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Thursday, 19 August 2021

सोमिल आर्य की कलम से -1

  कष्टहर्ता :- 💜

            💚



अफगानिस्तान के गंभीर हालात देखकर ध्रुव वहां जाने का निर्णय लेता है।

करीम - कैप्टन, क्या वहां जाना सही रहेगा क्योंकि अब तक किसी भी देश ने उनकी तरफ मदद का हाथ नहीं बढ़ाया है। "

ध्रुव - कोई देश मदद को आगे आए ना आए, यह मेरा कर्तव्य है कि वहां जाकर मानवता की रक्षा करू, क्योंकि हमारा कर्म हमारे धर्म से बड़ा होता है।

और मेरा कर्म यही कहता है कि जो मुसीबत में हो उसकी रक्षा करना सर्वोपरि है तभी हम लोग सही मायने में मानव कहलाएंगे।"

रेणु - ठीक है कैप्टन, अगर आपने जाने की ठान ही ली है तो हमें भी अपने साथ ले चलिए।"

ध्रुव - नहीं रेणु, मै वहां तुम लोगो की जान खतरे में नहीं डाल सकता। इस विपदा से मुझे स्वयं निपटना होगा।"

शीघ्र ही ध्रुव अपने स्टार कॉप्टर में बैठकर अफगानिस्तान के लिए रवाना हो जाता है। अफगानिस्तान पहुंचते ही ध्रुव का मुसीबतों से सामना होना शुरू हो गया था।

अपना स्टार कॉप्टर काबुल में उतारते ही तालिबानी लड़ाके उसके ऊपर टूट लड़ते है और फायरिंग करनी शुरू कर देते है।

ध्रुव की किसी मानव की जान ना लेने की कसम आज उसे भारी पड़ने वाली थी।

मगर आज ध्रुव किसी को भी बख्शने के मूड में बिल्कुल नहीं था।

उसके मन में तालिबानों के प्रति नफरत इतनी प्रचंड थी कि आज सभी उस आग में झुलसने वाले थे।

करीब 400 लड़ाके ध्रुव के ऊपर टूट पड़े।

उनकी बंदूके तो ध्रुव का कुछ बिगाड़ नहीं पाई तो उन्होंने उसे जिंदा पकड़ने की ठान ली ताकि उसे अपने तालिबानी आका ' अबू बकर अल असद' के सामने पेश कर सके।

परन्तु जिस तरह आज ध्रुव के हाथ पैर तालिबानों के अंगो का नक्शा बिगाड़ रहे थे उससे लगता नहीं था कि ध्रुव उनके काबू में आएगा।

हालांकि ध्रुव में इच्छाशक्ति और साहस की कोई कमी तो ना थी,

परन्तु था तो वो सिर्फ एक मानव ही ना।

उससे जितना हो सका वोह लड़ा, उनके लिए जो खुद अपने लिए नहीं लड़ सके।

कुछ ही देर में ध्रुव अपनी इच्छाशक्ति, साहस और एकमात्र हथियार स्टार ब्लेड्स की मदद से उस स्थान को तालिबानों की लाशों से भर देता है। परंतु इतना लड़ते लड़ते अब उसकी इच्छाशक्ति भी जवाब दे रही थी, हालांकि उसके अंदर इस चीज की कोई कमी तो ना थी मगर उसके जख्मों से गिरते हुए खून ने उसे अत्याधिक कमजोर कर दिया था।

मैदान साफ हो चुका था। ऐसा ध्रुव को लगा इसीलिए वोह थोड़ा निश्चिंत हो गया था।

मगर तभी 2500 तालिबानों की फौज ने अचानक से धावा बोल दिया और ध्रुव को धोखे से बंदी बना लिया।

       :----:

 स्थान - पुल - ए - खिस्ती बाजार, कुंदुज, अफगानिस्तान।

"जहां एक समय इस बाज़ार में अफ़ग़ानिस्तान की लगभग सभी वस्तुएं मिला करती थी आज वहां गुलाम औरतों की खरीद फरोख्त चल रही है।

अफ़ग़ानिस्तान के लगभग सभी पुरुष अपने बीवी और बच्चों को यही छोड़कर देश से निकलने की फिराक में लगे हुए है। कैसे मतलबी लोग है जो अपने ही परिवार को काल व अपमान का ग्रास बनने के लिए छोड़ गए।

मै कभी ना आता ऐसे लोगो की मदद के लिए जो इतने स्वार्थी हो पर मुझसे वो टीस भी नहीं देखी गई जो यहां की औरतों और बच्चो के दिल से सिसक सिसक कर उठ रही थी।

