Labels

Thursday, 12 November 2015

कॉमिक्स का इतिहास-गुज़र गए वो कॉमिक्स वाले दिन

90 के दशक में अगर आपका बचपना बीता है तो आप कॉमिक्स की दुनिया से जरुर वाकिफ होंगे। आजकल बच्चे अपनी गर्मियों की छुट्टियां आईपॉड और मोबाइल फोन के साथ बिताते हैं लेकिन 90 के दशक में आईपॉड किस चिड़िया का नाम है हम जानते भी नहीं थे।
ऐसे में गर्मियों की शाम तो खेलकूद कर निकल जाती थी लेकिन दिन काटना मुश्किल होता था। तो बस ऐसे वक्त में साथ दिया 'कॉमिक्स' ने। हम यहां आपको कॉमिक्स का इतिहास याद नहीं दिलाने वाले हैं। बस हमारी कोशिश है कि इन कॉमिक्स के जरिए थोड़ी देर के लिए ही सही आप अपने बचपन की सैर कर आएं। 
गर्मी की छुट्टियों के वो दिन याद हैं न जब हम कॉमिक्स खरीदने की जिद्द किया करते थे। अखबार वाले से कहकर महीने में एक बार या 15 दिनों में आने वाली कॉमिक्स का इंतजार करते थे और जैसे ही कॉमिक्स आती थी अगले दिन ही उसे पढ़कर चट कर जाते थे। यहां तक कि दुकानों से किराए पर कॉमिक्स खरीदकर भी पढ़ते थे।

धीरे-धीरे समय के साथ विडियो गेम और कम्प्यूटर गेम्स का आविष्कार होता गया और अब बच्चे कॉमिक्स कि दुनिया से दूसरी तरफ मुड़ने लगे। अब कॉमिक्स का बाजार भी धीरे-धीरे कम हो रहा है क्योंकि इसके खरीददार कम होते जा रहे हैं। 
पिछले साल हुई नीलामी में इंद्रजाल कॉमिक्स की पहली कॉमिक्स फ़ैंटम 1, 2, 3 की बोली कुल एक लाख रुपए लगाई गई। विश्लेषक हिंदी कॉमिक्स के प्रति लोगों के कम होते रुझान की वजह निम्नस्तरीय कहानियों और चित्रांकन बताते हैं। इसके साथ ही बाजार में बच्चों के मनोरंजन के लिए टीवी, वीडियो गेम वगैरह जैसे नए विकल्प होने की वजह से  90 के दशक के दूसरे हिस्से से ज्यादातर कॉमिक्स प्रकाशन बंद होते गए। इसके अलावा काग़ज़ और छपाई की बढ़ती कीमतों के चलते भी कई लोकप्रिय प्रकाशकों को अपनी प्रेस बंद करनी पड़ी।आज हम आपको भारत में हिंदी कॉमिक्स के इतिहास के बारे में बताते हैं-अंग्रेजी पात्रों के हिंदी अनुवाद से हुई थी शुरुआत 










भारत में कॉमिक्स प्रकाशन की शुरुआत देखें तो शुरू के वर्षों में हमें विदेशों के ही कॉमिक्स पात्रों के कॉमिक्स को हिन्दी में अनुवादित करके प्रकाशित करने का रिकॉर्ड मिलता है, जिसमें सर्वप्रथम नाम आता है ‘इंद्रजाल कॉमिक्स’ का जिसने 1964 में ‘ द फैंटम्स बेल्ट’ के नाम से महान कॉमिक्स लेखक और चित्रकार ली फॉक के प्रसिद्ध पात्र फैन्टम की कॉमिक्स प्रकाशित की थी।इसमें एक कॉमिक्स 28 पेज की होती थी और दाम 60 पैसे होते थे। इस तरह साल 1966 में प्रथम हिन्दी कॉमिक्स ‘वेताल की मेखला’ प्रकाशित हुई जो कि ‘द फैंटम्स बेल्ट’ का ही हिन्दी अनुवाद थी। इंद्रजाल कॉमिक्स में केवल कुछ ही मूल हिन्दी पात्रों की कहानियाँ प्रकाशित हुईं जिसमें बहादुर (प्रथम प्रकाशन वर्ष 1981) प्रमुख है। indrajal all character comics के लिए इमेज परिणाम
70 में आए ‘चाचा चौधरी’:-
इसके बाद साठ के दशक मे अमर चित्र कथा प्रकाशन का जन्म हुआ जिसमें पौराणिक कथाओं का जिक्र होता था। 1969 में लोटपोट पत्रिका से प्रकाशित की गई जिसमें सबसे पहले मशहूर कार्टूनिस्ट प्राण ने 1971 में चाचा चौधरी का पर्दापण किया था। 60 के दशक में कॉमिक्स भले ही भारत में आई हो लेकिन बच्चों में इसका क्रेज 70 के दशक हुआ था। इस दौरान कई नए प्रकाशक आए जिनमें डायमंड कॉमिक्स, मधु मुस्कान, आदर्श चित्र कथा, गोवरसंस कॉमिक्स प्रमुख हैं। इस दशक में ही कार्टूनिस्ट प्राण ने चाचा चौधरी, श्रीमती जी, पिंकू, बिल्लू और रमन जैसे किरदारों को जन्म दिया। 

