेटस सिम्बल थाI

कॉमिक्स इंडस्ट्री के इस गिरते रुझान के बीच भी राज कॉमिक्स, मनोज कॉमिक्स, डायमंड कॉमिक्स जैसे कुछ प्रतिष्ठित प्रकाशनों ने कॉमिक्स छापने और उन्हें बढ़ावा देने का सिलसिला जारी रखाI
कॉमिक्स इंडस्ट्री को अगली तेज़ चोट सन 2005 के बाद इन्टरनेट के तेज़ी से बढ़ते असर की वजह पहुंचीI
इन्टरनेट ने कॉमिक्स की पाइरेसी करके सर्वसुलभ बना दिया, जिससे कॉमिक्स इंडस्ट्री को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ाI कॉमिक्स से प्रेम और जुनून के नाम पर लोगों ने कॉमिक्स को स्कैन कर के इन्टरनेट पर डालना शुरू कर दियाI बिना कुछ खर्च किये कॉमिक्स हर किसी को पढने के लिए उपलब्ध हो गयी जिसकी वजह से कॉमिक्स और भी महंगी होती चली गयीI
कॉमिक्स इंडस्ट्री के लिए शायद ये सबसे बुरा दौर थाI
कॉमिक्स पब्लिश करना घाटे का बिज़नस बनता जा रहा थाI एक तरफ़ पुरानी कॉमिक्स फ्री में पढने के लिए मिल रही थी दूसरी तरफ नयी कॉमिक्स का महंगा होते जाना उसकी बिक्री पर असर डाल रहा थाI रही सही कसर इन्टरनेट और टीवी ने पूरी कर दी थीI
लेकिन कहते हैं ना कि समस्या जहाँ पैदा होती है, उसका समाधान भी अक्सर वहीँ मिलता हैI
कॉमिक्स इंडस्ट्री ने बदलते वक़्त और तकनीक से पैदा हुई समस्या का हल बदलते वक़्त के हिसाब से बने तौर तरीकों और तकनीक से देना शुरू कियाI
कॉमिक्स इंडस्ट्री ने नए लेखकों, आर्टिस्टों को मौका देना शुरू किया जो नयी कहानियों के साथ मार्किट में आयेI
कई कॉमिक्स पब्लिशिंग हाउस ने अपनी वेबसाइट और ई कॉमर्स वेबसाइट के ज़रिये कॉमिक्स बेचना शुरू किया जिससे कॉमिक्स छपने से लेकर खरीदने वाले के हाथ में पहुँचने तक के खर्चे कम किये जा सकेंI ‘कॉमिक कॉन’ जैसे इवेंट्स होने शुरू हुए जिससे लोगों के बीच कॉमिक्स को लेकर उत्साह बढ़ाI पुस्तक मेलों में भी कॉमिक पब्लिशर्स जाने लगे जिससे उनकी बिक्री और प्रसार बढ़ाI
अब तक कॉमिक्स सिर्फ बच्चों की चीज मानी जाती थी लेकिन अब वो एक ‘कूल थिंग’ बननी शुरू हो गईI
बीच बीच में ख़बरें आती रहती हैं कि सुपर कमांडो ध्रुव की कहानियों को लेकर सीरियल बन रहा है, (नागराज के कुछ एपिसोड बने भी थे), डोगा पर आधारित फिल्म बन रही है जिसमे कुणाल कपूर डोगा बनने की पूरी तैयारी कर चुके हैं, परमाणु को लेकर वेब सीरीज बन रही हैI ऐसी ख़बरों ने कॉमिक्स पढ़ने वालों के बीच एक नया जोश फूंक दिया हैI
हाल ही में राज कॉमिक्स ने अपना एप्प लांच किया जिसके ज़रिये अब वो आज की नयी पीढ़ी जिनके हाथों का स्मार्टफ़ोन ही उनकी किताबें हैं, को कॉमिक्स पढने की आदत डाल रहे हैंI

हो सकता है किसी दौर में हमारी किताबों में, अलमारियों में छुपी रहने वाली प्रिंट कॉमिक्स आने वाले वक़्त में छपना ही बंद हो जाये,  लेकिन ‘कॉमिक्स’ लौट रही हैं और उनका भविष्य पहले से ज्यादा उज्जवल हैI