निर्बलों पे होने वाले अत्याचार को रोकने और अत्याचारियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए ही तो सूरज डोगा बना है।"

 डोगा एक लबादा ओढ़े बाज़ार में प्रविष्ट होता है और तालिबानी इससे बेखबर थे।

वे तो बस इस समय लुफ्त उठाने में मग्न थे, अपनी अमानवीय कृत्यों का जो वो वंहा की महिलाओं को दे रहे थे।

"अफ़ग़ानिस्तान से भागते हुए सभी पुरुष दिख रहे हैं जो अपनी स्त्रियों और बच्चों को तालिबानी लड़ाकों के लिए छोड़ कर भाग रहे हैं। 

अपनी छोटी छोटी बच्चियों को उन दरिंदों को सौंप कर अपनी जान बचा कर भाग रहे हैं । 

सोच कर कलेजा मुँह को आ जाता है।  

यह कृत्य एकमात्र उनके संकीर्ण विचारधारा की देन है जिसमें स्त्रियों को एक 'सेक्स ऑब्जेक्ट '  के अलावा कुछ नहीं माना जाता। ये लोग लड़कियों और औरतों को अपनी हवस का शिकार बनाकर कई दिनों तक अमानवीय यातनाएं देने के बाद सेक्स स्लेव बनाकर बेच देते है। लानत है ऐसे लोगो पे जो सिर्फ अपने बारे में सोचते है और इन लोगो पे भी जो स्त्रियों को सिर्फ भोग - क्षुदा शांत करने के लायक समझते है।

एक हमारा इतिहास उठा लीजिए , हमारे सिर कट गए हैं लेकिन हमने अपनी स्त्रियों की मर्यादा की रक्षा के लिए महाभारत कर दिया था और समुद्र तक पर पुल बाँध दिया था ।

लाखों क्षत्रियों ने सिर्फ अपनी ही नहीं , हर वर्ग की स्त्रियों की रक्षा के लिए धड़ाधड़ शीश काट दिए या तो कटा लिए लेकिन अपनी स्त्रियों की रक्षा से कोई समझौता नहीं किया।

और आज डोगा भी यहां समझौता करने के मूड में बिल्कुल भी नहीं है।"

 डोगा एक कोठी के सामने जा पहुंचता है और कोठी के दरवाजे को जोर से लात मारकर तोड़ देता है।

अंदर औरतों व नाबालिग बच्चियों के साथ हो रहे हैवानियत का मंजर देखकर डोगा की आंखो में खून उतर आता है।

तुरंत अपनी AK96 उतार कर आतंकियों को भूनने में लग जाता है डोगा और कहता है कि " तुम हैवानों ने हैवानियत की सारी हदें लांघ दी है। आज डोगा तुम लोगो को सिर्फ तुम्हारी हदों का अहसास ही नहीं करवाएगा बल्कि तुम लोगो को मौत का वोह नंगा नाच दिखाएगा कि तुम लोगो की जन्नत में 72 हूरो से मिलने की तमन्ना भी दया की भीख मांगेगी।"

डोगा की लगातार बरसती गोलियां, आतंकियों से सिर से उनके भेजे को फाड़ते हुए निकल रही थी।

डोगा - "आज ये कुत्ता तुम सियारो का, शेर होने के भ्रम का स्तंभ उखाड़ फेंकेगा और फाड़ खाएगा तुम्हारी चर्बियों को और नेस्तनाबूद कर देगा तुम्हारे अस्तित्व को।"

आज वाकई में डोगा के क्रोध का लावा, ज्वालामुखी बन कर फूंट पड़ा था।

गोलियों से, चाकू से, तलवारों से, हाथों से।

आज डोगा हर हथियार का प्रयोग कर रहा है।

वोह एक अपराध विनाशक होने साथ साथ एक कुशल लड़ाका भी है। आज उसकी इसी डेडली फाइटिंग स्किल्स से कई आतंकियों को 72 हूरे नसीब हो चुकी थी।

कोठी के समस्त आतंकियों को निपटाने के बाद, डोगा ने वहां की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि " हर बार आप लोगो को मुसीबतों से बचाने कोई नहीं आएगा। अपने हक की लड़ाई आपको खुद ही लड़नी होगी। पुरुषों के भरोसे रहना या अपने आपको उनसे कम समझना बेवकूफी है। माना कि आप लोगो में उन दरिंदो जैसी शारीरिक शक्ति ना सही परन्तु साहस उनसे ज्यादा दिखाना पड़ेगा। एक बात याद रखो, हाथ नहीं हथियार सही। बस अंदर हिम्मत का ज्वालामुखी होना चाहिए।"