80 के दशक में किरदारों का हुआ जन्म:-अस्सी के दशक में स्टार कॉमिक्स, चंदा मामा और चित्रभारती कथा माला जैसे नए प्रकाशक आए। वहीं अस्सी के दूसरे हिस्से में मनोज कॉमिक, तुलसी कॉमिक्स, राधा कॉमिक्स, पवन कॉमिक्स, नीलम चित्रकथा और राज कॉमिक्स जैसे और भी प्रकाशक आए। अब कहानियों के साथ किरदार भी बनने लगे। मनोज कॉमिक्स के पास राम रहीम (बाल जासूसों की जोड़ी), हवलदार बहादुर, महाबली शेरा और क्रूक्बांड जैसे किरदार थे और राज कॉमिक्स ने परमाणु, बांकेलाल, नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव जैसे किरदारों को बच्चों के समक्ष पेश किया। 
manoj  comics all character के लिए इमेज परिणाम


इस तरह होने लगा कॉमिक्स का अंत:-
अस्सी के दशक में प्रकाशकों की भरमार की वजह से पाठकों को अच्छी कहानी नहीं मिलती थी। नतीजा 90 के दशक के दूसरे हिस्से से ज्यादातर प्रकाशन बंद होने लगे। केवल कुछ ही प्रकाशन कॉमिक्स प्रकाशित कर रहे थे जिनमे राज कॉमिक्स, तुलसी कॉमिक्स, मनोज कॉमिक्स, डायमंड कॉमिक्स और अमर चित्र व प्रमुख थे। इसके बाद इनमें से राज और डायमंड कॉमिक्स ही बचे जिनकी अब कॉमिक्सों की संख्या में कमी आई है। कॉमिक्स के सामने एक बड़ी दुविधा पायरेसी की भी है।

Sunday, 22 January 2012

तुलसी कॉमिक्स प्रकाशक का इतिहास

तुलसी काॅमिक्स विगत 80, 90 एव 2000 के प्रारंभ की एक भारतीय काॅमिक्स प्रकाशक कंपनी थी, जो पहले तुलसी पाॅकेट बुक्स का भाग हुआ करती थी।अपने तुलसी पाॅकेट बुक्स के गुजरे दिनों में, यह भारत में हिंदी उपन्यास की लोकप्रिय प्रकाशन कंपनी हुआ करती थी और जिसने व्यापक स्तर पर अपने उपन्यास पाठकों का वर्ग तैयार कर लिया था, हालाँकि तुलसी काॅमिक्स अपने निम्न दर्जे की कहानियों के कारणों से कभी उच्च स्तर की सफलता हासिल ना कर सका, जैसा अन्य कंपनी जैसे डायमंड काॅमिक्स, राज काॅमिक्स एवं मनोज काॅमिक्स ने अपने मानकों को स्थापित कराया और इस वजह से सन् 2004 तक कंपनी बंद हुई।
वहीं तुलसी काॅमिक्स की असफलता का दूसरा कारण अपनी ही निर्मित कहानियों को 2-3 भागों में प्रस्तुत करना रहा है, और अधिकांश एकल अंक की कहानियाँ भी वे पूरी नहीं करते। वहीं उन दिनों के पाठकों में, जिनमें अधिकतर बाल वर्ग के थे उनकी जेबखर्ची भी बेहद सीमित होती थी, और लगभग इसी के उलट असर से, पाठक वर्गों के बीच अपनी लोकप्रियता खोने लगी थी। [citation needed] हालाँकि अब तक की सबसे लंबी कहानियों के तौर पर जम्बू श्रंखला की काॅमिक्सें काफी वर्षों तक चली थी।
हालाँकि इस पूरी सिरिज में तुलसी की सृजनात्मकता देखने को मिली करती थी, [citation needed] इस सिरिज ने एक लंबी पारी भी खेली, जहाँ हमें कई नए किरदारों से परिचय कराया गया जैसे योशो (तब पूर्व में उन्हें ओशो की भांति प्रस्तुत किया जाता था), योगा, बाज़ और मि. इंडिया को उनकी मृत्यु तक दिखाया गया। नए किरदार कहने को बहुत रूचिकर नहीं बनाए गए थे और पुराने किरदारों पर लगभग विभिन्न भागों की कहानियाँ जारी रही।[citation needed] तुलसी काॅमिक्स के किरदारों में जम्बू बहुत सफल रहा था, कमोबेश उनके रचियता वेद प्रकाश शर्मा ने, अंगारा तथा तौसी की भी रचना की।
तुलसी काॅमिक्स मासिक तौर पर अपनी काॅमिक्स प्रकाशित करती थी। हर माह ६ से १० तक गिनती की काॅमिक्से पहले प्रकाशित हुआ करती थी (कभी कभार १ या २ डाइजेस्ट जैसे विशेषांक भी प्रकाशित हुआ करती थी।) तब अंगारा, तौसी तथा जम्बू उस दौरान प्रकाशन के तीन प्रमुख नायक हुआ करते थे। उनमें से कई काॅमिक्स काफी लोकप्रिय भी रही जैसे जम्बू और अंगारा का युद्ध जम्बू और तौसी, मर गया जम्बू, एवं जम्बू के बेटे।