इसी के साथ डोगा वहां से बाहर निकल आता है मगर बाहर भी करीब 1500 आतंक के रहनुमा उसका इंतज़ार कर रहे थे।

तालिबानी - "ख़तम कर दो इस कुत्ते सी सूरत वाले काफिर को। आज अल्लाह मेहरबान है जो काफिरों की मौत हमारे हाथों लिखी है"

डोगा - "मुझे ख़तम करने में तेरी पुश्ते फना हो जाएंगी फिर भी ये कुत्ता तुम जैसे गीदड़ो को भमभोड़ने के लिए खड़ा रहेगा।"

तत्पश्चात डोगा अपने बेल्ट से ग्रेनेड निकाल कर आतंकवादियों की और फेकने लगता है और जगह जगह से तालिबानों के चीथड़े उड़ने शुरू हो जाते है। चारो तरफ से गोलियों की तड़तड़ाहट शुरू हो जाती है। अधिकतर गोलियों का निशाना डोगा ही था परन्तु वोह महारथी ही क्या जो अर्जुन की तरह चक्रव्यूह को भेद ना पाए।

डोगा उन सभी गोलियों को फूर्ति से डौज कर रहा था और बंदूकों और ग्रेनेड से आतंकवादियों को खत्म करता जा रहा था।

यकीनन आज वोह उस जगह से आतंकवाद का वजूद ही ख़तम कर देता परन्तु होनी को कुछ और ही मंजूर था। 

डोगा एक रॉकेट लॉन्चर के रॉकेट के विस्फोट की चपेट में आ जाने से पल भर के लिए ही सही, मूर्छित हो गया।

तालिबानी भीड़ ( चिल्लाते हुए ) - कत्ल कर डालो इसे....."

"रुको" एक आतंकी हाथ उठाकर उन्हें रोकता है और कहता है कि " इस काफिर ने हमारे कई भाइयों को बेदर्दी से मौत दी है। इसे इतनी आसान मौत नहीं मिलनी चाहिए। बंदी बना लो इसे भी। इसे और उस कमांडो वाले छोकरे को एक साथ पूरी दुनिया के सामने मीडिया की लाइव कवरेज में कत्ल करेंगे, ताकि कभी किसी और काफिर की हिम्मत ना हो हमारे नेक इरादों के रास्तों में रोड़ा बनने की" 

      :-------------:

जगह - गाजी अमानुल्लाह इंटरनैशनल क्रिकेट स्टेडियम , जलालाबाद।

समय - शाम से 5:30 pm 

आज न्यूज - ए - तालिबान की मीडिया पूरी तरह से तैयार थी डोगा और ध्रुव की मौत का लाइव कवरेज कवर करने के लिए और तैयार था खुद आका - ए - तालिबान ' अबू बकर अल असद ज़ैदी'

उन्हें मौत देने के लिए।

करीब 14000 तालिबानी आतंकियों से लबरेज़ थी वोह जगह और मैदान में थे ध्रुव, डोगा और आका - ए - तालिबान।

असद ज़ैदी - "तुम दोनों काफिर कौन हो अच्छी तरह से जानता हूं मगर तुम लोग यहां चले आओगे इसकी उम्मीद ना थी हमें।

तुम काफिर कितने ही बड़े तुर्रम खां क्यों ना हो, हमें हमारे जिहाद की राह से डिगा नहीं पाओगे।

अरे जिहाद तो अल्लाह का फरमान है और हमारी चाहत बस उस फरमान को पूरा करने में है।

और जो भी काफिर हमारे नेक रास्ते में आएगा, फना हो जायेगा। 

अरे अभी तो हम जिहादियों को ' खुरासान ' से निकलकर पूरा हिन्द फतह करना है।

इंशाअल्लाह वो दिन भी जल्द ही आएगा जब पूरी दुनिया पे हुकूमत सिर्फ हमारी होगी।

तुम दोनों काफिरों की मौत की मिसाल कायम करेंगे हम, मगर उससे पहले कुछ दिखाना ज़रूर चाहेंगे हम तुम दोनों को।

फजर, ले आओ उन बांदियो को, जिन्हें देख ये यहां उन्हें बचाने आए थे। आज इन्हीं के सामने बेआबरू करूंगा सभी बांदियों को।

तालिबानी आतंकी सभी हदें पार करते हुए औरतों को खींचते हुए सरे राह उन्हें बेआबरू करने लगे।

उन लोगो ने आतंकियों से रहम की भीख मांगी मगर उन दरिंदो की आखों में बस दरिंदगी ही नजर आ रही थी। हैवानियत का मैल उनके कानों में जम सा गया था जिसके आगे उन मासूम लड़कियों और औरतों की करुण वेदनाएं भी उनकी अंतरात्मा को झकझोड़ नहीं पा रही थी। 

डोगा और ध्रुव भी बेबसी के मारे अपने होठों को भींचे हुए थे और आंखो में उन्हें इस अमानवीय कृत्य से ना बचा पाने का अपराधबोध आंसू बन के निकल रहा था।

शायद उन्हें बचाने वाला कोई नहीं था।

या शायद था ?

अचानक से उस स्टेडियम में धमाका हुआ।

असद ज़ैदी चौंका कि ये क्या हुआ ? किसने किया ?

नज़रे उठा के देखी तो एक शख्स स्याह बादलों को चीरता हुआ मजलूमों की उम्मीद बनके चला आ रहा था।

उसकी आंखो से विष ज्वाला की लपटे निकल रही थी और मुंह से स्याह हरा धुआं आतंकवाद को खाक में मिलाने के लिए निकल रहा था।

हां आतंकहर्ता ही था वो जो उनकी पुकार को नकार ना सका।

और उस काल को हरने महाकाल आ गया था।

अब तांडव होना तय था।

"अरे, ये तो नागराज है, हमारे नेक इरादों का सबसे बड़ा दुश्मन। मगर ये तो मर गया था, खबीस की औलाद है ये फिर से जिंदा कैसे हो गया। मगर जिंदा हो भी गया है तो दोबारा मरेगा।

हमारी इस अकूत फौज के आगे नहीं टिकेगा एक अकेला शैतान।

मार डालो इसे।"

नागराज - "असद ज़ैदी, नागराज कोई अबला नहीं, जिसे तेरे तालिबानी दरिंदे अपनी बर्बरता का शिकार बना ले,

नागराज को फना करने का ख्वाब देखने वाले, तेरी हस्ती फना हो जाएगी, मेरी हस्ती को मिटाते - मिटाते।

नागराज की कलाइयों से अनगिनत सांप निकालने लगे और सर्प रस्सी बनकर स्टेडियम के उन मेटल ग्रिल से लिपट गए जो स्टेडियम को सहारा दिए हुए थे।

और नागराज ने वक़्त ना बर्बाद करते हुए तुरंत अपनी सर्प रस्सी खींच डाली जिसके फलस्वरूप पूरा स्टेडियम भड़भड़ा कर ढह गया और उसमेए बैठे हज़ारों के हिसाब से आतंकवादी मारे गए।

असद ज़ैदी - ( चिल्लाते हुए ) "या अल्लाह, यह काफिर तो कहर ढा रहा है।"

नागराज - "आज तुम लोगो को आतंकहर्ता का वो कहर दिखाऊंगा जिसे देखकर तुम लोगो की रूहे भी सरसरा जाएंगी

बर्बरता का वो नज़ारा दिखाऊंगा, जिसे देखकर तुम लोगो की सम्मिलित बर्बरता भी अदनी सी मालूम चलेगी।"

और वाकई में, आज आतंकहर्ता ने आतंकवाद को समूल नाश करने की जिद ठान ली थी।

नागराज के हाथ से ध्वंसक सर्प निकाल हर जगह तालिबानों में तबाही मचा रहे थे।

आज मौत का वो तांडव हो रहा था जिसे देखकर अगर यमराज भी आते तो उन्हें भी मौत का भय हो जाता और अपने कदम पीछे खींच लेते।

बर्बरता का जो मंजर उस हुजूम को दिखाया जा रहा था कि सभी में एक देहशत सी भर गई।

नागराज के तीव्र विष से आतंकियों के शरीर कोढ़ के जैसे गल रहे थे और कुछ को तो अपने नंगे हाथों से फाड़े दे रहा था वो आतंकहर्ता।

ना जाने कितने ही आतंकियों को नागफनी सर्पो से मक्खन के जैसे काटता चला गया वह।

यकीनन उसने जो किया वो तांडव ही था, मौत का तांडव।

उसके आगमन ने डोगा और ध्रुव के अंदर के हौसले को जगा दिया था अतः उन दोनों ने भी अपने बंधन तोड़ डाले और लड़ाई में नागराज का साथ देने लगे।

शीघ्र ही तीनों ने उस जगह को तालिबानों की लाशों से भर दिया और अबू बकर अल असद ज़ैदी भी नागराज के हाथों मारा गया।

      :- समाप्त -:

Saturday, 17 July 2021

हिंदी कॉमिक्स में सबसे ज्यादा हंसाने वाला करैक्टर

सभी कॉमिक्स प्रेमियों को मेरा राम राम .
आज मैं DISCUSS करने वाला हु आल हिंदी पब्लिकेशन कॉमिक्स में कोनसा करैक्टर ने हम सभी को हंसाया है ,उसका नाम है हवलदार बहादुर ,जिसका असली नाम बंटी है.इस हीरो को मेरी तरफ से हास्य पुरस्कार मिलना चाहिए 