चरित्र

  • अंगारा – एक विलक्षण बुद्धिजीवी जिसमें गुरिल्ला, लोमड़ी, हाथी, गैंडा, गिद्ध और शेर के विशेषांग से प्रत्यारोपित कर बनाया गया हैं, जो मानव की तरह दिखता है।
  • तौसी – एक इच्छाधारी सर्पमानव। जिसे नागलोक का राजा बताया जाता (नागों की वह दुनिया जहाँ वे मानव रूप में निवास करते), जोकि धरती के गर्भ यानी पाताल लोक में स्थित है। वह समय समय पर धरती पर भी अवतरित करने भी आता है।
  • जम्बू – एक बेहद बुद्धिमान रोबोट, जिसके रचियता वैज्ञानिक डाॅ. भावा ने स्वयं का ही मस्तिष्क उसमें प्रत्यारोपित कराया। तुलसी काॅमिक्स का एक बहुत ही लोकप्रिय काॅमिक्स पात्र।
  • योशो – एक बेहद उग्र महानायक, जो अपने पिता की खोज में धरती पर आता है।
  • योगा – एक सामान्य मानव जो अपनी योगिक शक्तियों के बल पर महानायक बनता है।
  • बाज़ – एक सामान्य मनुष्य जो संयोगवश प्रेतों के राजकुमार भांति दिखने कारण, उसे राजकुमार की पोशाक दी जाती है, जिसकी अलौकिक शक्तियों का उपयोग वह अपराध के विरुद्ध करता है।
  • मि. इंडिया – एक उपनायक जिसे 5 वैज्ञानिकों के सम्मिलित प्रयासों से एक महाशक्तियाँ प्रदान होती है।
  • शालू-कालू – एक मजेदार लड़के-लड़की की जोड़ी। तुलसी काॅमिक्स की पहली सिरिज जिसमें व्यंग्यता देखने को मिली।
  • डिटेक्टिव भारत – एक डिटेक्टिव/गुप्तचर जो अपने मित्र जादूगर गोगलापाशा की सहायता से आपराधिक मामलों को सुलझाता है। अपनी पहली काॅमिक्स में वह जादूगर गोगलापाशा की मदद कर अपना दोस्त बना लेता है।[5]
  • महाबली आकाश/मेजर राजेश – एक नकाबधारी क्राइमफाइटर।
अन्य प्रकाशित नियमित किरदार - तुलसी काॅमिक्स द्वारा कई राजा-रानियों, राजकुमारों-राजकुमारियों, राक्षसों-दानवों-भूत प्रेतों तथा नैतिक मूल्यों को लेकल भी कहानियाँ प्रकाशित की हैं। वहीं उन्होंने काॅमिक्स शैली में कई हिंदी बाॅलीवुड फ़िल्मों की कहानियों पर आधारित प्रकाशन भी किया। मूल किरदारों की कमी के चलते, तथा आधे से भी कम काॅमिक्सों के प्रकाशन से अपना विस्तार देने में असफल रही।