वैसे तो बहुत से करैक्टर है ,जिसमे बांकेलाल ,पिंकी,पलटू,चाचा चौधरी ,बिल्लू ,मशीनी लाल अफीमी लाल ,शिकारी शम्बू ,क्रुक बांड ,मोटू पतलू ,छोटू लम्बू  जैसे आते है,लेकिन इन सभी की कॉमिक्स पढने पर उनकी कॉमेडी असली नहीं लगती और उनकी स्क्रिप्ट में जबरदस्ती हंसाने वाली लिखी गयी है जो थोडा अजीब लगता है,लेकिन हवलदार में हंसाने के लिए देसी भाषा का प्रयोग किया गया है,जो इनको सबसे अलग करता है.जैसे की टूठा ,रगड़ना ,तसरीफ ,चपत ,पैनी नाक आदि का .☺☺☺☺☺☺☺☺☺☺☺☺☺☺ 

Monday, 14 June 2021

बृजमोहन की कलम से

 एक भाई ने पूछा था, ध्रुव की कोमिक्सों से हमने नया क्या सीखा-



Here's my reply-


अल्ट्रासोनिक साउंड, ग्लाइडर, रोप वे, वैज्ञानिक (बिहेमथ ऑफ हिन्दी कॉमिक्स इंडस्ट्रीज, नन अदर दैन-आवाज की तबाही)

रेडियो एक्टिविटी (वैम्पायर)

पाश्चुराइजेशन (मैंने मारा ध्रुव को)

जीरो ग्रेविटी (षड्यंत्र)

वायब्रेशन्स, एसिड इफैक्ट (सुप्रीमा)

भू गर्भीय जलस्तर (दलदल)

रेडिएटर, राशियों के बारे में (हत्यारी राशियां)

डायनोसोर, जुरासिक काल, मानव का विकास (महामानव)

स्वप्न विज्ञान, ऊष्मीय प्रभाव (सामरी की ज्वाला)

प्रकाशीय प्रभाव (अंधी मौत)

सॉफ्ट ड्रिंक्स नेचर, क्रोध को नियंत्रित करना, कह के लेना (अतीत)

नानचाक (चण्डकाल की वापसी)

पेड़ों में जीवन और सम्वेदना (विनाश के वृक्ष)

कृत्रिम अंगों का यांत्रिक प्रभाव, यूएफओ, भविष्य पर आधारित विज्ञान कथा (उड़नतश्तरी के बंधक)

मोर्स कोड (स्वर्ग की तबाही)

ईल मछली, एक्वेरियम (रोबो का प्रतिशोध)


लम्बी लिस्ट है। बाकी कोमिक्सों में भी बहुत कुछ सीखा


पार्कर, बेमिसाल तर्क क्षमता, बेजोड़ साहस और पीक माइंड कैपेबिलिटी (सुपर कमांडो ध्रुव की सभी कॉमिक्स)

राहुल दुबे भाई जी के द्वारा कुछ COLOURING इमेज

 







Friday, 16 April 2021

जय किशोर की कलम से

 मित्रों,(मोदीजी वाला नहीं ही ही ही)


अभी किसी ग्रुप में जा घुसा था। वहां कुछ जबरदस्ती के इंटलेक्चुअल्स  बंदे बोल रहे थे कि कॉमिक्स किसी केरेक्टर के साथ भेदभाव नहीं करती। दरअसल वो ध्रुव और नागराज की बात कर रहे थे। उनका कहना था कि नागराज के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ। जो कुछ भी हुआ बिल्कुल निष्पक्षता के साथ हुआ। कॉमिक्स बनाने कालों के लिए तो सभी कैरेक्टर समान होते है। वो क्यों किसी के साथ भेदभाव करेंगे। जो स्टोरी की डिमांड होती है उसी हिसाब से कैरेक्टर के रोल सेट किये जाते हैं। इस पूरी बकवास का मतलब था कि वो ध्रुव को नागराज पर तरजीह दिए जाने को जस्टिफाई कर रहे थे। उनके मुताबिक जो कुछ भी नागराज के साथ हुआ और ध्रुव को जो हाइप मिली वो ध्रुव डिजर्व करता था। लेखक ने कोई भेदभाव नहीं किया। उन बंदों के मुताबिक ये सब हालात अपनाए जाने लायक है। तो अब पूरी डिटेल के साथ ये बताना जरूरी है कि नागराज क्या था और उसके साथ क्या किया गया!?

कैसे पक्षपात करके नागराज जैसे नम्बर वन सुपर हीरो को दोयम दर्जे का साइड हीरो बनाया गया।??


तो उन लोगों को बता दिया जाए कि नागराज को जानने के लिए पहले ' नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव', तथा ' नागराज और बुगाकु' का ध्यान से अध्ययन करें। 

जो नागराज ध्रुव के बड़े भाई की भूमिका में था उसे हर बार पिटवा कर ध्रुव के पीछे खड़ा करने का भरपूर प्रयास किया गया।

अब आती है बात पक्षपात की तो इसके लिए प्रलय, विनाश, राजनगर की तबाही, संहार, विध्वंस, परकाले पढ़े। 

जी न भरे तो ' नागाधीश' , 'वर्तमान', 'सम्राट' और 'सौडांगी' जैसे हृदय विदारक विशेषांक पढ़े। (ये सलाह नागराज के हार्ड कोर फेन्स के लिए नहीं है!!कहीं वो कॉमिक्स फाड़ न डालें!!)

पक्षपात की हदें पार करते ये पक्षपात पूर्ण कॉमिक्स पढ़ने पर आपको पता चलेगा कि किस तरह नागराज को पीछे धकेला गया और अपने मानस पुत्र को जी भर के तरजीह दी गयी।

कुछ उदाहरण देखिए....

1. नागराज के सारे राज़ ध्रुव जानता है।


2. नागराज के अलावा नागद्वीप के बारे में सिर्फ ध्रुव जनता है लेकिन स्वर्ण नगरी की भनक नागराज को कभी नहीं लगने दी गयी।(बाद में किसी नई कॉमिक दी गयी हो तो पता नहीं।) 🙄


3. कालदूत- जिसे हराने में नागराज के पसीने छूट गए उसे ध्रुव आसानी से परास्त कर देता है। लेकिन धनन्जय, किरिगी, ज़िंगालु को नागराज के हाथों कभी नहीं पिटवाया।


4. हर कॉमिक्स में अंत में नागराज गलत साबित किया जाता है और ध्रुव की नैतिक जीत बताई गई।


5. नागराज के दोस्त ध्रुव और ध्रुव के दोस्तों द्वारा परास्त होते रहते है या पोपट बनाये जाते हैं।


6. हर 2-in-1 या मल्टीस्टारर में पूरा नेतृत्व ध्रुव को दे दिया जाता है और बाकी हीरोज (नागराज सहित) मुंह ताकते रहते है।


7. वो नागराज जिसकी अपनी खुद की स्ट्रेटेजी होती थी... खुद का अपना तरीका होता था, वो अब ध्रुव के इशारों पर नाचने लगा।


8. नागराज को दोयम दर्जा देने के लिए उसे कमांडो फोर्स के बच्चों द्वारा बचाया गया, एक साइड हीरो बनाने के लिए सम्राट' और 'सौडांगी' जैसे कई कॉमिक्स बनाये गए। जिसमे नागराज सिर्फ के ताकतवर हेल्पर के अलावा कुछ नहीं होता।


अब इन सब बातों को वही समझ सकता है जिसने RC शुरू से पढ़ना शुरू की। जिन्होंने क्लासिक नागराज का वो aura देखा है। जिन लोगों ने शुरुआत ही कोहराम, प्रलय, विनाश जैसे कॉमिक्स से की वो ही उस घोर पक्षपात को उचित ठहरा सकते हैं। 


(यहाँ ये भी बता दूं कि मैं कोई ध्रुव विरोधी नहीं हूं, क्लासिक नागराज की तरह क्लासिक ध्रुव को भी उतना ही पसंद करता हूँ। लेकिन नागराज के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं। क्योंकि वो नम्बर 1 है और रहेगा।)


बस अंत में उन इंटलेक्चुअल्स के लिए एक ही पंक्ति लिखना चाहूंगा...


"कौन हैं ये लोग, कहाँ से आते हैं...."

MAHABALI SHAKA STICKER

 

 

Thursday, 15 April 2021

हिमांशु भाई की कलम से

 एक बात गौर किजिएगा! 


वो तो राज कॉमिक्स निरंतर बिकती रही, और लगातार नागराज और ध्रुव की कॉमिक्सो को प्रकाशित करती रही! तो Company इतने सालों तक Running में रही!हां वक्त के साथ किमतों में बदलाव होना लाजिमी है! ...... ये जो हम दुसरे कॉमिक्स के किरदारों को 300/400 रूपये एक कॉमिक्स के दे देते हैं!


 जैसे:-.हवलदार बहादुर/राम रहीम/क्रुकबाण्ड अन्य पब्लिकेशन के किरदारों के! ........ वजह ये हैं की वो कॉमिक्सो कंपनियां अब रनिंग में हैं नहीं! ...... और संख्या में कम हैं इसलिए किमत़ ज्यादा हैं! उनकी कहानियां भी राज कॉमिक्स के मुकाबले औसत ही रही हैं! (ऐसा मेरा मानना हैं) 


    जैसे चाचा चौधरी को बच्चा-बच्चा तक पहचानता हैं! वैसे ही नागराज और ध्रुव का क्रेज भी भारतीय कॉमिक्स जगत में, उतना ही रहा हैं... और हैं भी! 


    ध्रुव-नागराज की कहानियां इतनी बार प्रकाशित हुई इसलिए इतने लोगों की जुंबा पर वो नाम आ पाया! ...... मैं खुद कॉमिक्स के स्वर्णकाल मैं पैदा नहीं हुआ उम्र की बात अगर की जाए तो कोहराम कॉमिक्स जितनी उम्र हैं मेरी! (April 2000) 😊

    मेरा कॉमिक्स क्रेज़ आप सब भली भांति जानते होंगे, 2000 के बाद मनोरंजन के कईं साधन विकसित हुए कागज़ पर आने वाले किरदार 30-32 इंच के डब्बे(T.v.) पर स्वचालित होने लगें, तो पढने की ज़हमत कौन करें? रही सही कसर इस 5-7 इंच के डब्बे (मोबाइल) ने पुरी कर दी! खैर इसी डब्बे की वजह से हम सब यहां हैं और ये ग्रुप हैं और कॉमिक्स का मार्केट भी तभी हैं|     

    2000 के बाद मैं भी कॉमिक्स फैन/लवर/ सेलर/बायर/कलेक्टर/ जुनुनी जो समझो वो बना ही हूँ.......

 अरे सॉरी ब्लेक मार्केटिया लिखना तो भूल ही गया 😊! 

    वजह ये थी कि तब तक ये किरदार कॉमिक्स की दुनिया में बने रहे! उनकी पापुलैरिटी ने मुझे भी कॉमिक्स से जोड़ दिया! ..... इसलिए डायमंड कॉमिक्स का स्लोगन " 5 साल के बच्चों से लेकर 80 साल तक लोकप्रिय" ये फिट बैठता है! Rc भी हर उम्र के पाठकों को बांधे रखती हैं! 

    दुसरी कॉमिक्स के जो दाम आप 300-400 देते आ रहे, मैनें भी कईं कॉमिक्से इतने में ही बेची हैं! ..... इसलिए की वो गुमनाम किरदार हैं! ..... कॉमिक्स की दुनिया में सेलर और कलेक्टर के लिए "Rare" शब्द का मतलब हैं की गुमनाम किरदारों की कॉमिक्स जो प्रचलन में नहीं वो रेयर हैं! 

   एक बार खुद सोचिए, नागराज और ध्रुव इतनी बार प्रिंट नहीं होती तो उन कॉमिक्स का रेट आज़ क्या होता? ब्लेक मार्केट में वो कितने की बिकती? ........ उदाहरण के लिए "किरीगी का कहर" आज़ कितने में बिकती? 

  आज़ की तारिख में Comics की किमतों का आकलन उसका अप्रचलन और गुमनामी तय करती हैं, ना की अच्छी कहानी और अच्छे चित्र से परिपूर्ण होना! 

   किमत़ निर्धारित करना कंपनी की अपनी मर्जी हैं! जरूरी नहीं आप हर कॉमिक्स लें, कॉमिक्स अब मुलभत आवश्यकता की चीज़ तो हैं नहीं कि लेना जरुरी हैं! इस देश में कुछ लोगो को दो वक्त के लिए रोटी-पानी नसीब नहीं हैं! कॉमिक्स मनोरंजन का एक साधन हैं, अपर-मीडिल क्लास वाले लोगों का थपका हैं एक! (किराए का दौर समाप्त होने के बाद)

   जिन कंपनियों ने मेरा बचपन बनाया, में कोशिश करूंगा की उन कंपनियों या उनके किरदारों कि मैं किसी प्रकार की आलोचना ना करुं, और नकारात्मकता फैलाकर पाठको को दुर ना करुं, या कॉमिक्स प्रेमी को नागराज-ध्रुव के प्रंशसको में विभाजित ना करूँ! सबसे यही दरख्वास्त करता हूँ जिन्हें जो पसंद हो उनकी कॉमिक्स ले! 💐 बस नकारात्मकता से दूर रहें! 

नयी कॉमिक्स कंपनी "फिक्शन" के रेट पता होंगे आपको की क्या थें, उसे कभी कहानी से तोल कर देखा हैं? खैर! सबकी पसंद को नमन!💐

    Bargain अथार्त मौल भाव करना भारतीयों का धर्म हैं जरूऱ करें! आप कॉमिक्स को उसकी कहानी या उसके परिपूर्ण चित्र से उस कॉमिक्स को तोलें, ना की गुमनामी से! 💐 

    कॉमिक्स के कलेक्शन के इस शौक मैं मैनें बेकार कॉमिक्स की जो किमत़ अदा की हैं, तो नयी राज कॉमिक्स की किमतें सही है उस हिसाब से! बाके सबके अपने विचार हैं साहब!💐🙏 सबके विचारों का आदर अपनी जगह! 

   बस नकारात्मकता ना फैलाएं जो सही लगें वो कॉमिक्स लें! 

     आपका कॉमिक्स वाला दोस्त "हिमांशु" 😊🙏

Monday, 21 December 2020

भावपूर्ण श्रद्दांजलि

राज कॉमिक्स के जनक श्री राजकुमार गुप्ता जी को भावपूर्ण श्रद्दांजलि
कुछ मित्रों ने मुझे बताया की ये बेहद ही नरम और सरल हृदय के थे .

 

राज कॉमिक्स में महानायको के प्रिय भोजन


 

Monday, 30 November 2020

मनोज गुप्ता जी की कलम से

 प्री-बुकिंग वो धीमा जहर है, जो लगातार कामिक्स इंडस्ट्री को खोखला कर रहा है। कामिक्स के प्रति आपके जूनून और आपके कोमल भावनात्मक लगाव का शोषण है। आने वाले समय में किसी भी fraud का ये जन्मदाता सिध्द हो सकता है,इसे आदत मत बनाइये। प्री-बुकिंग के नाम पर आपकी गाढ़ी कमायी को जब पब्लिशर्स अपना हक समझने लगे,तो हालात बद् से बद्तर होते जाते हैं। पैसा जेब में आते ही काम करने की रफ्तार सुस्त हो जाती है। मानव स्वभाव है, कि वह उस काम को पहले करना चाहता है। जिसे करके पैसा मिलना है। जेब में आया पैसा टिकता नहीं, तुरंत खर्च हो जाता है। मैं पिछले लगभग 25 वर्षों से इस बुक इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ हूँ। हर पब्लिशर्स फाइनेंशियली strong हैं। प्री-बुकिंग का उन्हें‌ केवल चस्का लगा हुआ है। जो कहीं कमजोर पड़ते भी हैं। उन्हें सेलर्स और डिस्ट्रब्यूटर्स स्पोर्ट करते रहते हैं। पिछले 10 महीनों में जो भी पुस्तकें छप कर आयी हैं, उनमें से क्या आप किसी एक पुस्तक का नाम बता सकते हैं, जो प्री-बुकिंग करके आपको कोई विशेष लाभ मिला। किताब आती है, सबके लिए भरपूर मात्रा में उपलब्ध होती है। उल्टा पब्लिशर्स पर क्वालिटी प्रेशर होता है, कि बाइडिंग, प्रिंटिंग, पेपर क्वालिटी सब पर फोकस रखना पड़ता है। समय पर लाने की कोशिश रहती है, क्योंकि पैसा लगा होता है।हम अपने जूनून को जिंदा रखे, ये तो सबसे बड़ा अमृत है। प्रकाशक को समझने में देर नहीं लगती, कि किताब का क्या हश्र होने वाला है। 

बहुत जल्दी एक अन्य बहु-प्रतीक्षित प्रकाशन आपके सम्मुख होगा। मुझे नहीं लगता कि वो प्री-बुकिंग जैसी कोई भी बात करेगा, परंतु उसके नाम पर बाजार में होने वाली किसी भी प्री-बुकिंग से आप उसको स्पोर्ट करोगे, ये विचार ही हास्यपद है। पिछले कुछ दिनों में इसी तरह से एक बहुचर्चित और बहु-प्रतीक्षित कामिक्स की प्री-बुकिंग से आपने प्रकाशक को‌ कितना स्पोर्ट किया, या क्या फायदा आपको मिला। आपने स्वयं महसूस किया है। बाकी आप स्वयं प्रबुद्ध पाठक हैं। मैं नाचीज आपको कोई रास्ता दिखा सकता हूँ, इस धोखे में बिल्कुल भी नहीं हूँ। क्योंकि, मन-आपका, पैसा-आपका,समझ-आपकी। पर हां...;

HBM never support Pre-Booking. 

HBM never do Pre-Booking.

नोट- यदि किसी प्रकाशक या पाठक को मेरी किसी बात से ठेस पहुँची हो तो क्षमाप्रार्थी हूँ ।